Nepal Flood Update: विनाशकारी बाढ़ के बाद बड़ी कामयाबी, सुरंग से दो लोग जिंदा बाहर निकले; 5,300 से ज्यादा अब भी लापता
Nepal Flood Update: नेपाल में भोटेकोशी नदी की विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। बाढ़ के कई दिन बीतने के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके हैं। बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि राहत एवं बचाव दल प्रभावित इलाकों में लगातार तलाश अभियान चला रहे हैं। इसी बीच त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना रेस्क्यू टीम के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 1,259 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 5,300 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। राहत और बचाव टीमों ने अब तक करीब 12,038 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। प्रभावित क्षेत्रों में सेना, सशस्त्र पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं।
सुरंग से दो लोगों को सुरक्षित निकाला गया
26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में कुछ लोगों के फंसे होने की जानकारी मिली थी। कई दिनों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शुक्रवार को बचाव दल को बड़ी सफलता मिली।
सुरंग के अंदर से दो लोगों को जिंदा बाहर निकाल लिया गया। उनकी पहचान मैकेनिकल फोरमैन संजय साह और मैकेनिकल सुपरवाइजर कबीर महार्जन के रूप में हुई है।
सबसे पहले संजय साह को सुरंग से सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने कबीर महार्जन को भी बाहर निकाल लिया। दोनों को आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई।
सुरंग के अंदर से सुनाई दी आवाज
रेस्क्यू अभियान के दौरान बचाव दल को सुरंग के भीतर से इंसानी आवाजें सुनाई दीं। आवाज सुनाई देने के बाद टीम ने अंदर मौजूद लोगों से संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया।
बचाव दल ने सुरंग के अंदर फंसे लोगों को भरोसा दिलाया कि वे घबराएं नहीं और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। अंदर से जवाब मिलने के बाद नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल ने ऑपरेशन को और तेज कर दिया।
कई घंटों की मशक्कत और सावधानी के बाद दोनों लोगों को सुरंग से सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिली। इस घटना ने लगातार चल रहे राहत अभियान के बीच उम्मीद भी बढ़ाई है कि अन्य लापता लोगों की तलाश में भी सफलता मिल सकती है।
21 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी राहत अभियान में तैनात
Nepal के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 21,402 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। इनमें नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल समेत सुरक्षा एजेंसियों के जवान शामिल हैं।
ये टीमें कई स्तरों पर काम कर रही हैं। एक तरफ लापता लोगों की तलाश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, राहत सामग्री बांटने और बरामद शवों के प्रबंधन का काम भी जारी है।
चितवन में सबसे ज्यादा शव बरामद
बाढ़ से प्रभावित कई इलाकों में शवों की तलाश का अभियान भी जारी है। चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब तक बरामद शवों में से 95 की पहचान की जा चुकी है।
प्रशासन के सामने चुनौती केवल लापता लोगों को खोजने की नहीं, बल्कि बरामद शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाने की भी है। इसके लिए संबंधित एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं।
भारत ने नेपाल के लिए भेजी राहत की नई खेप
मुश्किल की इस घड़ी में भारत लगातार नेपाल की मदद कर रहा है। गुरुवार रात भारत की ओर से राहत सामग्री की एक और खेप नेपाल पहुंचाई गई। दो C-130J विमानों के जरिए करीब 21.5 टन मानवीय सहायता काठमांडू भेजी गई।
इस राहत सामग्री में मेडिकल उपकरणों के साथ फोरेंसिक किट और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं। भारत की ओर से भेजी गई यह सहायता नेपाल में चल रहे राहत और बचाव अभियान को मजबूत करने के उद्देश्य से है।
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, राहत सामग्री नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंपी गई। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने कहा कि यह सहायता बाढ़ के बाद नेपाल के राहत और बचाव प्रयासों में भारत के निरंतर सहयोग का हिस्सा है।
26 अगस्त से भारत भेज रहा राहत सामग्री
बाढ़ के बाद भारत ने 26 अगस्त को नेपाल के लिए पहली राहत खेप भेजी थी। इसमें करीब 10 टन राहत सामग्री थी, जिसमें अस्थायी आश्रय सामग्री, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयां शामिल थीं।
इसके बाद 27 अगस्त को करीब 37.5 टन, फिर तीसरे विमान से 10 टन और 30 अगस्त को चौथे विमान से 11 टन राहत सामग्री भेजी गई। चौथी खेप में सर्च एंड रेस्क्यू उपकरणों के साथ DNA विश्लेषण में मदद के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी शामिल थी।
2 सितंबर को भारत ने पांचवां राहत विमान नेपाल भेजा, जिसमें 11 सदस्यीय बचाव दल, विशेष उपकरण और करीब 5.5 टन जरूरी दवाइयां शामिल थीं।
बाढ़ के कारणों की जांच में जुटे विशेषज्ञ
भोटेकोशी क्षेत्र में आई इस विनाशकारी बाढ़ के कारणों को समझने के लिए विशेषज्ञों की टीमें अध्ययन कर रही हैं। जलवायु वैज्ञानिक, पर्वतीय विशेषज्ञ और हिमनद विशेषज्ञ आपदा से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर रहे हैं।
विशेषज्ञ यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि अचानक आई बाढ़ के पीछे प्राकृतिक परिस्थितियों की कितनी भूमिका रही और जलवायु परिवर्तन का इस घटना पर कितना प्रभाव पड़ा।
Nepal सरकार ने राहत सामग्री के वितरण के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था भी लागू की है। वहीं, लोगों से मिलने वाली आर्थिक सहायता को प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में जमा कराने की व्यवस्था की गई है।
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। दो लोगों को सुरंग से सुरक्षित निकालने की सफलता के बाद बचाव दल अब अन्य लापता लोगों की तलाश में जुटा हुआ है।
