JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर झारखंड में छात्र आंदोलन तेज, CJP ने दिया समर्थन
भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र, रांची में जारी है अनिश्चितकालीन सत्याग्रह
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में चल रहा छात्र आंदोलन अब प्रदेश की सियासत का केंद्र बनता जा रहा है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के विरोध में हजारों अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) से कराई जाए।
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले करीब एक सप्ताह से छात्र अनिश्चितकालीन सत्याग्रह पर बैठे हैं। आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए उनकी मांगों को जायज बताया है।
CJP ने छात्रों के समर्थन का किया ऐलान
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि उन्होंने झारखंड में आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों से बातचीत की है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस संघर्ष में पूरी तरह छात्रों के साथ खड़ी है और उनकी जायज मांगों का समर्थन करती है।
CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से आंदोलनरत युवाओं के प्रति समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि उनका संगठन झारखंड के युवाओं के साथ मजबूती से खड़ा है।
एक सप्ताह से जारी है छात्रों का सत्याग्रह
JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतर आए हैं। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कई स्तरों पर गड़बड़ियों की आशंका है।
आंदोलन के दौरान रविवार को छात्रों ने हाथों में जलती मशालें लेकर एक विशाल मार्च भी निकाला। इस मार्च के माध्यम से अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया और सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग की।
छात्रों का कहना है कि जब तक पूरे मामले की CBI जांच को लेकर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
14वीं सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम को लेकर विवाद
पूरे विवाद की शुरुआत JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा के प्रारंभिक परिणाम को लेकर हुई। आंदोलन कर रहे छात्रों का आरोप है कि प्रारंभिक परीक्षा के कटऑफ और मेरिट सूची तैयार करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि मेरिट सूची पर जिम्मेदार अधिकारियों के हस्ताक्षर तक नहीं थे। इसके अलावा OMR शीट में भी हेरफेर की आशंका जताई गई है।
छात्रों ने परीक्षा आयोजन का ठेका लेने वाली लखनऊ की TDPL कंपनी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जिस कंपनी को परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी दी गई, उसे राज्य में कुछ समय पहले ही ब्लैकलिस्ट किया गया था।
CID जांच से संतुष्ट नहीं छात्र
मामले की जांच फिलहाल राज्य सरकार के निर्देश पर CID द्वारा की जा रही है, लेकिन आंदोलनरत छात्र इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि इस मामले में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच जरूरी है।
छात्रों का तर्क है कि पूर्व में भी कई मामलों में जांच हुई, लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। इसलिए वे ऐसी जांच चाहते हैं जिससे पूरी प्रक्रिया पर विश्वास कायम हो सके।
आंदोलन में शामिल युवाओं का कहना है कि वे किसी तरह की विशेष सुविधा नहीं चाहते, बल्कि अपनी मेहनत के आधार पर निष्पक्ष अवसर की मांग कर रहे हैं।
OMR शीट में बदलाव की भी मांग
छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में सुधार को लेकर भी कई मांगें रखी हैं। इनमें OMR शीट में पांचवें विकल्प ‘Not Attempted’ (प्रश्न हल नहीं किया) को शामिल करने की मांग प्रमुख है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि इस विकल्प को शामिल करने से भविष्य में OMR शीट से छेड़छाड़ और गलतियों की संभावना कम हो सकती है तथा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी।
आंदोलन के बीच तेज हुई राजनीतिक हलचल
छात्र आंदोलन के बीच झारखंड की राजनीति भी गरमा गई है। मुख्यमंत्री आवास पर INDIA गठबंधन के विधायकों की बैठक हुई। बैठक के बाद विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि सभी विधायक एकजुट हैं और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व पर विश्वास जताया है।
वहीं विपक्ष की ओर से भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने छात्रों का समर्थन किया है। उन्होंने सरकार से इस मामले की CBI जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मामले में निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बना आंदोलन
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद अब केवल एक भर्ती परीक्षा का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह युवाओं के रोजगार और भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है। आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है।
रांची में जारी यह आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। अब सभी की नजरें राज्य सरकार के अगले कदम और छात्रों की मांगों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
