MP : भोपाल में आयोजित तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश में ऐसे नए रोजगारोन्मुखी कोर्स तैयार किए जाएं, जिनका सीधा लाभ युवाओं को नौकरी के रूप में मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण केवल औपचारिकता न रहे, बल्कि उसका परिणाम तत्काल रोजगार के अवसरों में दिखाई दे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश को स्किल कैपिटल बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और मध्यप्रदेश इस मिशन में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की युवा आबादी को देखते हुए कौशल विकास योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाना समय की आवश्यकता है।
पीएम कौशल विकास योजना में मध्यप्रदेश देश में अव्वल
बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत नामांकन के मामले में मध्यप्रदेश देश में शीर्ष पर है। प्रदेश में अब तक 11,400 से अधिक प्रशिक्षणार्थियों का नामांकन किया जा चुका है, जो अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक है।
इसके साथ ही युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों के तहत लाखों युवाओं को लाभान्वित किया गया है, जिससे प्रदेश में कौशल विकास की गति और मजबूत हुई है।
आईटीआई ग्रेडिंग में MP का शानदार प्रदर्शन
बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर जारी आईटीआई ग्रेडिंग में मध्यप्रदेश ने 5वां स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश की 47 शासकीय आईटीआई को 10 में से 9+ ग्रेडिंग स्कोर मिला है, जो प्रशिक्षण की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं में सुधार का संकेत है।
प्रदेश में कुल 290 शासकीय और 644 निजी आईटीआई संचालित हैं। शासकीय आईटीआई में सीटों की संख्या बढ़ाकर 52,248 कर दी गई है, जबकि निजी आईटीआई में 61,032 सीटें उपलब्ध हैं। यह विस्तार युवाओं को अधिक अवसर प्रदान करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
युवाओं को स्व-रोजगार और प्रशिक्षण से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना की समीक्षा करते हुए इसके दायरे को और बढ़ाने के निर्देश दिए।
बैठक में जानकारी दी गई कि अब तक लगभग 1.32 लाख युवाओं को स्व-रोजगार का लाभ दिया जा चुका है, जबकि बड़ी संख्या में युवा विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जुड़े हुए हैं। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को लगातार बढ़ाना है ताकि अधिक से अधिक युवा आत्मनिर्भर बन सकें।
कृषि, डेयरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की योजना
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि युवाओं को केवल शहरी रोजगार तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें कृषि, डेयरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि कृषि वर्ष 2026 में रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी जाएगी।
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से डेयरी क्षेत्र में प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसर तैयार किए जाएंगे, जिससे ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिल सके।
ग्लोबल स्किल पार्क से बढ़ रहा प्रशिक्षण का दायरा
भोपाल स्थित संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क में इस वर्ष 3,000 से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। यहां लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म दोनों प्रकार के कोर्स संचालित किए जा रहे हैं।
युवाओं को रिलायंस, जिंदल, ट्राइडेंट और जेबीएम जैसे बड़े औद्योगिक समूहों के साथ प्रशिक्षण से जोड़कर उन्हें उद्योग आधारित कौशल प्रदान किया जा रहा है, जिससे रोजगार की संभावनाएं सीधे बढ़ रही हैं।
पीएम सेतु योजना से आईटीआई का उन्नयन
बैठक में यह भी बताया गया कि पीएम सेतु योजना के तहत मध्यप्रदेश में 20 हब और 81 स्पोक आईटीआई का उन्नयन किया गया है। इससे तकनीकी शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ है और प्रशिक्षण की गुणवत्ता को नया आयाम मिला है।
इसके अलावा इंडिया स्किल्स प्रतियोगिता 2025-26 में मध्यप्रदेश के छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य का नाम रोशन किया है।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश सरकार का फोकस अब स्पष्ट रूप से रोजगार आधारित शिक्षा और कौशल विकास पर केंद्रित है। नए कोर्स डिजाइन, आईटीआई सुधार, उद्योगों से जुड़ा प्रशिक्षण और स्व-रोजगार योजनाएं मिलकर प्रदेश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
यह पहल न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाएगी, बल्कि मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख स्किल डेवलपमेंट हब के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगी।
