पानी तेरी अजब कहानी कविता के माध्यम से कवि छगनलाल मुथा ने जल संरक्षण, वर्षा, सूखा, बाढ़ और जीवन में पानी के महत्व का भावपूर्ण संदेश दिया है। पढ़ें पूरी कविता, उसका अर्थ और जल बचाने का संकल्प।
पानी तेरी अजब कहानी: 10 बड़ी सीख जो हर व्यक्ति को जाननी चाहिए, जल संरक्षण का सबसे प्रेरक संदेश
पानी तेरी अजब कहानी
भारत सहित पूरी दुनिया आज जल संकट, बाढ़ और सूखे जैसी दोहरी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में प्रसिद्ध कवि छगनलाल मुथा (सान्डेराव, मुंबई) की रचना “पानी तेरी अजब कहानी” केवल एक कविता नहीं बल्कि समाज को जागरूक करने वाला संदेश है।
पानी तेरी अजब कहानी हमें बताती है कि जल ही जीवन है। पानी के बिना धरती पर किसी भी जीव की कल्पना संभव नहीं है। जब पानी संतुलित मात्रा में बरसता है तो धरती पर हरियाली छा जाती है, लेकिन यही पानी जब अत्यधिक बरसता है तो बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं उत्पन्न हो जाती हैं।
पानी तेरी अजब कहानी कविता
पानी तेरी अजब कहानी,
तेरी लीला किसी ने नहीं जानी,
धरती से उड़ अंबर में जाकर,
फिर बरसे धरती पर पानी।
जिस में मिले वैसे रंग जाये,
दूध में मिले दूध बन जाये,
आंख से निकले आंसु कहलाये,
सीप पीये मोती बन जाये।
ज्यादा बरसे हाहाकार मचाये,
नदी बांधो में उबाल सा आये,
जन जीवन अस्त-व्यस्त हो जाये,
फसलें सारी नष्ट हो जाये।
कई जनो के घर बार डुबाये,
कई जनो की जाने चलीं जाये,
चारो और होकर भी पानी,
पीने के पानी के लाले पड़ जाये।
कम बरसे तो अकाल पड़ जाए,
खेती नहीं कोई कर पाये,
उद्योग व्यापार मंद हो जाए,
पशु-पक्षी कईयों मर जाये।
इन्द्र देव को कैसे मनाएं,
जगह जगह होम हवन कराये,
तू बरसे तो सब खुशियां मनाये,
मनभावन व्यंजन बनाये।
तुझ से ही है ये हरियाली,
तुझ से ही जीवन सृष्टि में सारा,
जलचर थलचर सबके जीवन में
सिर्फ तेरा ही है सहारा।
मत बहाओ कभी फ़िज़ूल में पानी,
मत करो अपनी बर्बादी,
एक-एक बूंद बचाओ मुथा,
यही बचायेगा सबकी जिंदगानी।
पानी तेरी अजब कहानी का संदेश
पानी तेरी अजब कहानी केवल कविता नहीं बल्कि प्रकृति का दर्शन है। कवि बताते हैं कि पानी अपना कोई रंग नहीं रखता, बल्कि जिस वस्तु में मिलता है उसी का रूप धारण कर लेता है। यही पानी कभी आंसू बनकर दर्द व्यक्त करता है तो कभी सीप में जाकर मोती बन जाता है।
पानी तेरी अजब कहानी और जल संरक्षण
आज भारत के कई राज्यों में जल संकट लगातार बढ़ रहा है। भूजल स्तर गिर रहा है, नदियां सिकुड़ रही हैं और वर्षा का स्वरूप भी बदल रहा है।ऐसे समय में पानी तेरी अजब कहानी प्रत्येक नागरिक को यह संदेश देती है कि—
- वर्षा जल संचयन करें।
- नलों को खुला न छोड़ें।
- पेड़ लगाएं।
- भूजल का संरक्षण करें।
- जल स्रोतों को प्रदूषित न करें।
बाढ़ और सूखे की दोहरी चुनौती
कविता में बताया गया है कि जब पानी आवश्यकता से अधिक बरसता है तो बाढ़ आती है और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।दूसरी ओर यदि वर्षा कम होती है तो किसान खेती नहीं कर पाते, उद्योग प्रभावित होते हैं और पशु-पक्षियों तक के जीवन पर संकट आ जाता है।यही कारण है कि जल का संतुलित उपयोग अत्यंत आवश्यक है।
हर बूंद की कीमत समझें
आज घरों, खेतों, उद्योगों और शहरों में पानी का अत्यधिक दुरुपयोग हो रहा है।यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन कुछ लीटर पानी बचाए तो करोड़ों लीटर जल का संरक्षण संभव है।पानी तेरी अजब कहानी हमें यही प्रेरणा देती है कि जल की हर बूंद अमूल्य है।
पर्यावरण और जल का अटूट संबंध
जल और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं।
- पेड़ होंगे तो वर्षा होगी।
- वर्षा होगी तो जल स्रोत भरेंगे।
- जल होगा तो जीवन होगा।
- जीवन होगा तो विकास होगा।
समाज के लिए प्रेरणा
यह कविता विद्यार्थियों, किसानों, पर्यावरण प्रेमियों तथा आम नागरिकों सभी के लिए प्रेरणादायक है। विद्यालयों, सामाजिक कार्यक्रमों तथा जल संरक्षण अभियानों में इस कविता का संदेश लोगों को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
निष्कर्ष
पानी तेरी अजब कहानी हमें याद दिलाती है कि जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं बल्कि जीवन का आधार है। यदि आज जल संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह जल बचाए, वर्षा जल का संग्रह करे और पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाए।
कवि
कवि : छगनलाल मुथा
स्थान : सान्डेराव, मुंबई
