Nepal Flood Update: नेपाल में फिर बाढ़-भूस्खलन का खतरा, मृतकों की संख्या 1127 पहुंची; 4858 लोग लापता, भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद भी संकट बरकरार, बर्फ और चट्टानों के खिसकने से बढ़ी चिंता; प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान
काठमांडू। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के एक सप्ताह बाद भी हालात गंभीर बने हुए हैं। हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के खिसकने से आई आपदा ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। लगातार चल रहे खोज एवं बचाव अभियान के बीच मृतकों की संख्या बढ़कर 1127 तक पहुंच गई है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
नेपाल में बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। मलबे में दबे लोगों की तलाश के साथ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। इस बीच पहाड़ी क्षेत्रों में अस्थिर चट्टानों, भूस्खलन और नदियों के जलस्तर को लेकर चिंता बनी हुई है।
26 अगस्त की बाढ़ ने मचाई भारी तबाही
26 अगस्त को हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के खिसकने के बाद अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के भोटेकोशी नदी क्षेत्र सहित कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया था। तेज बहाव के साथ आए पानी, पत्थरों और मलबे ने रास्ते में आने वाले घरों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचों को भारी नुकसान पहुंचाया।
आपदा के बाद से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण राहत एजेंसियों का सबसे बड़ा फोकस उनकी तलाश पर बना हुआ है।
मृतकों का आंकड़ा 1127 तक पहुंचा
ताजा जानकारी के मुताबिक बाढ़ के बाद विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 1127 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। कई शव बाढ़ के मूल प्रभावित क्षेत्र से काफी दूर नदी के बहाव वाले इलाकों में मिले हैं।
लापता लोगों की तलाश भी लगातार जारी है। नेपाल पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में खोज अभियान चला रही हैं। मलबे और क्षतिग्रस्त संरचनाओं के कारण कई स्थानों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
हजारों लोग अब भी लापता
आपदा के बाद हजारों लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार 4858 लोगों की तलाश जारी है। बचाव दल नदी किनारे, मलबे से प्रभावित क्षेत्रों और क्षतिग्रस्त बस्तियों में खोज अभियान चला रहे हैं।
लापता लोगों में स्थानीय नागरिकों के साथ विदेशी नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। राहत एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम इलाकों तक पहुंचना और भारी मात्रा में जमा मलबे को हटाकर तलाश करना है।
हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया
बाढ़ प्रभावित इलाकों से हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। नेपाल पुलिस के अनुसार 6500 से अधिक लोगों को प्रभावित क्षेत्रों से बचाया जा चुका है।
राहत दल प्रभावित परिवारों को भोजन, पानी, दवाइयां और अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराने में जुटे हुए हैं। कई परिवारों के घर और आजीविका के साधन बाढ़ में तबाह हो गए हैं, जिससे अब पुनर्वास भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
भारत ने नेपाल की मदद के लिए बढ़ाया हाथ
नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद भारत ने राहत और बचाव कार्यों में सहयोग बढ़ाया है। भारत की ओर से राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता और विशेषज्ञ टीमों को नेपाल भेजा गया है।
भारतीय विशेषज्ञ टीमें नेपाल की एजेंसियों के साथ समन्वय करते हुए विशेष रूप से कठिन बचाव अभियानों में सहयोग कर रही हैं। इससे पहले भारत द्वारा कई चरणों में आपात राहत सामग्री भी नेपाल पहुंचाई जा चुकी है।
सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश बड़ी चुनौती
इस आपदा का गंभीर असर नेपाल की जलविद्युत परियोजनाओं पर भी पड़ा है। बाढ़ और मलबे के कारण कई परियोजनाओं के आसपास भारी नुकसान हुआ है। कुछ स्थानों पर सुरंगों में लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते विशेष बचाव अभियान चलाए गए हैं।
ऐसे अभियानों के लिए विशेषज्ञ टीमों और तकनीकी उपकरणों की मदद ली जा रही है। दुर्गम भूभाग और भारी मलबे के कारण बचाव कार्य बेहद कठिन बना हुआ है।
दोबारा बाढ़ और भूस्खलन को लेकर सतर्कता
हिमालयी क्षेत्र में अस्थिर चट्टानों, बर्फ के खिसकने और लगातार बदलती प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। नदी क्षेत्रों और ऊपरी इलाकों की लगातार निगरानी की जा रही है।
विशेषज्ञों के लिए हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर से जुड़ी घटनाएं और अचानक आने वाली बाढ़ चिंता का विषय बनी हुई हैं। ऐसे क्षेत्रों में किसी बड़े भूस्खलन या प्राकृतिक अवरोध के कारण नदी का प्रवाह प्रभावित होने पर नीचे बसे इलाकों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
राहत के साथ अब पुनर्वास की चुनौती
नेपाल में फिलहाल प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, घायलों के उपचार और प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने की है। इसके साथ ही तबाह हुई सड़कों, पुलों, घरों और अन्य बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण की चुनौती भी सामने है।
आपदा में बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए हैं। कई लोगों ने अपने परिजनों के साथ घर और रोजगार के साधन भी खो दिए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में राहत अभियान के साथ पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर भी तेजी से काम करना होगा।
नेपाल में स्थिति लगातार बदल रही है और मृतकों एवं लापता लोगों के आंकड़ों में खोज अभियान के साथ बदलाव हो सकता है।
