—Advertisement—

नेपाल में फिर बाढ़ का खतरा: नदियों का जलस्तर बढ़ा, 7 जिलों में नया अलर्ट; आपदा में मौतों का आंकड़ा 1000 पार होने की रिपोर्ट

Author Picture
Published On: 1 September 2026
jgjhg

—Advertisement—

नेपाल में फिर बाढ़ का खतरा: नदियों का जलस्तर बढ़ा, 7 जिलों में नया अलर्ट; आपदा में मौतों का आंकड़ा 1000 पार होने की रिपोर्ट

रसुवा से चितवन तक नदी किनारे बसे इलाकों में सतर्कता, खराब मौसम के कारण राहत और बचाव अभियान में आ रही मुश्किलें

काठमांडू, 1 सितंबर 2026। नेपाल में हालिया विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से हुई तबाही के बीच एक बार फिर कई इलाकों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सात जिलों में नदी किनारे बसे क्षेत्रों के लिए नया अलर्ट जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं, नवलपरासी और चितवन शामिल बताए जा रहे हैं।

हालिया आपदा से नेपाल अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाया है और कई क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान जारी है। इसी बीच नदियों में बढ़ता पानी प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को नदियों और भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों से दूर रहने तथा प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, हालिया बाढ़ और भूस्खलन में नेपाल में मृतकों की संख्या एक हजार के पार पहुंचने की बात कही जा रही है। वहीं बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हालांकि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में खोज अभियान जारी होने के कारण मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में बदलाव संभव है।

7 जिलों में फिर बाढ़ का अलर्ट

नेपाल के कई हिस्सों में मौसम एक बार फिर चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के बाद रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं, नवलपरासी और चितवन के संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बढ़ाई गई है।

विशेष रूप से नदी किनारे और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सावधान रहने के लिए कहा गया है। प्रशासन की प्राथमिकता ऐसे क्षेत्रों में किसी भी आपात स्थिति से पहले लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की है।

लगातार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ जाता है। नेपाल की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण तेज बारिश के दौरान नदियों का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ सकता है। इससे अचानक बाढ़ आने की आशंका रहती है।

26 अगस्त की आपदा ने मचाई भारी तबाही

जानकारी के मुताबिक, 26 अगस्त को तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियर से जुड़ी घटना के बाद नेपाल के कई हिस्सों में अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हुई थी। पानी के तेज बहाव और भूस्खलन ने कई क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचाया।

नदियों के किनारे बसे इलाकों में पानी तेजी से घुसने के कारण लोगों को संभलने का ज्यादा समय नहीं मिल पाया। कई जगह सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे प्रभावित होने की खबरें सामने आईं।

आपदा के बाद नेपाल में बड़े स्तर पर खोज एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंचने में राहत टीमों को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

मौतों का आंकड़ा 1000 पार होने की रिपोर्ट

हालिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या एक हजार के पार पहुंच चुकी है। तिब्बत क्षेत्र में भी लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के चितवन जिले में सबसे अधिक शव बरामद होने की बात कही गई है। यहां कथित तौर पर 321 शव मिलने की जानकारी दी गई है।

इसके अलावा 4,400 से अधिक लोगों के लापता होने की आशंका भी जताई गई है। हालांकि इतने बड़े पैमाने की प्राकृतिक आपदा में अलग-अलग क्षेत्रों से सूचनाएं धीरे-धीरे सामने आती हैं। इसलिए मृतकों और लापता लोगों की वास्तविक संख्या आधिकारिक पुष्टि और राहत एजेंसियों के अंतिम आंकड़ों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

चितवन में स्थिति गंभीर

चितवन को इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में से एक बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और कई इलाकों में बाढ़ का व्यापक असर देखने को मिला।

अब एक बार फिर चितवन को उन जिलों में शामिल किया गया है, जहां नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण सतर्कता बरती जा रही है। इससे राहत और बचाव अभियान में जुटी टीमों की चुनौती और बढ़ सकती है।

जिन इलाकों में पहले से मलबा और बाढ़ का पानी मौजूद है, वहां दोबारा तेज बारिश होने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है।

खराब मौसम राहत अभियान के लिए बड़ी चुनौती

नेपाल में राहत और खोज अभियान के सामने खराब मौसम सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बना हुआ है। लगातार बारिश के कारण कई पहाड़ी रास्तों पर आवाजाही मुश्किल हो रही है।

भूस्खलन से सड़कें बाधित होने पर राहत सामग्री पहुंचाने में भी परेशानी होती है। दूसरी ओर नदियों में तेज बहाव के कारण बचाव दलों को अतिरिक्त सावधानी के साथ अभियान चलाना पड़ रहा है।

मलबे में दबे या लापता लोगों की तलाश के लिए सुरक्षा एजेंसियां और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रहे हैं। लेकिन प्रतिकूल मौसम के कारण कई स्थानों तक पहुंचना आसान नहीं है।

सड़क और संचार व्यवस्था भी प्रभावित

बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं में सबसे बड़ी समस्याओं में सड़क तथा संचार व्यवस्था का प्रभावित होना शामिल है। कई दूरदराज के इलाकों में संपर्क टूटने के कारण वहां की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलने में समय लग सकता है।

ऐसे क्षेत्रों में राहत सामग्री, भोजन, साफ पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुएं पहुंचाना प्रशासन के लिए प्राथमिकता बनी हुई है।

इसके साथ ही जिन परिवारों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं या जिन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, उनके लिए अस्थायी राहत शिविरों की आवश्यकता भी बढ़ सकती है।

भारत समेत पड़ोसी देशों की भी स्थिति पर नजर

नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा पर पड़ोसी देशों की भी नजर बनी हुई है। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा और कई साझा नदी प्रणालियां होने के कारण नेपाल में अत्यधिक बारिश और नदियों के जलस्तर में बदलाव का असर सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

ऐसे में मौसम और नदी जलस्तर से संबंधित सूचनाओं की लगातार निगरानी महत्वपूर्ण है। नेपाल में आपदा के बाद राहत सामग्री पहुंचाने के प्रयासों की खबरें भी सामने आती रही हैं।

अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण

नेपाल के लिए आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। एक तरफ प्रशासन और राहत एजेंसियां हालिया बाढ़ तथा भूस्खलन से प्रभावित लोगों की तलाश और सहायता में जुटी हैं, वहीं दूसरी तरफ नदियों का दोबारा बढ़ता जलस्तर नई चिंता पैदा कर रहा है।

सात जिलों में जारी चेतावनी के बीच नदी किनारे रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती पहले से प्रभावित इलाकों में राहत अभियान जारी रखते हुए संभावित नई बाढ़ से लोगों को सुरक्षित रखना है।

फिलहाल मौसम की स्थिति, नदियों के जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत-बचाव अभियान पर लगातार नजर रखी जा रही है। मृतकों और लापता लोगों से संबंधित अंतिम आंकड़े संबंधित एजेंसियों की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

 

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp