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MP High Court ने NEET-PG 2026 में NRI सीटों को जनरल में बदलने से रोका

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Published On: 24 February 2026
NEET-PG 2026: High Court Safeguards NRI Candidates Against Seat Conversion
— NEET-PG 2026: High Court Safeguards NRI Candidates Against Seat Conversion

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MP High Court का बड़ा फैसला: NEET-PG 2026 में NRI सीटों को जनरल में न बदला जाए

इंदौर, मध्यप्रदेश: एमपी हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने NEET-PG 2026 काउंसलिंग के दौरान NRI सीटों को जनरल में बदलने के फैसले को रोकते हुए एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। उच्च न्यायालय ने डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन (DME) को स्पष्ट निर्देश दिया कि NRI सीटों को अंतिम राउंड तक NRI कोटे में ही रखा जाए और इन्हें जनरल में परिवर्तित नहीं किया जाए।

यह आदेश NRI अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है और यह मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों के पालन का संदेश भी देता है।

1. पूरा मामला क्या है?

मामला तब सामने आया जब NRI अभ्यर्थियों ने DME द्वारा चौथे मॉप-अप राउंड में बची NRI सीटों को जनरल में बदलने का कदम चुनौती दी।

  • NRI छात्रों का कहना था कि उन्हें फर्स्ट राउंड, सेकेंड राउंड और मॉप-अप राउंड तक NRI कोटे में प्रवेश पाने का अधिकार है।
  • इसके बावजूद DME ने कुछ सीटों को जनरल में परिवर्तित किया।
  • अभ्यर्थियों ने दावा किया कि यह कदम उनके संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।

23 फरवरी 2026 को कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने जोर दिया कि NRI छात्रों को उनकी आरक्षित सीटें पूरी तरह सुरक्षित मिलनी चाहिए।

2. हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

इंदौर खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में अंतरिम आदेश सुनाया।

मुख्य बिंदु:

  1. DME को निर्देश: पात्र NRI छात्रों को अंतिम राउंड तक मौका दिया जाए।
  2. सीटों का संरक्षण: NRI सीटों को जनरल में बदलना उचित नहीं।
  3. पारदर्शिता सुनिश्चित करना: काउंसलिंग प्रक्रिया में नियमों का पालन किया जाए।

हाई कोर्ट ने कहा कि NRI कोटे की सीटें उन छात्रों के लिए आरक्षित हैं जिन्होंने इसे पाने के लिए आवेदन किया है और उनकी कानूनी अधिकारिता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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3. कानून विशेषज्ञों की राय

कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश NRI छात्रों के हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • पारदर्शिता का संदेश: यह आदेश काउंसलिंग प्रक्रिया में नियमों और पारदर्शिता का पालन सुनिश्चित करता है।
  • कानूनी उदाहरण: भविष्य में किसी भी विवादित सीटों को बदलने से पहले कोर्ट का रुख देखा जाएगा।
  • शिक्षा क्षेत्र में नियमों का पालन: मेडिकल एडमिशन में आरक्षित सीटों को सुरक्षित रखना एक कानूनी दायित्व है।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि यह आदेश छात्रों और उनके परिवारों को संतोष और सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे कोई भी छात्र अपनी सीट खोने के डर के बिना तैयारी कर सके।

4. छात्रों और परिजनों की प्रतिक्रिया

NEET-PG 2026 में NRI सीटों के लिए आवेदन करने वाले छात्रों और उनके परिजनों ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया।

  • उनका कहना है कि यह फैसला उनके हक की रक्षा करता है।
  • DME से उन्होंने आदेश का पालन सुनिश्चित करने की मांग की।
  • छात्रों ने कहा कि अब उन्हें अपनी काउंसलिंग और सीट चयन प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आएगी।

एक NRI अभ्यर्थी ने कहा,
“हाई कोर्ट का आदेश हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अब हमें हमारी आरक्षित सीटें सुरक्षित रहेंगी और हम बिना तनाव के मेडिकल प्रवेश की तैयारी कर सकते हैं।”

5. NEET-PG 2026 काउंसलिंग में NRI सीटों का महत्व

NRI कोटे की सीटें मेडिकल शिक्षा में विदेश से भारतीय छात्रों और उनके परिवारों के लिए आरक्षित हैं।

  • इन सीटों का उद्देश्य वैश्विक भारतीय छात्रों को अवसर प्रदान करना है।
  • NRI सीटें PG मेडिकल कोर्स में उच्च शुल्क और विशेष शर्तों के साथ आती हैं।
  • इन्हें जनरल में बदलने से न केवल छात्रों के अधिकार प्रभावित होते हैं बल्कि काउंसलिंग प्रक्रिया में असमानता भी उत्पन्न होती है।

इसलिए, कोर्ट का आदेश न केवल NRI छात्रों के हित में है बल्कि पूरे शैक्षिक प्रशासनिक ढांचे के लिए भी महत्वपूर्ण है।

6. भविष्य में अपेक्षा

DME को निर्देशित किया गया है कि वह NRI सीटों को अंतिम राउंड तक संरक्षित रखे।

  • इसका मतलब है कि अगली काउंसलिंग राउंड में भी NRI छात्रों को उनकी सीट सुरक्षित मिलेगी।
  • DME और संबंधित कॉलेजों को कोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित करना होगा।
  • यदि कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो अदालत फिर से हस्तक्षेप कर सकती है।

इस आदेश से यह संदेश जाता है कि मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया में कानूनी नियमों और आरक्षण प्रणाली का पालन करना अनिवार्य है।

निष्कर्ष

MP हाई कोर्ट का यह फैसला NEET-PG 2026 में NRI छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • NRI सीटों को जनरल में बदलने का कदम रोकते हुए कोर्ट ने छात्रों के हित और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी।
  • यह आदेश छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा संस्थानों के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शन प्रस्तुत करता है।
  • भविष्य में यह आदेश काउंसलिंग और मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया में नियमों के पालन और समानता सुनिश्चित करने का उदाहरण बनेगा।

इस निर्णय के साथ NRI छात्रों को उनकी योग्य सीटों पर सुरक्षित प्रवेश सुनिश्चित होगा और वे अपनी PG मेडिकल पढ़ाई की तैयारी निर्बाध रूप से जारी रख सकते हैं।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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