Nepal बाढ़ अपडेट: 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लापता; दार्चुला में लैंडस्लाइड के बाद हाई अलर्ट
त्रिशूली में फंसे लोगों की तलाश जारी, तीन भारतीयों समेत कई लोगों का रेस्क्यू; भारत ने भेजी 95 टन राहत सामग्री
काठमांडू। Nepal में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात अब भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा ने बड़े पैमाने पर जनजीवन को प्रभावित किया है। नेपाल के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक 1,287 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि करीब 5,083 लोग अभी भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
इस बीच दार्चुला जिले में एक और बड़े भूस्खलन के बाद नदी का प्रवाह बाधित होने से निचले इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
दार्चुला में भूस्खलन के बाद बढ़ा खतरा
नेपाल के दार्चुला जिले के अपीहिमाल क्षेत्र में शुक्रवार को हुए बड़े भूस्खलन के बाद नदी का प्रवाह प्रभावित हुआ है। पहाड़ का बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में गिरने से जलधारा बाधित होने की स्थिति बनी है।
नदी के प्रवाह में रुकावट के कारण निचले इलाकों में अचानक पानी बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं।
भूस्खलन के बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। नदी में पानी का दबाव बढ़ने की स्थिति में निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आने की आशंका को देखते हुए राहत एवं बचाव दल तैयार रखे गए हैं।
5 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता
नेपाल सरकार के 4 सितंबर के आधिकारिक अपडेट के अनुसार आपदा प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 13,093 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें 300 से अधिक विदेशी नागरिक शामिल हैं। इसके बावजूद करीब 5,083 लोग अभी भी लापता हैं। लापता लोगों में लगभग 600 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
प्रशासन का कहना है कि आंकड़ों का सत्यापन और खोज अभियान लगातार जारी है। ऐसे में मृतकों और लापता लोगों की संख्या में आगे बदलाव संभव है।
त्रिशूली में नौ दिन बाद दो लोगों को जिंदा निकाला
बाढ़ के बाद चल रहे बचाव अभियान के दौरान एक बड़ी सफलता भी मिली है। त्रिशूली-3A जलविद्युत परियोजना की सुरंग से नौ दिन बाद दो लोगों को जिंदा बाहर निकाला गया।
नेपाल सेना के नेतृत्व में चलाए गए अभियान में संजय शाह और कबीर महारजन को सुरंग से सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। इस रेस्क्यू से सुरंगों में अब भी फंसे लोगों के जीवित होने की उम्मीद बढ़ी है।
बचाव दल अब अन्य सुरंगों में भी फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। कई स्थानों पर भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और पानी भर जाने के कारण बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
तीन भारतीयों का भी किया गया रेस्क्यू
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए भारत सरकार भी लगातार नेपाल के अधिकारियों के संपर्क में है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है।
4 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार 275 भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं, जबकि 166 भारतीयों को बचाया जा चुका है। इसी दौरान त्रिशूली बाजार क्षेत्र से तीन भारतीय नागरिकों—अभिजीत सुरेश पवार, दीपिका अभिजीत पवार और उनके पांच वर्षीय बेटे समर्थ—को भी सुरक्षित निकाला गया।
भारतीय दूतावास और राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीयों की जानकारी जुटाने और उनके सुरक्षित निकासी के लिए नेपाली प्रशासन के साथ समन्वय कर रही हैं।
भारत ने नेपाल को भेजी राहत सामग्री
भारत ने नेपाल में जारी राहत एवं बचाव अभियान में सहायता के लिए बड़ी मात्रा में राहत सामग्री भेजी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत की ओर से अब तक करीब 95 टन राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई गई है।
इसके अलावा भारत ने बचाव अभियान में विशेषज्ञों की टीमें भी भेजी हैं। इनमें टनल रेस्क्यू, फॉरेंसिक और मेडिकल विशेषज्ञ शामिल हैं। नेपाल में सुरंगों के भीतर चल रहे जटिल बचाव अभियान में भारतीय विशेषज्ञ स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
आपदा की वजहों का अध्ययन कर रहे विशेषज्ञ
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में हुई इस भयावह आपदा के पीछे ग्लेशियर के टूटने और अचानक भारी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टानों और मलबे के नीचे की ओर आने को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
आपदा की वास्तविक परिस्थितियों और इसके पीछे प्राकृतिक तथा जलवायु संबंधी कारकों की भूमिका को समझने के लिए विशेषज्ञ अध्ययन कर रहे हैं। जलवायु वैज्ञानिकों, पर्वतीय विशेषज्ञों और ग्लेशियर विशेषज्ञों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों की परिस्थितियों का विश्लेषण कर रही हैं।
खराब मौसम बना राहत अभियान में बड़ी चुनौती
नेपाल में राहत और खोज अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में खराब मौसम, लगातार बारिश, बढ़ता नदी जलस्तर और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां शामिल हैं।
कई इलाकों में सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने से राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। वहीं मलबे से भरी सुरंगों में बचाव अभियान चलाना भी बेहद जोखिम भरा है।
इसके बावजूद नेपाल सेना, नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और आपदा प्रबंधन एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की टनल रेस्क्यू टीमें भी नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रही हैं।
हजारों लोगों तक पहुंचाई जा रही राहत
नेपाल सरकार ने प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था लागू की है। विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मिल रही सहायता को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
सरकार के सामने फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, फंसे हुए लोगों का रेस्क्यू, घायलों का उपचार और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना है।
आगे भी जारी रहेगा रेस्क्यू अभियान
नेपाल में आपदा के दसवें दिन भी राहत और बचाव अभियान जारी है। सुरंगों से दो लोगों के जिंदा निकलने के बाद बचाव दलों का उत्साह बढ़ा है और अन्य संभावित जीवित लोगों की तलाश तेज की गई है।
वहीं दार्चुला में नए भूस्खलन के बाद निचले इलाकों में पैदा हुए खतरे ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अधिकारी नदी के जलस्तर और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
फिलहाल नेपाल में हजारों लोगों के लापता होने के कारण यह अभियान आने वाले दिनों में भी जारी रहने की संभावना है। सरकार और अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियों के सामने चुनौती है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जाए और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाई जाए।
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