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EOS और ROKETSAN के लेजर हथियार Pakistan की नौसेना में शामिल होने के करीब

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Published On: 27 March 2026
Pakistan

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Pakistan की नौसेना में आधुनिक हथियारों की तैयारी

Pakistan वर्तमान में अपनी नौसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक हथियारों पर काम कर रहा है। जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान को ऑस्ट्रेलिया से आधुनिक लेजर वेपन सिस्टम मिलने की संभावना है। इसके लिए वह तुर्की के माध्यम से बातचीत कर रहा है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य अरब सागर में बढ़ते ड्रोन और छोटे जहाजों के हमलों से बचाव करना है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान नेवी ने 4 फरवरी को दो 10 किलोवाट (kW) लेजर सिस्टम और रडार के लिए टेंडर जारी किया था। इन हथियारों को जहाजों पर स्थापित किया जाएगा ताकि ड्रोन और छोटे हमलों से बचाव किया जा सके।

लेजर वेपन सिस्टम क्या हैं?

लेजर वेपन सिस्टम, जिसे डायरेक्टेड एनर्जी वेपन भी कहते हैं, पारंपरिक गोलियों या मिसाइल की जगह लेजर किरणों का उपयोग करते हैं। ये किरणें उच्च ताप पैदा करती हैं और दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल या छोटे जहाजों को तुरंत क्षतिग्रस्त कर सकती हैं।

ये हथियार कम लागत वाले ड्रोन हमलों को रोकने के लिए अत्यंत प्रभावी हैं। आधुनिक तकनीक से लैस होने के कारण ये सिस्टम सेंसर, जैमर और रडार के माध्यम से दुश्मन के लक्ष्यों की पहचान और उसे नष्ट करने में सक्षम हैं।

ऑस्ट्रेलिया और तुर्की की भूमिका

इस डील में ऑस्ट्रेलियाई कंपनी Electro Optic Systems (EOS) प्रमुख भूमिका निभा सकती है। EOS ने “अपोलो” नामक हाई पावर लेजर सिस्टम विकसित किया है, जिसकी क्षमता 100 kW तक है। इसके अलावा, तुर्की की डिफेंस कंपनी ROKETSAN ने “अलका” लेजर वेपन सिस्टम तैयार किया है। यह 10 kW की क्षमता पर लगभग 2.2 किलोमीटर तक प्रभावी है और इसमें लेजर, जैमर, सेंसर और रडार जैसी तकनीक शामिल है।

पाकिस्तान की टेंडर प्रक्रिया में 20 kW तक की क्षमता वाले लेजर सिस्टम की मांग की गई है। माना जा रहा है कि EOS को प्राथमिकता दी जा सकती है और तुर्की के माध्यम से बातचीत की जा रही है।

Pakistan की मांग और टेंडर प्रक्रिया

Pakistan नेवी ने 4 फरवरी को 10 kW लेजर सिस्टम और रडार के लिए टेंडर जारी किया। इसके तहत जहाजों पर लेजर हथियारों की स्थापना की योजना बनाई गई है। टेंडर में 20 kW तक की क्षमता वाले सिस्टम की मांग की गई है।

हालांकि, यह प्रक्रिया अभी टेंडर स्तर पर है और कोई फाइनल समझौता नहीं हुआ है। लेजर वेपन सिस्टम का मुख्य उद्देश्य अरब सागर में ड्रोन और छोटे जहाजों से निपटना है।

लेजर हथियारों की तकनीकी विशेषताएँ

  1. तेज गर्मी: लेजर किरणें लक्ष्य को तेजी से गर्म करती हैं, जिससे तुरंत नुकसान होता है।
  2. सुरक्षा और लचीलापन: इन हथियारों को जहाजों पर इंस्टॉल किया जा सकता है और मोबाइल लॉन्चिंग के जरिए कहीं से भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
  3. कम लागत पर प्रभावी: छोटे ड्रोन हमलों को रोकने के लिए बेहद प्रभावी।
  4. सेंसर और रडार: ये सिस्टम सेंसर और रडार तकनीक से लैस हैं, जो दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाने में मदद करती है।
  5. दूरस्थ नियंत्रण: इन्हें दूर से नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे ऑपरेटर को खतरे से बचाया जा सकता है।

भारत के लिए सुरक्षा चुनौती

अगर पाकिस्तान को यह आधुनिक लेजर सिस्टम मिल जाता है, तो उसकी नौसेना की ताकत में इजाफा होगा। इससे अरब सागर में सैन्य संतुलन प्रभावित हो सकता है।

इसके अलावा, पाकिस्तान और तुर्की के बीच रक्षा संबंध मजबूत होंगे, जो क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकते हैं। भारत के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि पहले से ही भारत-पाक सीमा और समुद्री विवादों में तनाव जारी है।

इस स्थिति में भारत को अपनी नौसेना और एंटी-ड्रोन क्षमताओं को मजबूत करना होगा। इससे सुनिश्चित होगा कि किसी भी संभावित खतरे का सामना प्रभावी तरीके से किया जा सके।

अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य और महत्व

दुनिया भर में आधुनिक लेजर हथियार तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। अमेरिका, यूरोप और चीन जैसी शक्तियाँ ड्रोन और मिसाइल हमलों से निपटने के लिए डायरेक्टेड एनर्जी वेपन विकसित कर रही हैं।

पाकिस्तान का यह कदम भी इसी वैश्विक रुझान का हिस्सा है। EOS और ROKETSAN जैसी कंपनियों द्वारा बनाए गए सिस्टम सस्ते, तेज और छिपने में सक्षम हैं। यह हथियार सिर्फ दुश्मन को नष्ट नहीं करते, बल्कि उनकी रणनीति को भी प्रभावित करते हैं।

भविष्य की संभावनाएँ

हालांकि अभी डील फाइनल नहीं हुई है, लेकिन अगर यह पूरी होती है, तो पाकिस्तान की नौसेना का आधुनिकीकरण तेज़ी से बढ़ सकता है। यह क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और रणनीति में बदलाव ला सकता है।

भारत और अन्य पड़ोसी देशों को इस नई तकनीक पर नजर रखनी होगी और अपनी तैयारियों को मजबूत करना होगा। आने वाले वर्षों में लेजर और डायरेक्टेड एनर्जी वेपन नौसैनिक युद्ध और क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

निष्कर्ष

पाकिस्तान का यह कदम न सिर्फ उसकी नौसेना की शक्ति बढ़ाने के उद्देश्य से है, बल्कि यह क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। अगर यह डील फाइनल होती है, तो आधुनिक लेजर हथियारों के माध्यम से पाकिस्तान अरब सागर में ड्रोन और छोटे जहाजों से निपटने में अधिक सक्षम होगा।

भारत और क्षेत्रीय शक्तियों के लिए यह चुनौती बढ़ सकती है, जिससे रणनीतिक संतुलन और सुरक्षा नीतियों में बदलाव की आवश्यकता होगी।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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