—Advertisement—

Parshuram Jayanti 19 अप्रैल को, अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को; पंचांग गणना के अनुसार दोनों पर्व अलग-अलग मनाए जाएंगे

Author Picture
Published On: 18 April 2026
Parshuram Jayanti

—Advertisement—

Parshuram Jayanti और अक्षय तृतीया 2026: 

इस वर्ष हिंदू पंचांग को लेकर कई श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति देखने को मिल रही है, खासकर Parshuram Jayanti और अक्षय तृतीया की तिथियों को लेकर। आमतौर पर यह दोनों पर्व एक ही समय के आसपास पड़ते हैं, इसलिए कई लोग इन्हें एक साथ मान लेते हैं। लेकिन वर्ष 2026 में स्थिति अलग है। इस बार ये दोनों महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व एक ही दिन नहीं, बल्कि अलग-अलग तिथियों पर मनाए जाएंगे।

धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणना के अनुसार, इसका मुख्य कारण तिथियों का उदयकाल और प्रदोष काल से जुड़ा होना है। ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार इस वर्ष तृतीया तिथि का आरंभ और समाप्ति समय ऐसे पड़ रहा है, जिससे दोनों पर्व अलग-अलग दिन निर्धारित हुए हैं।

Parshuram Jayanti का धार्मिक महत्व

भगवान श्री परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। उनका जन्म वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को प्रदोष काल में हुआ था। परशुराम को केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि धर्म, न्याय और तपस्या के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, उन्होंने अत्याचारियों का विनाश कर धर्म की पुनः स्थापना की थी। इसलिए परशुराम जयंती केवल जन्मोत्सव नहीं, बल्कि धर्म की विजय का प्रतीक मानी जाती है।

इस दिन विशेष रूप से भगवान परशुराम की पूजा, व्रत और शस्त्र पूजन का महत्व होता है। कई स्थानों पर ब्राह्मण समाज द्वारा विशेष आयोजन भी किए जाते हैं।

इस वर्ष परशुराम जयंती 19 अप्रैल को क्यों?

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि इस वर्ष 19 अप्रैल को दोपहर 12:48 बजे से प्रारंभ हो रही है। यह तिथि 20 अप्रैल की सुबह 10:25 बजे तक रहेगी।

लेकिन हिंदू धर्म में किसी भी देवता का जन्मोत्सव उस समय मनाया जाता है, जब उस तिथि का प्रभाव “प्रदोष काल” में आता है।

प्रदोष काल सूर्यास्त के आसपास का समय होता है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इस वर्ष तृतीया तिथि का प्रदोष काल 19 अप्रैल को पड़ रहा है, इसलिए परशुराम जयंती 19 अप्रैल को ही मनाई जाएगी।

इस निर्णय का आधार केवल पंचांग की गणना नहीं, बल्कि धार्मिक परंपराएं भी हैं, जिनका पालन सदियों से किया जा रहा है।

अक्षय तृतीया का महत्व क्या है?

अक्षय तृतीया हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और पवित्र तिथि मानी जाती है। “अक्षय” शब्द का अर्थ होता है—जिसका कभी क्षय न हो। इस दिन किए गए दान, पुण्य और शुभ कार्यों का फल अक्षय यानी कभी समाप्त न होने वाला माना जाता है।

यह दिन धन, समृद्धि, विवाह, निवेश और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। कई लोग इस दिन सोना खरीदते हैं, नए व्यवसाय शुरू करते हैं और धार्मिक कार्य करते हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ भी हुआ था। इसलिए इसे युगादि तिथि भी कहा जाता है।

इस वर्ष अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को क्यों?

अक्षय तृतीया उदय तिथि के आधार पर मनाई जाती है, यानी जिस दिन तृतीया तिथि सूर्योदय के समय मौजूद रहती है, वही दिन अक्षय तृतीया माना जाता है।

इस वर्ष तृतीया तिथि 19 अप्रैल को दोपहर 12:48 बजे शुरू होकर 20 अप्रैल की सुबह 10:25 बजे तक रहेगी।

चूंकि 20 अप्रैल को सुबह के समय तृतीया तिथि मौजूद है, इसलिए उदय तिथि के अनुसार अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को मनाई जाएगी।

उदय तिथि और प्रदोष काल का अंतर समझें

हिंदू पंचांग में तिथियों के निर्धारण के दो प्रमुख आधार होते हैं—उदय तिथि और प्रदोष काल।

  • उदय तिथि: जब कोई तिथि सूर्योदय के समय मौजूद रहती है।
  • प्रदोष काल: सूर्यास्त के आसपास का समय, जो विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

अक्षय तृतीया हमेशा उदय तिथि के अनुसार मनाई जाती है, जबकि परशुराम जयंती प्रदोष काल के अनुसार मनाई जाती है।

इसी अंतर के कारण इस वर्ष दोनों पर्व अलग-अलग दिन पड़ रहे हैं।

अक्षय तृतीया का मुहूर्त

इस वर्ष अक्षय तृतीया का शुभ समय इस प्रकार है—

  • तिथि प्रारंभ: 19 अप्रैल दोपहर 12:48 बजे
  • तिथि समाप्त: 20 अप्रैल सुबह 10:25 बजे

इस अवधि को अत्यंत शुभ माना गया है, जिसमें दान, पूजा और नए कार्यों की शुरुआत करना लाभकारी होता है।

ज्योतिषाचार्य की राय

ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार, यह स्थिति पूरी तरह पंचांग की गणना का परिणाम है। उन्होंने बताया कि तिथियों का बदलता समय और सूर्य उदय के आधार पर होने वाली गणना के कारण ही इस वर्ष दोनों पर्व अलग-अलग दिन आए हैं।

उनका कहना है कि यह कोई असामान्य स्थिति नहीं है, बल्कि खगोलीय गणना का स्वाभाविक परिणाम है।

धार्मिक दृष्टि से क्या महत्व है?

धार्मिक दृष्टि से दोनों पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य अलग-अलग है।

  • परशुराम जयंती: धर्म की रक्षा, शक्ति और तपस्या का प्रतीक
  • अक्षय तृतीया: समृद्धि, दान और शुभ कार्यों का प्रतीक

इसलिए दोनों पर्वों का महत्व अपने-अपने स्थान पर अत्यंत विशेष है।

समाज में मनाने की परंपरा

भारत के विभिन्न हिस्सों में परशुराम जयंती को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। विशेष रूप से ब्राह्मण समाज इस दिन भगवान परशुराम की पूजा करता है और शोभायात्राएं निकाली जाती हैं।

वहीं अक्षय तृतीया पर लोग सोना खरीदते हैं, दान करते हैं और नए कार्यों की शुरुआत करते हैं। कई स्थानों पर सामूहिक विवाह भी आयोजित किए जाते हैं।

भ्रम क्यों होता है?

अक्सर लोगों में यह भ्रम इसलिए होता है क्योंकि दोनों पर्व वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि से जुड़े होते हैं।

लेकिन सही मायने में दोनों के लिए समय निर्धारण का तरीका अलग है। इसी कारण हर साल दोनों पर्व एक ही दिन नहीं पड़ते।

आधुनिक समय में महत्व

आज के समय में भी ये पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो गए हैं।

अक्षय तृतीया पर बाजारों में सोने की खरीदारी बढ़ जाती है, जबकि परशुराम जयंती पर धार्मिक आयोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।

निष्कर्ष

वर्ष 2026 में परशुराम जयंती और अक्षय तृतीया का अलग-अलग दिन पड़ना पंचांग गणना और खगोलीय स्थिति का परिणाम है।

19 अप्रैल को परशुराम जयंती मनाई जाएगी, जबकि 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया का पर्व होगा।

दोनों ही पर्व अपने-अपने धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के कारण विशेष हैं।

जहां एक ओर परशुराम जयंती धर्म और शक्ति का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर अक्षय तृतीया समृद्धि और पुण्य का प्रतीक है।

इन दोनों पर्वों का संदेश यही है कि जीवन में धर्म, दान और सदाचार का संतुलन बनाए रखना ही सच्चा आध्यात्मिक मार्ग है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp