नागपंचमी पर महावीर व्यायामशाला का भव्य जुलूस, भिलट देव मंदिर में 11 जोड़ी पहलवानों ने दिखाए कुश्ती के दांव-पेच
संवाददाता : कौशिक पण्डित
वर्षों पुरानी परंपरा के तहत निकला भव्य जुलूस
Manawar, जिला धार। नागपंचमी के पावन अवसर पर मनावर नगर में धार्मिक आस्था, पारंपरिक खेल और भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। वर्षों पुरानी परंपरा को जीवंत रखते हुए महावीर व्यायामशाला की ओर से सोमवार को नगर में भव्य जुलूस निकाला गया। जुलूस में व्यायामशाला से जुड़े सदस्यों, पहलवानों और बड़ी संख्या में कुश्ती प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
नागपंचमी के अवसर पर आयोजित यह जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। जुलूस के दौरान पहलवानों और व्यायामशाला के सदस्यों में खासा उत्साह देखने को मिला। नगरवासियों ने भी जगह-जगह जुलूस का स्वागत किया और पारंपरिक आयोजन को लेकर अपनी खुशी व्यक्त की।
जुलूस का समापन नगर के प्राचीन भिलट देव मंदिर परिसर में हुआ, जहां नागपंचमी के अवसर पर पारंपरिक प्रतीकात्मक दंगल का आयोजन किया गया। इस दंगल में 11 जोड़ी पहलवानों ने अखाड़े में उतरकर अपनी कुश्ती कला और शारीरिक दमखम का प्रदर्शन किया।
भिलट देव मंदिर में सजा पारंपरिक अखाड़ा
भिलट देव मंदिर परिसर में आयोजित दंगल को लेकर सुबह से ही कुश्ती प्रेमियों में उत्साह दिखाई दिया। नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर पहुंचे। पारंपरिक दंगल को देखने के लिए दर्शकों की भीड़ जुटी रही।
अखाड़े में उतरने वाले पहलवानों ने एक-दूसरे के सामने अपनी ताकत, संतुलन और कुश्ती के पारंपरिक दांव-पेच का प्रदर्शन किया। मुकाबले प्रतीकात्मक रूप से आयोजित किए गए, लेकिन पहलवानों के उत्साह और दमखम में किसी तरह की कमी नजर नहीं आई।
जैसे ही कोई पहलवान प्रतिद्वंद्वी पर जोरदार दांव लगाता या उसे चित करने की कोशिश करता, दर्शकों में उत्साह बढ़ जाता। हर रोमांचक क्षण पर तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई देती रही। दर्शकों ने तालियां बजाकर अखाड़े में उतरे पहलवानों का उत्साह बढ़ाया।
11 जोड़ी पहलवानों ने दिखाया दमखम
नागपंचमी के इस पारंपरिक आयोजन में कुल 11 जोड़ी पहलवानों ने अखाड़े में उतरकर कुश्ती के दांव-पेच दिखाए। पहलवानों के बीच हुए मुकाबलों में शारीरिक क्षमता के साथ-साथ तकनीक और संतुलन की भी झलक देखने को मिली।
कुश्ती भारतीय पारंपरिक खेलों में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। अखाड़े की मिट्टी में उतरने वाले पहलवान केवल शारीरिक ताकत का प्रदर्शन नहीं करते, बल्कि अनुशासन, अभ्यास, धैर्य और खेल भावना का भी परिचय देते हैं। यही भावना नागपंचमी के इस दंगल में भी देखने को मिली।
दंगल के दौरान दर्शकों ने पहलवानों का उत्साह बढ़ाया। मंदिर परिसर में मौजूद बच्चों और युवाओं में भी कुश्ती को लेकर विशेष उत्सुकता दिखाई दी। कई युवा पूरे मुकाबले के दौरान अखाड़े पर नजर बनाए रहे और पहलवानों के दांव-पेच को करीब से देखते रहे।

नागपंचमी और दंगल की वर्षों पुरानी परंपरा
महावीर व्यायामशाला के उस्ताद श्याम बाबा आदिवाल ने बताया कि नागपंचमी के अवसर पर दंगल आयोजित करने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। यह आयोजन केवल कुश्ती प्रतियोगिता तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे नगर की पारंपरिक संस्कृति और खेल विरासत भी जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि समय के साथ खेलों के स्वरूप में बदलाव आया है, लेकिन पारंपरिक कुश्ती और अखाड़े की संस्कृति आज भी अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है। नागपंचमी पर आयोजित होने वाला यह दंगल नई पीढ़ी को पारंपरिक खेलों से परिचित कराने का माध्यम भी बन रहा है।
परंपरा के अनुसार नागपंचमी के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों के साथ दंगल आयोजित किया जाता है। इससे धार्मिक आस्था के साथ भारतीय पारंपरिक खेल संस्कृति को भी मंच मिलता है। यही कारण है कि इस आयोजन में हर वर्ष कुश्ती प्रेमियों की रुचि बनी रहती है।
युवाओं को कुश्ती और व्यायाम से जोड़ना उद्देश्य
महावीर व्यायामशाला के अध्यक्ष कैलाश राठौड़ ने कहा कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को पारंपरिक खेल कुश्ती और व्यायाम से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं के लिए शारीरिक गतिविधियां और खेल बेहद जरूरी हैं।
कुश्ती जैसे पारंपरिक खेल युवाओं में शारीरिक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियमित व्यायाम और खेल से युवाओं में मेहनत करने की आदत, धैर्य और संघर्ष की भावना विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि महावीर व्यायामशाला का प्रयास है कि नगर के अधिक से अधिक युवा खेल और व्यायाम से जुड़ें। इसके साथ ही आपसी भाईचारे और खेल भावना को भी बढ़ावा मिले। नागपंचमी के अवसर पर आयोजित दंगल इसी उद्देश्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
अखाड़े में दिखाई दी खेल भावना
दंगल के दौरान पहलवानों के बीच मुकाबलों में उत्साह तो देखने को मिला, लेकिन इसके साथ खेल भावना भी दिखाई दी। पारंपरिक कुश्ती में प्रतिद्वंद्वी को हराने के साथ-साथ उसके सम्मान को भी महत्व दिया जाता है। यही भारतीय कुश्ती परंपरा की खास पहचान है।
अखाड़े में उतरने वाले पहलवानों ने अपने-अपने कौशल का प्रदर्शन किया। किसी ने ताकत के दम पर मुकाबला करने का प्रयास किया तो किसी ने तकनीकी दांव-पेच के जरिए प्रतिद्वंद्वी को मात देने की कोशिश की।
दर्शकों के बीच भी मुकाबलों को लेकर उत्साह बना रहा। रोमांचक दांव लगने पर तालियों की गूंज पूरे मंदिर परिसर में सुनाई देती रही। आयोजन ने लोगों को पारंपरिक कुश्ती से जोड़ने के साथ उन्हें मनोरंजन का अवसर भी प्रदान किया।

महावीर व्यायामशाला के पहलवान और सदस्य रहे मौजूद
आयोजन में महावीर व्यायामशाला के ट्रेनर यशपाल राणा चौहान, माधव सेन और अशोक सेन सहित व्यायामशाला से जुड़े अनेक सदस्य मौजूद रहे। पहलवान भारत कुशवाह, संजय पाटीदार, संजय कुशवाह, लोकेश राठौड़ और शिवम सेन सहित अन्य पहलवानों ने भी आयोजन में सहभागिता की।
व्यायामशाला से जुड़े सदस्यों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जुलूस से लेकर मंदिर परिसर में आयोजित दंगल तक सभी व्यवस्थाओं में सदस्यों और पहलवानों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
आयोजन में शामिल पहलवानों और सदस्यों ने नागपंचमी की परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करने का संदेश भी दिया।
जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों ने बढ़ाया उत्साह
नागपंचमी पर आयोजित दंगल में भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष मोनू पाटीदार एवं कनिष्का कंप्यूटर सेंटर के संचालक सचिन दामके भी पहुंचे। उन्होंने अखाड़े में उतरे पहलवानों का उत्साहवर्धन किया और पारंपरिक आयोजन की सराहना की।
गणमान्य लोगों की उपस्थिति से पहलवानों और आयोजकों का उत्साह बढ़ा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के पारंपरिक आयोजन नगर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं।
कुश्ती प्रेमियों की उमड़ी भीड़
नागपंचमी के अवसर पर आयोजित दंगल को देखने के लिए मनावर नगर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में कुश्ती प्रेमी पहुंचे। मंदिर परिसर में दर्शकों की मौजूदगी से आयोजन का माहौल उत्साहपूर्ण बना रहा।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने पहलवानों के मुकाबलों का आनंद लिया। विशेष रूप से युवाओं और बच्चों में कुश्ती को लेकर उत्साह नजर आया। दर्शकों ने पहलवानों के प्रत्येक दांव पर तालियां बजाईं और उनका हौसला बढ़ाया।
आयोजन ने यह भी दिखाया कि आधुनिक खेलों के दौर में पारंपरिक कुश्ती के प्रति लोगों की रुचि अभी भी कायम है। यदि इस प्रकार के आयोजन नियमित रूप से होते रहें तो युवाओं को पारंपरिक खेलों की ओर आकर्षित किया जा सकता है।

धार्मिक आस्था के साथ खेल और संस्कृति का संगम
नागपंचमी का पर्व भगवान नाग देवता की आराधना और धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। मनावर में इसी धार्मिक अवसर पर महावीर व्यायामशाला द्वारा आयोजित जुलूस और दंगल ने पर्व को एक अलग रंग दिया।
भिलट देव मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण के बीच पहलवानों का अखाड़े में उतरना और पारंपरिक कुश्ती के दांव-पेच दिखाना भारतीय संस्कृति में धर्म और खेल के बीच मौजूद गहरे संबंध को दर्शाता है।
आयोजन के दौरान लोगों ने धार्मिक आस्था के साथ पारंपरिक खेल संस्कृति का आनंद लिया। यही वजह रही कि दंगल में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी वर्ग के लोगों की भागीदारी देखने को मिली।
नई पीढ़ी को परंपरा से जोड़ने का संदेश
महावीर व्यायामशाला द्वारा आयोजित यह आयोजन केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को यह समझने का अवसर देते हैं कि भारतीय संस्कृति में खेल, व्यायाम, अनुशासन और सामुदायिक सहभागिता का कितना महत्व रहा है।
कुश्ती जैसे पारंपरिक खेलों को प्रोत्साहन मिलने से युवाओं को मोबाइल और डिजिटल दुनिया से अलग मैदान और अखाड़े की ओर आकर्षित करने में मदद मिल सकती है। व्यायाम और खेल के माध्यम से युवा स्वस्थ जीवनशैली को अपना सकते हैं।
आयोजकों ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाने और अधिक युवाओं को महावीर व्यायामशाला से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
यादगार रहा नागपंचमी का आयोजन
मनावर में नागपंचमी के अवसर पर महावीर व्यायामशाला का भव्य जुलूस और भिलट देव मंदिर परिसर में आयोजित पारंपरिक दंगल श्रद्धालुओं और कुश्ती प्रेमियों के लिए यादगार रहा। 11 जोड़ी पहलवानों ने अखाड़े में उतरकर अपने दमखम और कुश्ती कौशल का प्रदर्शन किया, वहीं दर्शकों ने तालियों के साथ उनका उत्साह बढ़ाया।
आयोजन में धार्मिक आस्था, पारंपरिक खेल, युवा शक्ति और सामाजिक सहभागिता का सुंदर संगम देखने को मिला। महावीर व्यायामशाला के पदाधिकारियों और सदस्यों ने वर्षों पुरानी दंगल की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यह संदेश दिया कि आधुनिक समय में भी भारतीय पारंपरिक खेलों और संस्कृति को जीवंत रखा जा सकता है।
नागपंचमी पर मनावर में गूंजते जयकारों, जुलूस की रौनक और अखाड़े में पहलवानों के दांव-पेच ने पूरे नगर में उत्साह का माहौल बना दिया। भिलट देव मंदिर में आयोजित यह पारंपरिक दंगल आने वाली पीढ़ियों को कुश्ती, व्यायाम, अनुशासन और अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।

