Indore में पार्किंग पर निगम की कमाई की तैयारी, पालिका प्लाजा के व्यापारियों में आक्रोश
पालिका प्लाजा फेज-1 और फेज-2 की पार्किंग पांच साल के लिए ठेके पर देने की तैयारी, चौथी बार जारी हुए टेंडर; व्यापारियों ने महापौर और आयुक्त से की शिकायत
Indore । शहर में यातायात जाम और पार्किंग की समस्या से नागरिकों को राहत नहीं मिल पा रही है। दूसरी ओर नगर निगम की कई बहुमंजिला पार्किंग इमारतों का समुचित उपयोग नहीं हो रहा है। ऐसे में निगम द्वारा पांच पार्किंग स्थलों को पांच साल के लिए ठेके पर देने की प्रक्रिया ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। इनमें एमटीएच कंपाउंड स्थित पालिका प्लाजा फेज-1 और फेज-2 की बेसमेंट तथा सतह पर बनी पार्किंग भी शामिल है। यहां दुकान और कार्यालय संचालित करने वाले व्यापारियों ने प्रस्तावित व्यवस्था का विरोध करते हुए सवाल उठाया है कि क्या उन्हें अपनी ही दुकान या दफ्तर आने के लिए वाहन पार्किंग का शुल्क चुकाना पड़ेगा?
पांच पार्किंग स्थलों के लिए चौथी बार टेंडर
नगर निगम ने हाल ही में पांच पार्किंग स्थलों को पांच साल के लिए ठेके पर देने के उद्देश्य से ऑनलाइन टेंडर आमंत्रित किए हैं। इनमें योजना क्रमांक 54 में रघुनाथ पेट्रोल पंप के पास स्थित मल्टीस्टोरी पार्किंग, फॉर्च्यून लैंड होटल के पास की पार्किंग, बजाजखाना तथा पालिका प्लाजा फेज-1 और फेज-2 की पार्किंग शामिल हैं। इन स्थलों के लिए चौथी बार टेंडर जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पालिका प्लाजा की दोनों इमारतें एमटीएच कंपाउंड में आमने-सामने स्थित हैं। यहां नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के कार्यालयों के साथ एक सरकारी लाइब्रेरी भी संचालित होती है। परिसर में बेसमेंट और सतह पर पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है। व्यापारियों का कहना है कि इस सुविधा का उद्देश्य परिसर में आने वाले लोगों को सहूलियत देना होना चाहिए, न कि उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ पैदा करना।
अपनी दुकान पर आने के लिए भी देना होगा शुल्क?
पालिका प्लाजा के व्यापारियों का तर्क है कि किसी भी व्यावसायिक इमारत में दुकान या कार्यालय संचालित करने वाले व्यक्ति को अपने वाहन की पार्किंग के लिए अलग से रोजाना शुल्क चुकाने की व्यवस्था उचित नहीं है। उनके अनुसार, यहां आने वाले ग्राहकों को भी सुविधाजनक पार्किंग मिलनी चाहिए, ताकि बाजार में खरीदारी और अन्य कामों के लिए आने वाले लोगों को परेशानी न हो।
व्यापारियों का कहना है कि यदि पार्किंग ठेके पर दे दी जाती है और वाहन खड़ा करने के लिए शुल्क लिया जाता है, तो उन्हें रोजाना अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। इससे व्यापारियों के साथ-साथ ग्राहकों पर भी असर पड़ सकता है। वे पहले भी इस प्रस्ताव का विरोध कर चुके हैं और इस संबंध में महापौर तथा नगर निगम आयुक्त को पत्र सौंपकर अपनी आपत्ति दर्ज करा चुके हैं।
पार्किंग व्यवस्था पर यातायात विभाग की राय
रिपोर्ट के अनुसार, यातायात विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी परिसर में दुकान और कार्यालय चलाने वाले व्यापारियों को पार्किंग की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराने के पक्ष में हैं। उनका तर्क है कि नियमित रूप से आने वाले व्यापारियों से हर दिन पार्किंग शुल्क वसूलना व्यावहारिक नहीं होगा। व्यापारियों का भी कहना है कि पार्किंग नीति बनाते समय परिसर के नियमित उपयोगकर्ताओं और ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
पुरानी व्यवस्था और अवैध वसूली की शिकायतें
शहर में पहले नगर निगम के कई पार्किंग स्टैंड ठेके पर संचालित होते थे। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ स्थानों पर अवैध वसूली और दबंगई की शिकायतें सामने आने के बाद ठेका व्यवस्था बंद कर निःशुल्क पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। हालांकि, आरोप है कि कुछ निःशुल्क पार्किंग स्थलों पर भी लोगों से अवैध रूप से पैसे वसूले जाते हैं। ऐसे में नई ठेका व्यवस्था लागू करने से पहले निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी जरूरी माना जा रहा है।
पार्किंग समस्या का समाधान कब?
इंदौर में वाहनों की बढ़ती संख्या के बीच पार्किंग व्यवस्था को बेहतर बनाना नगर निगम के सामने बड़ी चुनौती है। एक ओर बहुमंजिला पार्किंग भवनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर व्यावसायिक परिसरों में आने वाले व्यापारियों और ग्राहकों को सुविधाजनक पार्किंग उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
पालिका प्लाजा के व्यापारियों की मांग है कि पार्किंग स्थलों को ठेके पर देने से पहले उनकी आपत्तियों पर विचार किया जाए और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे नियमित उपयोगकर्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर निगम व्यापारियों की मांग पर क्या निर्णय लेता है और प्रस्तावित टेंडर प्रक्रिया में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।
