Nepal में तिब्बत से आई भीषण बाढ़ का कहर, रसुवा में भारी तबाही; कई लोग लापता
काठमांडू/रसुवा। Nepal के उत्तरी जिले रसुवा में बुधवार सुबह चीन के तिब्बत क्षेत्र की ओर से आई अचानक भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। भोटेकोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने के बाद टिमुरे, स्याब्रुबेसी और आसपास के इलाकों में घरों, बाजारों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। कई वाहन और सामान तेज बहाव में बह गए हैं।
टिमुरे और स्याब्रुबेसी में सबसे ज्यादा नुकसान
बाढ़ से टिमुरे बाजार का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है। स्थानीय लोगों के मुताबिक अचानक आए तेज बहाव के कारण लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कई मकान, दुकानें और अन्य संरचनाएं पानी और मलबे की चपेट में आ गईं।
स्याब्रुबेसी और आसपास के क्षेत्रों में भी बाढ़ ने व्यापक नुकसान पहुंचाया है। प्रशासन अभी नुकसान का विस्तृत आकलन कर रहा है और प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान जारी है।
9 सशस्त्र पुलिसकर्मी संपर्क से बाहर
बाढ़ के बाद टिमुरे में तैनात 9 सशस्त्र पुलिसकर्मी संपर्क से बाहर हो गए हैं। अधिकारियों के अनुसार इनमें एक इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। उनसे संपर्क स्थापित करने की कोशिश की जा रही है और उनकी तलाश जारी है।
बाद की रिपोर्टों में प्रभावित क्षेत्र की अलग-अलग पुलिस इकाइयों से जुड़े 28 पुलिसकर्मियों के लापता होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, अधिकारियों ने सभी आंकड़ों की अंतिम पुष्टि नहीं की है। इसलिए लापता लोगों की संख्या को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
करीब 1,000 लोगों के बहने की आशंका, आधिकारिक पुष्टि नहीं
कुछ स्थानीय रिपोर्टों में बाढ़ की भयावहता को देखते हुए करीब 1,000 लोगों के बहने की आशंका जताई गई है। हालांकि, इस संख्या की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार प्रभावित क्षेत्रों में खोज एवं बचाव अभियान चला रही हैं।
इसलिए फिलहाल संभावित जनहानि से जुड़े अपुष्ट आंकड़ों को सावधानी से देखा जा रहा है।
हेलिपैड बहा, रेस्क्यू ऑपरेशन में आई मुश्किल
बाढ़ की चपेट में स्थानीय हेलिपैड के आने से प्रभावित लोगों को निकालने के लिए भेजे गए हेलिकॉप्टर को भी लैंडिंग में परेशानी हुई। कई क्षेत्रों में पानी और मलबे के कारण सुरक्षित उतरने की जगह उपलब्ध नहीं थी।
नेपाल सेना के हेलिकॉप्टरों को राहत और बचाव अभियान में लगाया गया है। घायल लोगों को हेलिकॉप्टर के जरिए सुरक्षित स्थानों और अस्पतालों तक पहुंचाया जा रहा है।
बाढ़ की वजह अभी पूरी तरह साफ नहीं
बाढ़ की अचानक भयावहता को देखते हुए इसके सटीक कारण को लेकर अभी जांच जारी है। विशेषज्ञों और अधिकारियों ने ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) यानी हिमनद झील के अचानक फटने की संभावना पर भी विचार किया है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार बाढ़ के स्रोत की अभी आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है। नेपाल के संबंधित विभाग चीनी अधिकारियों के साथ समन्वय कर स्थिति और बाढ़ के संभावित स्रोत की जानकारी जुटा रहे हैं।
42 किलोमीटर सड़क को भारी नुकसान
बाढ़ ने नेपाल-चीन सीमा से जुड़ी महत्वपूर्ण सड़क कनेक्टिविटी को भी प्रभावित किया है। रिपोर्ट के अनुसार बेतरावती से रसुवागढ़ी सीमा तक करीब 42 किलोमीटर सड़क कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त या बह गई है। कई कंक्रीट पुल भी बाढ़ की चपेट में आए हैं।
इस मार्ग के प्रभावित होने से चीन के साथ नेपाल का महत्वपूर्ण व्यापारिक संपर्क भी प्रभावित हो सकता है।
हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी नुकसान
बाढ़ से रसुवा क्षेत्र की कई जलविद्युत परियोजनाओं और बिजली ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार कई पावर प्रोजेक्ट, सबस्टेशन और ट्रांसमिशन ढांचे प्रभावित हुए हैं।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बाढ़ से करीब 430 मेगावाट की जलविद्युत क्षमता प्रभावित हुई है। इससे संबंधित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पर भी असर पड़ा है।
कई जिलों में हाई अलर्ट
भोटेकोशी का पानी आगे त्रिशूली नदी में पहुंचने के कारण निचले इलाकों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन के नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर ऊंचे एवं सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
लोगों से नदी के किनारे जाने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है।
प्रधानमंत्री ने राहत-बचाव तेज करने के दिए निर्देश
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल, नेपाली सेना, स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां संयुक्त रूप से अभियान में जुटी हैं।
प्रभावित और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। राहत कार्यों के लिए हेलिकॉप्टर और मेडिकल टीमों को भी तैनात किया गया है।
पिछले साल भी आई थी विनाशकारी बाढ़
भोटेकोशी नदी क्षेत्र में पिछले वर्ष भी विनाशकारी बाढ़ आई थी, जिसने नेपाल-चीन सीमा की सड़क और पुलों सहित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया था। इस बार भी नदी के अचानक उफान ने स्थानीय प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
फिलहाल बचाव दल लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं और प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन किया जा रहा है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर भरोसा न करने और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की अपील की है।
स्थिति लगातार विकसित हो रही है और लापता लोगों तथा नुकसान से जुड़े आंकड़े आगे बदल सकते हैं।
