निवाली BEO मनोज मराठे निलंबित, चार दिन से चल रहा आदिवासी संगठनों का धरना समाप्त
रिपोर्टर : अर्जुन सोलंकी
BAAP, जयस और सर्व आदिवासी समाज ने कार्रवाई को बताया आंदोलन की जीत, चार दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे कार्यकर्ता
बड़वानी/निवाली। बड़वानी जिले के निवाली विकासखंड में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) मनोज मराठे के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई के बाद पिछले चार दिनों से आंदोलन कर रहे आदिवासी संगठनों में खुशी का माहौल है। भारतीय आजाद आदिवासी पार्टी (BAAP), जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) और सर्व आदिवासी समाज से जुड़े कार्यकर्ताओं ने कार्रवाई को अपने आंदोलन और आदिवासी एकता की जीत बताया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कलेक्टर कार्यालय के जनजातीय कार्य विभाग, जिला बड़वानी की ओर से मनोज मराठे के निलंबन का आदेश जारी किया गया। इसके बाद धरना स्थल पर मौजूद आंदोलनकारियों ने खुशी जताई और कहा कि लंबे समय से उठाई जा रही मांग पर आखिरकार कार्रवाई हुई है।
हालांकि आंदोलन के दौरान मनोज मराठे पर लगाए गए भ्रष्टाचार सहित अन्य आरोप जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के अधीन हैं। निलंबन को आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
चार दिनों से चल रहा था अनिश्चितकालीन धरना
निवाली में मनोज मराठे को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पिछले चार दिनों से अनिश्चितकालीन धरना दिया जा रहा था। आंदोलन में BAAP, जयस और सर्व आदिवासी समाज से जुड़े युवा एवं कार्यकर्ता शामिल थे।
आंदोलनकारियों का कहना था कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ गंभीर शिकायतें और आपराधिक प्रकरण से जुड़ी परिस्थितियां होने के बावजूद उन्हें जिम्मेदारी दिए जाने का विरोध किया जा रहा था। इसी को लेकर संगठनों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की थी।
धरना लगातार चार दिनों तक जारी रहने के बाद निलंबन का आदेश सामने आने पर आंदोलनकारियों ने इसे सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया।
अजय जाधव ने संभाला आंदोलन का नेतृत्व
आंदोलन का नेतृत्व भारतीय आजाद आदिवासी पार्टी (BAAP) के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अजय जाधव द्वारा किए जाने की जानकारी दी गई है। उनके साथ जय आदिवासी युवा शक्ति के कार्यकर्ता और सर्व आदिवासी समाज के युवा भी धरने में शामिल रहे।
आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांग प्रशासन के सामने रखी और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। कार्यकर्ताओं का कहना था कि जब तक प्रशासन की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।
निलंबन का आदेश सामने आने के बाद अजय जाधव और आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने इसे आदिवासी समाज की एकजुटता की जीत बताया।
पुराने आपराधिक प्रकरण का भी उल्लेख
उपलब्ध जानकारी के अनुसार मनोज मराठे से संबंधित एक पुराना आपराधिक प्रकरण थाना सेंधवा ग्रामीण में दर्ज होने का उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि प्रकरण क्रमांक 426/2024 में तत्कालीन प्रचलित कानून की धारा 306, 34 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
दिए गए विवरण के मुताबिक उन्हें 10 अगस्त 2024 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था और बाद में 16 नवंबर 2024 को संबंधित मामले का चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
इन्हीं परिस्थितियों के आधार पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम, 1966 के नियम-9 के तहत निलंबन की कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है।
निलंबन आदेश के बाद धरना स्थल पर खुशी

मनोज मराठे के निलंबन की जानकारी आंदोलनकारियों तक पहुंचते ही धरना स्थल पर माहौल बदल गया। पिछले चार दिनों से कार्रवाई की मांग को लेकर बैठे कार्यकर्ताओं ने निर्णय का स्वागत किया।
आंदोलन से जुड़े लोगों ने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति या संगठन की नहीं, बल्कि सामूहिक आवाज और आदिवासी समाज की एकजुटता की जीत है। कार्यकर्ताओं ने आंदोलन में शामिल लोगों का आभार भी जताया।
प्रशासनिक कार्रवाई के बाद आगे की प्रक्रिया पर नजर
निलंबन के बाद अब मामले में आगे होने वाली विभागीय और न्यायिक प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी। निलंबन एक प्रशासनिक कार्रवाई है और संबंधित आपराधिक प्रकरण का अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार होगा।
आदिवासी संगठनों का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए और अधिकारियों से जुड़े मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
आंदोलनकारियों ने बताया एकता की जीत
BAAP, जयस और सर्व आदिवासी समाज से जुड़े कार्यकर्ताओं ने कहा कि चार दिनों तक चले आंदोलन के दौरान समाज के लोगों ने एकजुट होकर अपनी मांग प्रशासन तक पहुंचाई। निलंबन आदेश जारी होने के बाद उन्होंने आंदोलन को सफल बताते हुए खुशी जाहिर की।
निवाली में हुई इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब संबंधित विभाग की आगे की कार्रवाई तथा मनोज मराठे से जुड़े प्रकरण की कानूनी प्रक्रिया पर लोगों की निगाह रहेगी।
