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नीमच रेलवे हादसा: दो इंजन टकराए, 3 कर्मचारी घायल; ब्रेक फेल, OHE निरीक्षण यान जिम्मेदार, डबलिंग प्रोजेक्ट पर सवाल

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Published On: 8 December 2025
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MP News: नीमच में बड़ा रेलवे हादसा — दो इंजन आमने-सामने टकराए, 3 कर्मचारी घायल! ब्रेक फेल होने से हादसा, जांच के आदेश जारी

मध्य प्रदेश के नीमच जिले में सोमवार सुबह रेलवे में हड़कंप मच गया, जब हिंगोलिया फाटक के पास दो इंजनों की जबरदस्त टक्कर हो गई। इस भीषण दुर्घटना में तीन रेलकर्मी घायल हो गए, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसा उस समय हुआ जब एक इंजन पहले से ट्रैक पर खड़ा था और पीछे से तेज़ रफ्तार में आ रहा OHE (Overhead Equipment) निरीक्षण यान सीधे उससे जा भिड़ा। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों इंजनों के आगे का हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया।

क्या हुआ नीमच रेलवे हादसे में?

प्रत्यक्षदर्शियों और रेलवे कर्मचारियों के अनुसार, ट्रैक पर एक इंजन पहले से खड़ा था। ठीक उसी लाइन पर ओएचई निरीक्षण यान तेज गति से आ रहा था। जैसे ही यान पास पहुंचा, ड्राइवर ने ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया। नियंत्रण खोने के बाद निरीक्षण यान सीधे आगे खड़े इंजन से टकरा गया।

तीन कर्मचारी घायल — दो की हालत गंभीर

हादसे में कुल तीन कर्मचारी घायल हुए हैं। उनमें से दो—

  • विष्णु राठौर (32)
  • रामनरेश (22)

की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को तुरंत शासकीय अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। तीसरे कर्मचारी को मामूली चोटें आई हैं।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, समय रहते आपातकालीन ब्रेक लग पाते तो हादसे को रोका जा सकता था, लेकिन ब्रेक फेल होना दुर्घटना का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

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ब्रेक क्यों फेल हुए?

रेलवे सूत्रों के मुताबिक, OHE निरीक्षण यान की तकनीकी जांच की जा रही है। प्राथमिक कारणों में निम्न बिंदुओं की आशंका जताई जा रही है:

  • यान के ब्रेक सिस्टम में अचानक आई तकनीकी खराबी
  • निरीक्षण वाहन की गति निर्धारित सीमा से अधिक होना
  • संचार की कमी या ट्रैक क्लियरेंस में त्रुटि

हालांकि रेलवे ने अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्टों में ब्रेक फेलियर को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।

डबल लाइन प्रोजेक्ट के बीच बड़ा हादसा

यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब पूरा क्षेत्र रतलाम–नीमच रेल रूट डबलिंग प्रोजेक्ट का महत्वपूर्ण चरण देख रहा है।

Ratlam–Neemuch Rail Route Doubling Project पर तेजी से काम चल रहा है और अनेक जगह भारी मशीनरी, OHE कार्य, और निरीक्षण गतिविधियां जारी हैं। ट्रैक पर बढ़ती गतिविधियों के बीच यह हादसा सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

रेलवे सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • डबल लाइन कार्य के दौरान ट्रैफिक अधिक रहता है
  • इंजनों और निरीक्षण यानों की मूवमेंट लगातार होती है
  • इस दौरान जरा सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है

रेलवे अधिकारियों ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश

रेल मंत्रालय और पश्चिम रेलवे के अधिकारी हादसे की जांच में जुट गए हैं।
सूत्रों के अनुसार:

  • मामले की उच्च स्तरीय जांच होगी
  • OHE निरीक्षण यान की तकनीकी स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी
  • दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है
  • भविष्य में ऐसे हादसे न हों, इसके लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल और तकनीकी निरीक्षण को और मजबूत किया जाएगा

फिलहाल रेलवे की टीम मौके पर पहुंच चुकी है और क्षतिग्रस्त इंजनों को हटाने तथा ट्रैक को सुचारू करने का कार्य जारी है।

रेलवे सुरक्षा पर सवाल

यह पहला मौका नहीं है जब निरीक्षण यान या इंजन के ब्रेक फेल होने की घटनाएं सामने आई हों। इससे पहले भी देश के कई हिस्सों में इसी प्रकार के हादसे दर्ज हो चुके हैं। नीमच हादसे ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि—

  • क्या OHE निरीक्षण यानों की नियमित चेकिंग पर्याप्त है?
  • क्या डबल लाइन प्रोजेक्ट के दौरान सुरक्षा प्रबंधन पर्याप्त मजबूत है?
  • क्या रेलवे कर्मियों को पर्याप्त तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाता है?

रेलवे बोर्ड आने वाले दिनों में सुरक्षा प्रोटोकॉल को और कठोर करने पर जोर दे सकता है।

स्थानीय नागरिकों में दहशत

हिंगोलिया फाटक के आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि टक्कर की आवाज कई किलोमीटर तक सुनाई दी। कई लोग मौके पर पहुंचे तो देखा कि दोनों इंजनों के आगे के हिस्से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके थे।

स्थानीय जनता रेलवे से मांग कर रही है कि—

  • कार्यस्थलों पर सुरक्षा बढ़ाई जाए
  • निरीक्षण वाहनों की नियमित तकनीकी जांच हो
  • निर्माण कार्य क्षेत्रों में अलर्ट सिस्टम लगाया जाए

निष्कर्ष

नीमच में दो इंजनों की टक्कर का यह बड़ा हादसा न केवल रेलवे सिस्टम की तकनीकी कमजोरियों को उजागर करता है, बल्कि सुरक्षा प्रबंधन में मौजूद खामियों की ओर भी संकेत देता है। डबल लाइन प्रोजेक्ट जैसे बड़े कार्यों के बीच सभी गतिविधियों में अत्यधिक सतर्कता और मशीनों की नियमित जांच बेहद आवश्यक है।

रेलवे की जांच रिपोर्ट के बाद यह साफ होगा कि हादसा केवल तकनीकी खराबी था या मानव भूल भी इसमें शामिल थी।

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