सिरदर्द, चक्कर या झनझनाहट को बार-बार न टालें: न्यूरो समस्या की पहचान और जांच कैसे होती है?
दैनिक स्वराज वाणी | स्वास्थ्य डेस्क
सिरदर्द, चक्कर आना, हाथ-पैर में झनझनाहट, कमजोरी, बार-बार बेहोशी, याददाश्त में बदलाव या चलने में परेशानी जैसे लक्षण कई कारणों से हो सकते हैं। कभी ये अस्थायी होते हैं, तो कभी मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी या नसों से जुड़ी समस्या का संकेत देते हैं। इसलिए लक्षण लगातार बने रहें, बार-बार लौटें या बढ़ते जाएं तो उन्हें सामान्य मानकर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। केवल लक्षण देखकर किसी एक न्यूरो बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
लगातार सिरदर्द के साथ रोजमर्रा के काम में परेशानी, बिना स्पष्ट कारण बार-बार चक्कर या बेहोशी, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी और हाथ-पैर में बनी रहने वाली झनझनाहट की जांच करानी चाहिए। चलते समय संतुलन बिगड़ना, चीजें पकड़ने में कठिनाई या याददाश्त और व्यवहार में बदलाव भी डॉक्टर को बताने योग्य बातें हैं।
इन लक्षणों का मतलब हर बार गंभीर बीमारी नहीं होता। उदाहरण के लिए, झनझनाहट के कारण और अचानक हुई एक तरफ की कमजोरी के कारण अलग हो सकते हैं। चिकित्सक के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होता है कि परेशानी कब शुरू हुई, अचानक आई या धीरे-धीरे बढ़ी, कितनी देर रहती है और उसके साथ दूसरे कौन-से लक्षण हैं।
स्ट्रोक के संकेत दिखें तो तुरंत इमरजेंसी जाएं
चेहरे का एक हिस्सा अचानक टेढ़ा दिखना, एक हाथ या पैर में अचानक कमजोरी अथवा सुन्नपन और बोलने या कही गई बात समझने में कठिनाई स्ट्रोक के चेतावनी संकेत हो सकते हैं। अचानक संतुलन बिगड़ना, देखने में दिक्कत या असामान्य रूप से तेज सिरदर्द होने पर भी तत्काल चिकित्सा सहायता लें। लक्षण शुरू होने का समय याद रखें और व्यक्ति को तुरंत नजदीकी अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचाएं। ऐसे लक्षण कुछ देर में ठीक हो जाएं, तब भी चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
न्यूरो समस्या की पुष्टि कैसे होती है?
जांच की शुरुआत मरीज से विस्तार से बातचीत और शारीरिक परीक्षण से होती है। डॉक्टर लक्षणों का क्रम, पहले से मौजूद बीमारियां, ली जा रही दवाएं और परिवार से जुड़ी जरूरी जानकारी पूछ सकते हैं। इसके बाद वे ताकत, संवेदना, संतुलन और शरीर की अन्य प्रतिक्रियाओं की जांच करते हैं। इस परीक्षण से यह तय करने में मदद मिलती है कि आगे कौन-सी जांच आवश्यक है।
जरूरत के अनुसार रक्त जांच, सीटी स्कैन, एमआरआई या अन्य परीक्षण कराए जा सकते हैं। स्ट्रोक का संदेह होने पर अस्पताल में मस्तिष्क की इमेजिंग और रक्त जांच की जाती है। वहीं हाथ-पैर में झनझनाहट जैसी शिकायत में डॉक्टर मधुमेह या नसों से जुड़े अन्य संभावित कारणों की जांच कर सकते हैं। हर मरीज को हर जांच की आवश्यकता नहीं होती; परीक्षण का चुनाव लक्षणों और चिकित्सकीय परीक्षण के आधार पर होता है।
स्वयं दवा लेने से क्यों बचें?
बार-बार होने वाले सिरदर्द या चक्कर में केवल दवा लेकर लक्षण दबाने से उसका कारण पता नहीं चलता। किसी दूसरे व्यक्ति की दवा लेना या पहले लिखी गई दवा को बिना सलाह दोबारा शुरू करना भी उचित नहीं है। खासकर अचानक आए न्यूरो लक्षणों में घर पर उपचार आजमाने के दौरान समय गंवाना खतरनाक हो सकता है। बेहतर है कि डॉक्टर को लक्षणों की सही जानकारी दें और उनकी सलाह के अनुसार जांच तथा उपचार कराएं।
रोजमर्रा की आदतों पर भी दें ध्यान
पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और धूम्रपान से दूरी समग्र स्वास्थ्य के लिए उपयोगी आदतें हैं। रक्तचाप और मधुमेह होने पर उनकी नियमित निगरानी और निर्धारित उपचार का पालन विशेष रूप से जरूरी है, क्योंकि ये स्ट्रोक के जोखिम से जुड़े हैं। कंप्यूटर पर लंबे समय तक काम करते समय बीच-बीच में आराम लें। साथ ही याद रखें कि अच्छी जीवनशैली जरूरी है, लेकिन लगातार या अचानक शुरू हुए लक्षणों की चिकित्सकीय जांच का विकल्प नहीं है।
