Nagda । नागदा के सार्वजनिक शिव-हनुमान-दुर्गा मंदिर, प्रकाश नगर में नौ दिवसीय नवरात्रि पर्व का विधिवत आयोजन किया गया। इस अवसर पर अखंड ज्योत की घट स्थापना के साथ नवरात्रि उत्सव की शुरुआत हुई, जिसमें स्थानीय नागरिक, श्रद्धालु और यजमान परिवार ने भाग लिया।
यजमान और पूजा प्रारंभ
इस वर्ष नवरात्रि उत्सव के मुख्य यजमान थे:
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श्रीमती प्रकाश कुंवर शक्तावत, पति धर्मेद्र सिंह शक्तावत, जो वर्तमान में पंजाब सेवा में वरिष्ठ अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।
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चंदा देवी गोपी राम जोशी, जिन्होंने पूजा अर्चना और अखंड ज्योत प्रज्वलन की।
अखंड ज्योत को प्रज्वलित करने के बाद, पंडित नरेंद्र अग्निहोत्री ने मंत्रोच्चारण और नवग्रह स्थापना के साथ पूजा की विधियां संपन्न करवाई। सभी यजमानों को मंदिर में विराजित देवताओं की पूजा करवाई गई।
आरती और प्रसाद वितरण
पूजा के बाद पुजारी शुभम शर्मा ने तीन प्रमुख आरतियों का संचालन किया:
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जय जय अंबे गौरी
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ओम जय जगदीश हरे
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हनुमान जी की आरती
भक्तों ने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ आरती में भाग लिया। आरती और पुष्पांजलि के पश्चात, यजमान परिवार ने प्रसाद का वितरण भी किया।

नवरात्रि का धार्मिक महत्व
नवरात्रि पर्व नौ दिन तक चलने वाला महापर्व है, जिसमें माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान भक्त अखंड ज्योत के माध्यम से देवी शक्ति का स्वागत करते हैं और अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति की कामना करते हैं।
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प्रथम दिन माता शैलपुत्री की पूजा होती है।
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द्वितीय दिन ब्रह्मचारिणी रूप में तप और संयम का संदेश मिलता है।
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तीसरे दिन माता चंद्रघंटा का रूप भय और नकारात्मकता का नाश करता है।
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चौथे दिन माता कूष्मांडा का रूप सृष्टि और ऊर्जा का प्रतीक है।
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पांचवें दिन माता स्कंदमाता की पूजा से माता की ममता का अनुभव होता है।
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छठे दिन माता कात्यायनी का रूप शत्रुओं और बाधाओं का विनाश करता है।
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सातवें दिन माता कालरात्रि का रूप शक्तिशाली और भय दूर करने वाला होता है।
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आठवें दिन माता महागौरी जीवन में सुख और समृद्धि लाती हैं।
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नवमीं के दिन माता सिद्धिदात्री सभी कार्यों को सिद्ध करने में सहायता करती हैं।
इस प्रकार, अखंड ज्योत और नौ दिन की पूजा का धार्मिक महत्व अत्यंत बड़ा है।
श्रद्धालुओं की उपस्थिति
पूजा में सुरेश शर्मा, मुकेश भारद्वाज, नंदकिशोर भाटी, नारायण सिंह बेस, छोटू चौहान, धीरेंद्र प्रताप सिंह चौहान सहित अनेक महिला, पुरुष और बच्चे उपस्थित थे। स्थानीय भक्तों ने मंदिर परिसर को धार्मिक और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण बनाया।

सामाजिक और सांस्कृतिक पहल
यह नवरात्रि उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मिलन का अवसर भी है। इस अवसर पर लोग एकत्र होते हैं, मंदिर की साफ-सफाई, व्यवस्था और पूजा सामग्री का सहयोग करते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और मंदिर सदस्य सी.एल. वर्मा ने इस आयोजन की जानकारी साझा की और बताया कि इस प्रकार के आयोजन स्थानीय समाज में संस्कार, भक्ति और एकता को बढ़ावा देते हैं।
आयोजन की विशेषताएँ
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अखंड ज्योत घट स्थापना – नौ दिन तक जलती रहेगी और भक्तों को लगातार देवी की उपस्थिति का अनुभव कराएगी।
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पूजा-अर्चना – पंडित द्वारा मंत्रों और यज्ञ के माध्यम से नवग्रहों की स्थापना।
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आरती और प्रसाद वितरण – सभी भक्तों को प्रसाद और आशीर्वाद प्रदान।
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सामुदायिक सहभागिता – पुरुष, महिला और बच्चे सभी ने पूजा में भाग लिया।
नवरात्रि के दौरान आने वाले कार्यक्रम
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मंदिर में भजन और कीर्तन का आयोजन।
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भक्तों द्वारा कन्या पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान।
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सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे लोकगीत और नृत्य का आयोजन।
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य न केवल धार्मिकता को बढ़ावा देना है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करना है।
यजमान परिवार का योगदान
यजमान परिवार शक्ति और भक्ति के आदर्श प्रस्तुत करता है। उन्होंने न केवल पूजा-अर्चना में भाग लिया, बल्कि मंदिर के विकास और धार्मिक वातावरण के संवर्धन में भी योगदान दिया। इस प्रकार, यह आयोजन केवल मंदिर का नहीं, बल्कि पूरे समाज का उत्सव बन गया।
निष्कर्ष
नागदा के शिव-हनुमान-दुर्गा मंदिर, प्रकाश नगर में आयोजित यह नवरात्रि पर्व अपने धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण विशेष था। अखंड ज्योत घट स्थापना ने नौ दिन तक भक्तों को देवी शक्ति का अनुभव कराया।
इस आयोजन से न केवल भक्ति की भावना मजबूत हुई, बल्कि समाज में एकता, सहयोग और धार्मिक अनुशासन की भी मिसाल कायम हुई। भविष्य में इस प्रकार के आयोजन स्थानीय समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक जागरूकता फैलाने में मदद करेंगे।
