पाकिस्तान ने अफगान तालिबान को अब तक का सबसे सख्त संदेश भेजते हुए साफ कहा है कि या तो तालिबान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करे और सुरक्षा संबंधी शर्तों को माने, अन्यथा इस्लामाबाद अफगानिस्तान में उन राजनीतिक ताकतों का समर्थन करेगा जो तालिबान सरकार को चुनौती देने की क्षमता रखती हैं। सूत्रों के अनुसार यह चेतावनी तुर्की के माध्यम से तालिबान तक पहुंचाई गई। पाकिस्तान महीनों से वार्ता कर रहा था, लेकिन तालिबान की जिद और TTP पर कार्रवाई से इनकार के कारण बातचीत विफल रही।
अफगानिस्तान-भारत की दोस्ती से घबराया पाकिस्तान :
स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब तालिबान ने भारत के साथ अपने कूटनीतिक संबंध मजबूत करने शुरू किए। बता दे की अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने हाल ही में भारत का दौरा किया था। पाकिस्तान के रणनीतिक और सुरक्षा हितों पर सीधा असर डालने वाला माना गया।

भारतीय निकटता से बोखलाए पाकिस्तान ने अब अपनी नीति में बड़ा बदलाव करते हुए तालिबान विरोधी नेताओं जैसे हामिद करजई, अशरफ गनी, अहमद मसूद, अब्दुल रशीद दोस्तम, NRF और नॉर्दर्न अलायंस से जुड़े कमांडरों से फिर संपर्क बढ़ाना शुरू किया है। पाकिस्तान ने इन नेताओं को ‘राजनीतिक स्पेस, सुरक्षित उपस्थिति और ऑफिस सुविधा’ देने की पेशकश भी की है। पहली बार पाकिस्तान खुले तौर पर एक व्यवस्थित अफगान विपक्ष तैयार करने पर विचार कर रहा है।
TTP के खिलाफ होगी कार्रवाई :
पाकिस्तान ने वार्ता के दौरान तालिबान से TTP के खिलाफ कठोर कार्रवाई, गिरफ्तार आतंकियों का सुपुर्दगी, डूरंड लाइन पर स्थायी शांति, सीमा पर बफर ज़ोन बनाने और व्यापार सामान्य करने की मांग की थी।

परंतु तालिबान ने इन शर्तों, खासकर TTP लड़ाकों की सुपुर्दगी और बफर ज़ोन बनाने से साफ इनकार कर दिया। इस बीच सीमा पार हमले और पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर बढ़ते हमले इस्लामाबाद के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती बनते जा रहे हैं।
