निगरी-सौजनी धाम मार्ग पर हल्की बारिश में ही सड़क दलदल में बदल जाती है। सिलवानी क्षेत्र के किसानों, ग्रामीणों और सौजनी धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पढ़ें संवाददाता वैभव जैन मस्ताना की ग्राउंड रिपोर्ट।
जरा सी बारिश में दलदल बना निगरी–सौजनी धाम मार्ग, विकास कार्यों की खुली पोल, ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश
सिलवानी | संवाददाता – वैभव जैन मस्ताना
निगरी–सौजनी धाम मार्ग की बदहाल स्थिति एक बार फिर ग्रामीण विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। सिलवानी तहसील के अंतर्गत आने वाला यह महत्वपूर्ण मार्ग हल्की सी बारिश होते ही दलदल में तब्दील हो जाता है। सड़क पर बने गड्ढे, जलभराव और कीचड़ के कारण किसानों, ग्रामीणों तथा प्रसिद्ध सौजनी धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से सड़क की हालत खराब है, लेकिन जिम्मेदार विभाग केवल खानापूर्ति कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर निगरी और सौजनी (Sojni) गांव सिलवानी तहसील, रायसेन जिले में स्थित हैं।
निगरी–सौजनी धाम मार्ग की हालत बनी बड़ी समस्या
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गांवों के विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन धरातल पर हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं। निगरी–सौजनी धाम मार्ग पर जगह-जगह बड़े गड्ढे बन चुके हैं। हल्की बारिश के बाद सड़क पर पानी भर जाता है और पूरी सड़क दलदल में बदल जाती है।सबसे अधिक परेशानी दोपहिया वाहन चालकों, स्कूली विद्यार्थियों और पैदल चलने वाले लोगों को उठानी पड़ रही है। कई बार लोग फिसलकर गिर जाते हैं और दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
बारिश में पुल और पुलिया बन जाते हैं मुसीबत
ग्रामीणों के अनुसार मार्ग पर बना मुख्य पुल सड़क के स्तर से नीचे है। हल्की बारिश में भी पानी पुल के ऊपर से बहने लगता है, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है।इसके अलावा मार्ग पर बनी छोटी-छोटी पुलियाओं पर भी पानी भर जाता है। परिणामस्वरूप सड़क कई घंटों तक बंद जैसी स्थिति में रहती है।
किसानों और श्रद्धालुओं की बढ़ी मुश्किलें
निगरी–सौजनी धाम मार्ग क्षेत्र के किसानों के लिए जीवनरेखा माना जाता है। इसी रास्ते से किसान अपनी कृषि उपज लेकर बाजार पहुंचते हैं।यही मार्ग प्रसिद्ध सौजनी धाम तक भी जाता है, जहां मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। बारिश के मौसम में श्रद्धालुओं को पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। कीचड़ और गड्ढों के कारण कई लोग गिरकर घायल भी हो चुके हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा असर
ग्रामीणों ने बताया कि यदि गांव में कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो जाए तो उसे इलाज के लिए सिलवानी लाना पड़ता है।लेकिन सड़क खराब होने के कारण एम्बुलेंस और अन्य वाहन समय पर नहीं पहुंच पाते। कई बार मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाने से गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ता है।
विकास के दावों पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ग्रामीण क्षेत्र में विकास के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं।ग्रामीणों का कहना है कि—
- सड़क निर्माण की गुणवत्ता बेहद खराब रही।
- जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं बनाई गई।
- पुल और पुलियाओं का निर्माण तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं हुआ।
- पीडब्ल्यूडी द्वारा केवल नाममात्र की मरम्मत कर दी जाती है, जो पहली बारिश में ही बह जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण हुआ होता तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती।
ग्रामीणों ने की स्थायी समाधान की मांग
क्षेत्रवासियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि निगरी–सौजनी धाम मार्ग का स्थायी रूप से पुनर्निर्माण कराया जाए।ग्रामीणों ने मांग की है कि—
- सड़क का चौड़ीकरण एवं पुनर्निर्माण कराया जाए।
- पुल एवं पुलियाओं की ऊंचाई बढ़ाई जाए।
- जल निकासी की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
- निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस सड़क का सुधार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।
प्रशासन से उम्मीद
ग्रामीणों, किसानों और श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि शासन और प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र कार्रवाई करे तो हजारों लोगों को राहत मिल सकती है। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि जिम्मेदार विभाग जल्द ही निगरी–सौजनी धाम मार्ग की बदहाल स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाएगा।
