मातृ नवमी पर गायत्री परिवार ने किया पितृ तर्पण और पंचकुंडी महायज्ञ
नारी जागरण सम्मेलन में सोना दीदी ने दिया संस्कृति संरक्षण का संदेश, बोलीं—हम बदलेंगे तो घर बदलेगा
Manawar । अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में तहसील संगठन मनावर द्वारा ग्राम टेमरिया में मातृ नवमी के अवसर पर विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। रविवार को आयोजित एक दिवसीय कार्यक्रम में सामूहिक साधना, पितरों के निमित्त श्राद्ध तर्पण, पंचकुंडी गायत्री महायज्ञ और नारी जागरण सम्मेलन का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों एवं गायत्री परिवार से जुड़े परिजनों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गायत्री परिवार की वक्ता सोना दीदी, जिला संयोजक हीरालाल पाटीदार एवं सहदेव पाटीदार उपस्थित रहे। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ कार्यक्रम में सामाजिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर भी लोगों को जागरूक किया गया।
सामूहिक साधना और श्राद्ध तर्पण से हुई शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक साधना एवं पितरों के निमित्त श्राद्ध तर्पण के साथ हुआ। मातृ नवमी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने अपने पितरों का स्मरण करते हुए विधि-विधान से तर्पण किया और परिवार एवं समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।
इसके बाद ग्रामीणों एवं गायत्री परिवार के परिजनों ने गायत्री परिवार के जयघोष के साथ गांव में रैली निकाली। रैली के माध्यम से लोगों को भारतीय संस्कृति, संस्कार और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया गया। रैली के पश्चात पंचकुंडी गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुति देकर वातावरण को आध्यात्मिक बनाया।
नारी जागरण सम्मेलन में संस्कृति संरक्षण पर जोर
नारी जागरण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता सोना दीदी ने भारतीय संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत देवभूमि है और इसकी आन-बान-शान तथा गौरवशाली संस्कृति की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव नई पीढ़ी पर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कारों से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि परिवार में संस्कारों की शुरुआत स्वयं से होती है। यदि माता-पिता अपने माता-पिता अर्थात बच्चों के दादा-दादी और बुजुर्गों का सम्मान करेंगे, उनके चरण स्पर्श करेंगे, तो बच्चे भी उसी परंपरा को सीखेंगे और आगे बढ़ाएंगे।
सोना दीदी ने कहा, “मर जाएंगे, मिट जाएंगे, लेकिन अपनी संस्कृति नहीं छोड़ेंगे।” उन्होंने युवाओं से देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी समाज और राष्ट्र की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

“हम बदलेंगे तो घर बदलेगा”
सोना दीदी ने परिवार में सकारात्मक बदलाव की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि व्यक्ति स्वयं में सुधार करेगा तो उसका प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ेगा। उन्होंने कहा, “हम बदलेंगे तो घर बदलेगा और हम सुधरेंगे तो घर सुधरेगा।”
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। उन्होंने गुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस व्यक्ति के जीवन में गुरु का मार्गदर्शन आ जाता है, उसका जीवन सही दिशा में आगे बढ़ने लगता है। उन्होंने महिलाओं से परिवार में संस्कारों और सामाजिक जागरूकता को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
भजन-संगीत के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
पंचकुंडी गायत्री महायज्ञ का विधिवत संपादन गिरधारी लाल मालवीया एवं बादल भालके ने कराया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां अर्पित कीं। कार्यक्रम में विजय सिंह सोलंकी एवं गोपाल मौर्य ने भजन-संगीत की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन अखिलेश जायसवाल ने किया। आयोजन को सफल बनाने में भारत मंडलोई, लक्ष्मण रावत, आशीष जायसवाल, सागर सिंह मंडलोई, राकेश कनासे सहित अनेक कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा।
इस अवसर पर गायत्री परिवार के सुखदेव राठौड़, आशीष जायसवाल, ओंकार कनेल, भूरेसिंह सोलंकी, हंसा जायसवाल, ममता राठौड़ सहित देवरा, खंडलाई, सीतापुरी, चिराखान और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में परिजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। धार्मिक अनुष्ठानों एवं सामाजिक जागरूकता के संदेश के साथ कार्यक्रम का समापन सामूहिक सहभोज के साथ हुआ।
