लवलीना के बाद परवीन हुड्डा ने जीता गोल्ड, रोमांचक फाइनल में चीनी ताइपे की बॉक्सर को हराया
महिलाओं के 65 किलोग्राम वर्ग में चेन निएन-चिन पर 3-2 की जीत, भारतीय मुक्केबाजी को मिली एक और बड़ी सफलता
नागोया। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाज परवीन हुड्डा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 65 किलोग्राम भार वर्ग का स्वर्ण पदक जीत लिया। शुक्रवार, 2 अक्टूबर को खेले गए रोमांचक फाइनल में उन्होंने चीनी ताइपे की चेन निएन-चिन को 3-2 के स्प्लिट डिसीजन से हराया। लवलीना बोरगोहेन की स्वर्णिम सफलता के बाद परवीन ने भी शीर्ष स्थान हासिल करके भारतीय महिला मुक्केबाजी के लिए दिन को यादगार बना दिया।
फाइनल में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। परवीन ने शुरुआती बढ़त बनाई, लेकिन उनकी प्रतिद्वंद्वी ने दूसरे राउंड में वापसी करके मुकाबले को चुनौतीपूर्ण बना दिया। निर्णायक राउंड में परवीन ने अपने पंचों और जवाबी हमलों के सहारे जीत हासिल की। अंतिम निर्णय उनके पक्ष में आने के साथ भारत के खाते में एक और गोल्ड जुड़ गया।
पहले राउंड में परवीन ने बनाई बढ़त
मुकाबले की शुरुआत से ही दोनों मुक्केबाज एक-दूसरे पर बढ़त बनाने की कोशिश करती दिखीं। परवीन ने दूरी बनाए रखते हुए प्रतिद्वंद्वी के हमलों का जवाब दिया। उनके काउंटर पंच प्रभावी रहे और उन्होंने शुरुआती राउंड अपने नाम किया। चेन निएन-चिन ने जैब के सहारे मौके तलाशे, लेकिन परवीन ने जवाबी आक्रमण से अपनी स्थिति मजबूत रखी।
पहला राउंड जीतने से भारतीय मुक्केबाज को शुरुआती लाभ मिला। हालांकि मुकाबला अभी खुला हुआ था और अगले राउंड में चीनी ताइपे की खिलाड़ी ने रणनीति बदलकर वापसी की। परवीन के लिए अपनी बढ़त बनाए रखने के साथ प्रतिद्वंद्वी के बढ़ते दबाव का सामना करना जरूरी हो गया था।
दूसरे राउंड में बदला मुकाबले का रुख
दूसरे राउंड में परवीन ने कुछ प्रभावी बॉडी शॉट लगाए, लेकिन चेन निएन-चिन ने भी अपनी गति और आक्रमण बढ़ाया। उन्होंने इस राउंड में बेहतर वापसी की और मुकाबले को बराबरी की स्थिति में ला दिया। शुरुआती बढ़त के बाद परवीन को अब अंतिम राउंड में निर्णायक प्रदर्शन करना था।
इस वापसी ने फाइनल का रोमांच बढ़ा दिया। दोनों खिलाड़ियों के लिए तीसरा राउंड महत्वपूर्ण हो गया, क्योंकि अब स्वर्ण पदक का फैसला अंतिम चरण के प्रदर्शन और जजों के आकलन पर निर्भर था। परवीन ने इस दबाव के बीच अपने खेल पर ध्यान बनाए रखा।
निर्णायक राउंड में दिखाई मजबूती
तीसरे राउंड में चेन निएन-चिन ने आगे बढ़कर हमले किए, जबकि परवीन ने तेज संयोजन और काउंटर पंचों से जवाब दिया। मुकाबला करीबी रहा, लेकिन अंत में पाँच में से तीन जजों का निर्णय भारतीय मुक्केबाज के पक्ष में गया। इस तरह परवीन ने 3-2 से जीत दर्ज करके स्वर्ण पदक हासिल किया।
स्प्लिट डिसीजन का अर्थ है कि सभी जजों की राय एक जैसी नहीं थी। इस फाइनल में बहुमत परवीन के पक्ष में रहा। करीबी मुकाबले में मिली यह जीत उनके अभियान का सफल समापन बनी। चीनी ताइपे की चेन निएन-चिन को रजत पदक मिला।
सेमीफाइनल में भी किया था प्रभावी प्रदर्शन
परवीन ने फाइनल से पहले सेमीफाइनल में चीन की ली शू को 5-0 से हराया था। वहाँ उन्होंने स्पष्ट अंतर से जीत दर्ज की, जबकि स्वर्ण पदक मुकाबले में उन्हें अधिक कड़ी चुनौती मिली। उनकी अंतिम प्रतिद्वंद्वी चेन निएन-चिन पेरिस ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता हैं।
लवलीना के बाद दूसरी स्वर्णिम सफलता
परवीन से पहले लवलीना बोरगोहेन ने महिलाओं के 75 किलोग्राम वर्ग में चीन की बाओ जियी को 5-0 से हराकर गोल्ड जीता था। इसके बाद परवीन की सफलता ने भारतीय महिला मुक्केबाजी के प्रदर्शन को और मजबूत किया।
उपलब्ध समाचार रिपोर्ट के दोपहर 3:24 बजे के अपडेट के अनुसार, परवीन की जीत के समय भारत के कुल पदकों की संख्या 73 और स्वर्ण पदकों की संख्या 13 बताई गई थी। यह उस समय का आँकड़ा है; अन्य मुकाबलों के परिणाम आने के साथ पदक तालिका बदलती रहती है।
