वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत बना मजबूत वृद्धि का केंद्र: पीएम मोदी
Budget 2026: PM ने कहा कि आज दुनिया के कई देश आर्थिक अस्थिरता, महंगाई, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं और भू-राजनीतिक तनाव जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में भारत ने संतुलित नीतियों और दूरदर्शी नेतृत्व के माध्यम से स्थिरता बनाए रखी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत केवल चुनौतियों से निपट ही नहीं रहा, बल्कि उन्हें अवसर में बदलने की क्षमता भी रखता है।
उनके अनुसार, महामारी के बाद की दुनिया नए आर्थिक समीकरण बना रही है। कई देश अब अपने व्यापारिक साझेदारों को विविधतापूर्ण बनाना चाहते हैं और विश्वसनीय, स्थिर तथा तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की तलाश में हैं। भारत इस दृष्टि से एक स्वाभाविक और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है।
व्यापार और नवाचार में बढ़ती साझेदारियां
प्रधानमंत्री ने बताया कि कई देश भारत के साथ व्यापार, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में साझेदारी के इच्छुक हैं। भारत की युवा और कुशल आबादी, मजबूत डिजिटल ढांचा और तेजी से विकसित होता स्टार्टअप इकोसिस्टम इसे वैश्विक निवेश के लिए आकर्षक बनाता है। उन्होंने कहा कि भारत आज केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि नवाचार और उत्पादन का केंद्र भी बन रहा है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, सरकार की प्राथमिकता मजबूत आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ महंगाई को नियंत्रित रखना है। उनका मानना है कि संतुलित आर्थिक प्रबंधन ही दीर्घकालिक विकास का आधार है। उन्होंने कहा कि भारत कम महंगाई और उच्च वृद्धि के संतुलन को बनाए रखने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रहा है।
Budget : अगले स्तर की यात्रा
Budget को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल एक वार्षिक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की विकास यात्रा के अगले चरण का प्रतिनिधित्व करता है। उनके शब्दों में, यह बजट गति बढ़ाने, नई संभावनाओं को आगे बढ़ाने और युवाओं को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करने का माध्यम है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की नीतियां केवल तात्कालिक लाभ पर केंद्रित नहीं हैं, बल्कि दीर्घकालिक दृष्टि से तैयार की गई हैं। आने वाले वर्षों में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई जा रही हैं। यह Budget उसी व्यापक सोच का हिस्सा है, जो अगले पच्चीस वर्षों की दिशा तय करने वाला है।
विकसित भारत का संकल्प
PM ने विकसित भारत के लक्ष्य को केवल एक सरकारी एजेंडा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प बताया। उन्होंने कहा कि जो भावना पहले केवल सरकार तक सीमित थी, वह अब पूरे समाज का संकल्प बन चुकी है। देश के नागरिकों में आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है।
उनके अनुसार, यह अवसर किसी मजबूरी से पैदा नहीं हुआ है, बल्कि यह वर्षों की तैयारी, सुधारों और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आज भारत उस मुकाम पर है जहां वह आत्मविश्वास से कह सकता है कि वह वैश्विक मंच पर बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
2014 से अब तक की उपलब्धियों का विस्तार
प्रधानमंत्री ने 2014 के बाद हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने बुनियादी ढांचे, डिजिटल परिवर्तन, वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इन सुधारों ने अर्थव्यवस्था की नींव को मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान बजट 2014 से मिली उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए अगले चरण की रणनीति प्रस्तुत करता है। यह केवल वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
उत्पादक खर्च पर जोर
खर्च और विकास के संबंध में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार की पहचान उत्पादक खर्च से रही है। उन्होंने कहा कि ढांचे और पूंजी निवेश पर किया गया खर्च दीर्घकालिक लाभ देता है। यह न केवल रोजगार सृजित करता है, बल्कि उद्योगों को गति देता है और देश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी बढ़ाता है।
PM के अनुसार, अल्पकालिक लोकलुभावन उपायों के बजाय बुनियादी ढांचे में निवेश करना अधिक प्रभावी रणनीति है। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए आधुनिक और सशक्त बुनियादी ढांचे का निर्माण आवश्यक है।
कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष फोकस
प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार हवाई अड्डों, सड़कों, रेल मार्गों और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। उनका मानना है कि मजबूत कनेक्टिविटी ही आर्थिक गतिविधियों को गति देती है और क्षेत्रीय संतुलित विकास सुनिश्चित करती है।
उन्होंने कहा कि पुराने ढांचे के सहारे तेजी से आगे बढ़ते भारत की जरूरतें पूरी नहीं की जा सकतीं। इसलिए आधुनिक, टिकाऊ और तकनीक-सक्षम इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण सरकार की प्राथमिकता है। इससे न केवल व्यापार सुगम होगा, बल्कि पर्यटन, उद्योग और सेवा क्षेत्र को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा।
राष्ट्रीय आत्मविश्वास और वैश्विक भूमिका
PM ने कहा कि भारत ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी क्षमता का परिचय दिया है। देश ने महामारी, वैश्विक आर्थिक दबाव और अन्य चुनौतियों के बावजूद विकास की गति बनाए रखी है। यह राष्ट्रीय चरित्र और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक विकास का एक उज्ज्वल केंद्र बन चुका है। आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक व्यापार, तकनीक और नवाचार में और बड़ी भूमिका निभाएगा।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट है—वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत अवसरों से भरे दौर में प्रवेश कर चुका है। मजबूत नीतियां, युवा शक्ति, उत्पादक निवेश और दीर्घकालिक दृष्टि देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए तैयार हैं। बजट इस व्यापक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो न केवल वर्तमान जरूरतों को संबोधित करता है, बल्कि आने वाले पच्चीस वर्षों की दिशा भी तय करता है।
भारत आज आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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