न्यायालय के आदेश के बावजूद सीमांकन नहीं होने का मामला अशोकनगर में सामने आया है। ईसागढ़ निवासी सुशीलाबाई ने कलेक्टर जनसुनवाई में भूमि पर अवैध कब्जे, धमकी और राजस्व अधिकारियों की लापरवाही की शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की मांग की। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
न्यायालय के आदेश के बावजूद सीमांकन नहीं: अशोकनगर में बेसहारा महिला ने लगाया अवैध कब्जे और धमकी का गंभीर आरोप
राहुल जैन, अशोकनगर प्रतिनिधि
न्यायालय के आदेश के बावजूद सीमांकन नहीं
अशोकनगर। जिले के ईसागढ़ क्षेत्र से भूमि विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां न्यायालय के आदेश के बावजूद सीमांकन नहीं होने का आरोप लगाते हुए एक बेसहारा महिला ने जिला कलेक्टर की जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई है। महिला ने आरोप लगाया है कि उसकी निजी भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर लिया गया है, जबकि न्यायालय के आदेश के बावजूद महीनों से सीमांकन नहीं कराया जा रहा। इतना ही नहीं, आरोपियों द्वारा उन्हें धमकाने और राजस्व अधिकारियों द्वारा लगातार कार्रवाई टालने की भी शिकायत की गई है।
क्या है पूरा मामला
ईसागढ़ निवासी सुशीलाबाई पत्नी स्वर्गीय राजाराम लोधी ने जिला मुख्यालय पर आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर को आवेदन देकर बताया कि उनके नाम दर्ज सर्वे नंबर 833/7/1, रकबा 0.161 हेक्टेयर की भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर लिया गया है।आवेदन के अनुसार विमलेशबाई पत्नी वृजभान सिंह लोधी, निवासी गहोरा द्वारा कथित रूप से रातों-रात उनकी भूमि पर बाउंड्रीवाल बनाकर कब्जा कर लिया गया तथा उसमें मक्का की फसल भी बो दी गई। अब दोबारा फसल लगाने और कब्जे को स्थायी रूप देने की तैयारी की जा रही है।
न्यायालय के आदेश के बावजूद सीमांकन नहीं होने का आरोप
पीड़िता का कहना है कि भूमि के सीमांकन को लेकर सक्षम न्यायालय पहले ही आदेश जारी कर चुका है, लेकिन न्यायालय के आदेश के बावजूद सीमांकन नहीं कराया जा रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि तहसीलदार और संबंधित पटवारी द्वारा लगातार नई-नई तारीखें देकर कार्रवाई को टाला जा रहा है। कई महीनों से वह राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन अभी तक न्यायालय के आदेश का पालन नहीं हुआ।
खेत में फसल होने का हवाला देकर लौटी सीमांकन टीम
सुशीलाबाई ने आवेदन में उल्लेख किया कि मई माह में सीमांकन के लिए राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी।हालांकि टीम ने खेत में फसल होने का हवाला देते हुए सीमांकन की कार्रवाई किए बिना ही वापस लौटना उचित समझा। इसके बाद से आज तक सीमांकन नहीं कराया गया, जबकि न्यायालय का आदेश पहले से प्रभावी है।पीड़िता का कहना है कि यदि समय रहते सीमांकन हो जाता तो विवाद और अधिक नहीं बढ़ता।
अवैध कब्जे का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि विवादित भूमि पर पहले बाउंड्री बनाई गई और उसके बाद उसमें खेती शुरू कर दी गई।अब दोबारा फसल बोने और बाउंड्री को और मजबूत करने की तैयारी की जा रही है, जिससे भविष्य में कब्जा हटाना और कठिन हो सकता है।पीड़िता का आरोप है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो उन्हें स्थायी रूप से उनकी भूमि से वंचित होना पड़ सकता है।
धमकी देने का भी लगाया आरोप
आवेदन में सुशीलाबाई ने आरोप लगाया है कि वृजभान सिंह लोधी उन्हें लगातार धमका रहे हैं।उनका कहना है कि आरोपी कथित रूप से यह कहते हैं कि उनका कब्जा कोई नहीं छुड़ा सकता तथा उनके उच्च अधिकारियों तक संपर्क हैं, इसलिए उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होगी।पीड़िता ने प्रशासन से इस पहलू की भी जांच कराने की मांग की है।
महीनों से दर-दर भटक रही बेसहारा महिला
सुशीलाबाई ने स्वयं को गरीब, बेसहारा और परिवार में अकेला बताते हुए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।उन्होंने कहा कि कई महीनों से लगातार राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली है। हर बार केवल आश्वासन दिया जाता है लेकिन जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
प्रशासन से क्या मांग की गई
पीड़िता ने कलेक्टर से मांग की है कि—
- दूसरी राजस्व टीम गठित की जाए।
- तीनों प्लॉटों का निष्पक्ष सीमांकन कराया जाए।
- न्यायालय के आदेश का तत्काल पालन कराया जाए।
- कथित अवैध कब्जा हटाकर उन्हें वैधानिक कब्जा दिलाया जाए।
- मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाए।
जिला प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
भूमि विवादों के मामलों में समय पर सीमांकन नहीं होने से अक्सर विवाद और गंभीर रूप ले लेते हैं।इस मामले में भी यदि न्यायालय का आदेश होने के बावजूद सीमांकन नहीं हुआ है, तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोप संबंधित पक्ष के हैं। प्रशासनिक जांच और राजस्व अभिलेखों के आधार पर ही अंतिम तथ्य स्पष्ट होंगे।
आगे क्या होगा
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला कलेक्टर जनसुनवाई में दिए गए इस आवेदन पर क्या कार्रवाई करते हैं।यदि नई राजस्व टीम गठित होती है और सीमांकन कराया जाता है तो लंबे समय से लंबित इस विवाद का समाधान संभव हो सकता है।वहीं यदि कार्रवाई में और देरी होती है तो मामला न्यायालय अथवा उच्च प्रशासनिक स्तर तक भी पहुंच सकता है।
निष्कर्ष
अशोकनगर जिले के ईसागढ़ क्षेत्र में सामने आया यह मामला एक बार फिर राजस्व विवादों के समयबद्ध निराकरण की आवश्यकता को सामने लाता है। पीड़िता का आरोप है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद सीमांकन नहीं कराया गया, जिससे कथित अवैध कब्जे का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं कि पीड़िता को न्याय कब तक मिल पाता है।
