कोटा-इटावा के बीच 404 किमी लंबा अटल प्रोग्रेस-वे, किसानों को दो गुना मुआवजा
भोपाल। कोटा से इटावा के बीच 404 किलोमीटर लंबा अटल प्रोग्रेस-वे बनाने की योजना को नई गति मिल गई है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने मध्यप्रदेश के मुरैना, श्योपुर और भिंड जिलों में पहले से चिन्हित जमीनों का दोबारा सत्यापन शुरू कर दिया है। यह प्रक्रिया किसानों के हित में की जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की गलती या विवाद की स्थिति से बचा जा सके।
यह प्रोजेक्ट, जिसे भारत की प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है, पुराने रूट अलाइनमेंट पर ही बनाया जाएगा। इस निर्णय के पीछे कारण यह है कि नए रूट अलाइनमेंट पर विवाद और किसानों के विरोध के चलते कार्य लंबित रहा।
जमीन सत्यापन और मुआवजा
इस प्रोजेक्ट में शामिल 90 गांवों की जमीनों का पहले से अधिग्रहण किया जा चुका था। अब इसे दोबारा सत्यापित किया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस दौरान किसान अपनी जमीन कहीं और तो नहीं बेच चुके हैं। सत्यापन के बाद किसानों के नाम, उनके गांव और रकबे का विवरण प्रकाशित किया जाएगा।
सत्यापन और दावा-आपत्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसानों के बैंक खातों में मुआवजा ट्रांसफर किया जाएगा। मुआवजा राशि दो गुना होगी, ताकि किसानों को उनकी जमीन के वास्तविक मूल्य का उचित लाभ मिले। यह कदम किसानों के हित में उठाया गया है, जो पिछले वर्षों में कई बार आंदोलन कर अपनी जमीन के लिए न्याय की मांग करते रहे हैं।
रूट अलाइनमेंट और शामिल जिले
अटल प्रोग्रेस-वे का पुराना रूट अलाइनमेंट कुल 90 गांवों से होकर गुजरेगा। इसमें शामिल हैं:
- सबलगढ़ के 11 गांव
- जौरा के 29 गांव
- मुरैना के 15 गांव
- अंबाह के 10 गांव
- पोरसा के 25 गांव
इसके अतिरिक्त श्योपुर के 48 और भिंड के 23 गांव भी सत्यापन की प्रक्रिया में शामिल हैं।
नया रूट अलाइनमेंट क्यों रोका गया
यह प्रोजेक्ट छह साल पहले, 2020 में सर्वे और योजना के चरण में था। उस समय किसानों की जमीनों की सूची तैयार की गई थी और अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई थी। लेकिन केंद्र सरकार ने अटल प्रोग्रेस-वे का रूट बदल दिया।
नए रूट अलाइनमेंट के बाद किसानों में असंतोष उत्पन्न हुआ, क्योंकि इसमें उनकी जमीनें ज्यादा प्रभावित हो रही थीं। विशेष रूप से सबलगढ़ से पोरसा के बीच किसानों ने विरोध किया। विरोध और असंतोष बढ़ने के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अप्रैल 2023 में भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई को रोक दिया।
किसानों के अधिकार और मुआवजे का महत्व
किसानों के लिए यह मुआवजा सिर्फ आर्थिक लाभ नहीं है, बल्कि यह उनके अधिकारों की सुरक्षा और न्याय का प्रतीक भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं में किसानों के हितों की अनदेखी होती है। NHAI का यह कदम किसानों के प्रति संवेदनशीलता और पारदर्शिता को दर्शाता है।
किसानों के लिए दो गुना मुआवजा यह सुनिश्चित करेगा कि उन्हें उनकी जमीन का उचित मूल्य मिले। यह राशि केवल बाजार मूल्य पर आधारित नहीं होगी, बल्कि परियोजना के लिए किए जाने वाले अधिग्रहण में मूल्यवर्धन भी शामिल होगा।
अवसंरचना और आर्थिक महत्व
अटल प्रोग्रेस-वे देश के आर्थिक और औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह परियोजना:
- कोटा और इटावा के बीच यातायात सुविधा बढ़ाएगी
- माल और सेवाओं के परिवहन को तेज और सुलभ बनाएगी
- स्थानीय रोजगार के अवसर उत्पन्न करेगी
- आसपास के जिलों में व्यापार और उद्योग के लिए नई संभावनाएं खोलेगी
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग के बनने से न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे उत्तर भारत में लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी और समय की बचत होगी।
किसानों की प्रतिक्रिया
किसानों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। मुरैना जिले के किसान रमेश कुमार ने कहा, “हमने वर्षों से अपनी जमीन को लेकर अनिश्चितता का सामना किया। अब जब मुआवजा दो गुना मिलने वाला है और प्रक्रिया पारदर्शी है, तो हमें न्याय मिलने की उम्मीद है।”
जौरा के किसान सुरेश यादव ने कहा, “पिछली बार नया रूट अलाइनमेंट हमारे लिए परेशानी का कारण बन गया था। अब पुराने रूट पर ही निर्माण होगा और हमें उचित मुआवजा मिलेगा। यह संतोषजनक है।”
प्रशासनिक तैयारी
NHAI ने प्रोजेक्ट की पूरी योजना तैयार कर ली है। सत्यापन टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों की जमीन का बारीकी से निरीक्षण करें और किसी भी विवाद की स्थिति को तुरंत रिपोर्ट करें।
इसके अलावा, भूमि अधिग्रहण के बाद दावा-आपत्ति प्रक्रिया को सरल और तेज़ बनाने के लिए डिजिटलीकरण पर जोर दिया गया है। इससे किसानों को अपनी शिकायत दर्ज करने और समय पर मुआवजा प्राप्त करने में आसानी होगी।
संभावित चुनौतियाँ
हालांकि मुआवजा और पुराने रूट पर निर्माण का निर्णय सकारात्मक है, लेकिन परियोजना में कुछ चुनौतियां भी हैं:
- 404 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण समय पर पूरा करना
- रास्ते में आने वाले प्राकृतिक बाधाओं और पर्यावरणीय नियमों का पालन
- स्थानीय निवासियों और किसानों के बीच समन्वय बनाए रखना
- निर्माण सामग्री और मजदूरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन चुनौतियों को समय रहते हल नहीं किया गया, तो परियोजना में देरी हो सकती है और लागत बढ़ सकती है।
निष्कर्ष
कोटा-इटावा के बीच 404 किमी लंबा अटल प्रोग्रेस-वे केवल एक सड़क नहीं बल्कि विकास और न्याय का प्रतीक बनकर उभर रहा है। पुराने रूट अलाइनमेंट पर निर्माण और किसानों को दो गुना मुआवजा देने का निर्णय यह दर्शाता है कि सरकार और NHAI किसानों के हितों के प्रति संवेदनशील हैं।
इस परियोजना से न केवल यातायात और लॉजिस्टिक्स में सुधार होगा, बल्कि किसानों और स्थानीय समुदायों में विश्वास और संतोष भी बढ़ेगा। जब यह सड़क पूरी होगी, तो यह मध्यप्रदेश के लिए आर्थिक और सामाजिक विकास का एक नया अध्याय खोलेगी।
