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Lok Sabha स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने सौंपा अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, 118 सांसदों के हैं हस्ताक्षर

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Published On: 10 February 2026
No-Confidence Notice Against Lok Sabha Speaker Om Birla Submitted by Opposition with 118 MPs Signing
— No-Confidence Notice Against Lok Sabha Speaker Om Birla Submitted by Opposition with 118 MPs Signing

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Lok Sabha स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया, 118 सांसदों के हैं हस्ताक्षर

नई दिल्ली: भारत की संसद में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। Lok Sabha के स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) को छोड़कर सभी विपक्षी दलों के सांसदों ने यह नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपा। इस नोटिस पर कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस सांसद सुरेश कोडिकुन्निल, गौरव गोगोई और मोहम्मद जावेद ने महासचिव के पास यह नोटिस जमा किया। इस कदम को विपक्षी दलों की ओर से संसद में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और बहुमत की रक्षा के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

विपक्ष क्यों नाराज है?

विपक्ष के नाराज़ होने के कई कारण हैं, जिनमें सबसे प्रमुख हैं:

  1. राहुल गांधी को नहीं दिया गया बोलने का अवसर:
    विपक्ष का आरोप है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान धन्यवाद प्रस्ताव के वक्त कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई। संसद की कार्यवाही के दौरान यह कदम विपक्षी दलों के लिए अपमानजनक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।
  2. विपक्षी सांसदों का निलंबन:
    संसद ने 8 विपक्षी सांसदों को निलंबित किया, जिससे विपक्ष का मानना है कि लोकतांत्रिक बहस को रोकने की कोशिश की गई। यह कदम संसद की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।
  3. प्रधानमंत्री के पास विरोध प्रदर्शन:
    लोकसभा स्पीकर ने दावा किया कि प्रधानमंत्री के पास विरोध प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए उन्होंने उन्हें संसद में आने से मना किया। विपक्ष इस कदम को अव्यवस्थित और अनुचित मान रहा है।

इन सभी घटनाओं के कारण विपक्षी दलों ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की दिशा में कदम बढ़ाया। विपक्ष का तर्क है कि यह कदम लोकतंत्र और संसद के अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी है।

अविश्वास प्रस्ताव क्या है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 के अनुसार, लोकसभा के स्पीकर को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। इसके अंतर्गत सांसदों को निम्न प्रक्रिया का पालन करना होता है:

  1. नोटिस देना: कम से कम 50 सांसदों की सहमति से प्रस्ताव महासचिव को लिखित रूप में देना होगा।
  2. सदन में प्रस्तुत करना: महासचिव नोटिस प्राप्त होने के बाद इसे सदन में प्रस्तुत करेंगे।
  3. सदस्यों की उपस्थिति: नोटिस को सदन में लीव (सदन की अनुमति) मिलने के लिए कम से कम 50 सांसदों की उपस्थिति जरूरी है।
  4. बहस और मतदान: यदि आवश्यक सांसद उपस्थित रहते हैं, तो सदन में प्रस्ताव पर बहस और मतदान होगा। बहुमत के पक्ष में होने पर स्पीकर पद से हट सकते हैं।

नोटिस के बाद की प्रक्रिया

विपक्षी सांसदों ने मंगलवार को लोकसभा महासचिव को नोटिस सौंपा। अब यह प्रस्ताव 9 मार्च को सदन में प्रस्तुत किया जाएगा। इस दिन कम से कम 50 सांसदों की उपस्थिति आवश्यक होगी। यदि पर्याप्त सांसद मौजूद रहते हैं, तो प्रस्ताव पर बहस होगी और मतदान किया जाएगा। अन्यथा नोटिस खारिज कर दिया जाएगा।

विपक्ष का मानना है कि स्पीकर के खिलाफ यह कदम संसद के भीतर लोकतांत्रिक बहस और निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं सरकार इसे राजनीतिक खेल और अवरोध के रूप में देख रही है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

Lok Sabha स्पीकर का पद भारतीय लोकतंत्र में अत्यंत संवेदनशील होता है। स्पीकर का कार्य है कि वे सदन की कार्यवाही निष्पक्ष तरीके से संचालित करें। विपक्ष का आरोप है कि वर्तमान स्पीकर ने अपने पद का दुरुपयोग किया है और विपक्ष की आवाज़ दबाई गई।

  • स्पीकर ने विपक्ष को बोलने का अधिकार सीमित किया।
  • सांसदों के निलंबन और विरोध प्रदर्शन के दौरान कठोर कदम उठाए।
  • प्रधानमंत्री के नज़दीक विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए अनुचित कदम उठाए।

इन सभी कारणों से विपक्षी दलों ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया।

राजनीतिक विश्लेषण

विश्लेषकों का मानना है कि अविश्वास प्रस्ताव एक संवैधानिक उपाय है, लेकिन इसके सफल होने की संभावना राजनीति और सदन के बहुमत पर निर्भर करेगी। यदि प्रस्ताव पास होता है, तो यह भारतीय संसदीय इतिहास में महत्वपूर्ण घटना होगी।

विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और बहुमत की रक्षा के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि सरकार इसे राजनीतिक चाल और अवरोध के रूप में देख रही है। इस प्रस्ताव से राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है और संसद की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है।

आगे की संभावनाएँ
  • नोटिस प्रस्तुत होने के बाद सदन में बहस होगी।
  • कम से कम 50 सांसदों की उपस्थिति के आधार पर बहस और मतदान किया जाएगा।
  • यदि बहुमत विपक्ष के पक्ष में आता है, तो स्पीकर ओम बिरला को हटाया जा सकता है।
  • अगर पर्याप्त सांसद उपस्थित नहीं होते हैं, तो नोटिस खारिज कर दिया जाएगा।

इस घटना से राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष और बढ़ सकता है, और संसद में आगामी महीनों में इसके प्रभाव दिखाई दे सकते हैं।

निष्कर्ष

Lok Sabha स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष की गंभीर नाराजगी और संवैधानिक चिंताओं को दर्शाता है। आगामी मार्च में संसद में प्रस्ताव की बहस और मतदान से तय होगा कि इस राजनीतिक और संवैधानिक लड़ाई का क्या परिणाम होगा।

यह कदम भारतीय लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच संतुलन बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यदि अविश्वास प्रस्ताव पास होता है, तो यह स्पीकर पद की संवैधानिक जिम्मेदारियों और संसदीय प्रक्रिया की पुन: पुष्टि करेगा।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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