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NEET Paper Leak 2026: नई टास्क फोर्स से बदलेगी परीक्षा व्यवस्था या फिर रह जाएंगी सिफारिशें?

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Published On: 27 July 2026
NEET Paper Leak 2026: नई टास्क फोर्स से बदलेगी परीक्षा व्यवस्था या फिर रह जाएंगी सिफारिशें?

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NEET Paper Leak 2026: नई टास्क फोर्स से बदलेगी परीक्षा व्यवस्था या फिर रह जाएंगी सिफारिशें?

2024 के विवाद से 2026 के संकट तक, छात्रों के भरोसे की परीक्षा में सरकार के सामने बड़ी चुनौती

नई दिल्ली। देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वर्ष 2024 में सामने आए पेपर लीक विवाद के बाद 2026 में दोबारा ऐसी घटना ने लाखों छात्रों और अभिभावकों को चिंता में डाल दिया। इस बार मामला केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और सरकार की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन इस आक्रोश का बड़ा केंद्र बना। छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षित प्रणाली की मांग की। बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा सुधारों के लिए नई हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाने का ऐलान किया है।

2024 और 2026 के NEET विवाद में क्या अंतर?

वर्ष 2024 का NEET पेपर लीक मामला मुख्य रूप से बिहार के पटना और हजारीबाग से जुड़ा था। जांच में सामने आया था कि परीक्षा से पहले पेपर कुछ लोगों तक पहुंचाया गया और दलालों के माध्यम से कुछ अभ्यर्थियों को इसका लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।

मामले की जांच के बाद सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि गड़बड़ी सीमित स्तर पर थी और पूरे देश में परीक्षा प्रभावित होने के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले थे। इसी कारण राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा रद्द नहीं की गई।

वहीं 2026 का मामला इससे अलग बताया जा रहा है। इस बार पेपर लीक के आरोपों ने परीक्षा की पूरी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए। विवाद इतना बढ़ा कि परीक्षा को रद्द करने और दोबारा आयोजित करने की स्थिति बनी।

इससे लाखों छात्रों को मानसिक तनाव, आर्थिक नुकसान और दोबारा तैयारी की परेशानी का सामना करना पड़ा।

दो कमेटियां, दो अलग-अलग उद्देश्य

NEET विवाद के बाद सरकार ने अलग-अलग समय पर दो उच्च स्तरीय समितियां गठित कीं। दोनों का उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था में सुधार करना था, लेकिन उनके काम का दायरा अलग-अलग रहा।

2024 की राधाकृष्णन समिति

2024 के NEET विवाद के बाद गठित समिति की अध्यक्षता इसरो के पूर्व चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन ने की थी।

इस समिति में शिक्षाविदों, आईआईटी विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य था:

  • NTA की कार्यप्रणाली की समीक्षा करना,
  • परीक्षा प्रक्रिया में कमियां पहचानना,
  • डेटा सुरक्षा और परीक्षा प्रबंधन में सुधार के सुझाव देना।

समिति ने अक्टूबर 2024 में अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए करीब 101 सुझाव दिए थे।

इनमें:

  • NTA में स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति,
  • आउटसोर्सिंग कम करना,
  • कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली को बढ़ावा देना,
  • राज्य और जिला स्तर पर समन्वय व्यवस्था बनाना शामिल था।

नई हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का फोकस तकनीक और सुरक्षा पर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित नई टास्क फोर्स का दायरा पहले की समिति से अधिक तकनीकी और व्यापक बताया जा रहा है।

इसमें तकनीकी और सुरक्षा क्षेत्र के कई विशेषज्ञ शामिल हैं, जिनमें:

  • इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी,
  • इसरो चेयरमैन एस. सोमनाथ,
  • पूर्व आईबी प्रमुख तपन डेका,
  • आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामाकोटी,
  • पूर्व शिक्षा सचिव अनिता करवाल शामिल हैं।

इस टीम का उद्देश्य केवल यह पता लगाना नहीं है कि गलती कहां हुई, बल्कि ऐसी परीक्षा प्रणाली तैयार करना है जिसे भविष्य में पेपर लीक और साइबर खतरों से सुरक्षित रखा जा सके।

पुरानी सिफारिशों पर सवाल

राधाकृष्णन समिति ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे, लेकिन उनमें से कई सुझाव पूरी तरह लागू नहीं हो पाए।

कुछ सुधार जैसे:

  • परीक्षा केंद्रों पर निगरानी बढ़ाना,
  • बायोमेट्रिक व्यवस्था,
  • सीसीटीवी निगरानी

पर काम किया गया।

लेकिन परीक्षा संचालन के मूल ढांचे में बड़े बदलाव नहीं हो सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि NTA जैसी महत्वपूर्ण संस्था में पर्याप्त स्थायी कर्मचारी, मजबूत तकनीकी ढांचा और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।

लंबे समय तक एजेंसी में स्थायी नेतृत्व की कमी और बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारियों पर निर्भरता भी सवालों के घेरे में रही।

सरकार के रवैये में बदलाव

2024 के विवाद के दौरान सरकार पर आरोप लगे थे कि उसने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया। बाद में जांच एजेंसियों को जांच सौंपी गई और सुधारों के लिए समिति बनाई गई।

हालांकि इस बार परिस्थितियां अलग हैं।

छात्र आंदोलन, राजनीतिक दबाव और देशभर में बढ़ती नाराजगी के बाद सरकार ने तेजी से कदम उठाने शुरू किए हैं।

सरकार की ओर से:

  • परीक्षा कानून को सख्त बनाने,
  • NTA में बदलाव,
  • प्रशासनिक स्तर पर फेरबदल,
  • नई हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के गठन

जैसे कदम उठाए गए हैं।

नया कानून और सख्ती की तैयारी

सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकने के लिए कानून में संशोधन की दिशा में आगे बढ़ रही है।

प्रस्तावित संशोधनों में पेपर लीक, परीक्षा में धोखाधड़ी और संगठित अपराधों पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान किया जा सकता है।

सरकार का कहना है कि परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखना लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा विषय है।

छात्रों की असली मांग: भरोसे की वापसी

NEET जैसी परीक्षा केवल एक प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों से जुड़ी होती है। एक पेपर लीक की घटना केवल परीक्षा को प्रभावित नहीं करती, बल्कि छात्रों के वर्षों के परिश्रम और मानसिक स्थिति पर भी असर डालती है।

नई टास्क फोर्स में तकनीकी विशेषज्ञों की मौजूदगी उम्मीद जगाती है, लेकिन छात्रों के लिए असली सफलता तभी होगी जब परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बने।

क्या नई टीम बदल पाएगी परीक्षा प्रणाली?

डिजिटल इंडिया के दौर में जब बैंकिंग, सरकारी सेवाएं और अन्य व्यवस्थाएं तेजी से ऑनलाइन और सुरक्षित हो रही हैं, तब देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सेंध लगना बड़ी चुनौती है।

अब जिम्मेदारी नई टास्क फोर्स पर है कि वह केवल रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित न रहे, बल्कि ऐसे ठोस बदलाव करे जिनसे भविष्य में छात्रों को दोबारा ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

आने वाला समय तय करेगा कि यह नई पहल भारतीय परीक्षा प्रणाली में वास्तविक सुधार ला पाती है या फिर पुरानी सिफारिशों की तरह केवल दस्तावेजों तक सीमित रह जाती है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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