नवकार महामंत्र में अनंत शक्ति, श्रद्धाभाव से नियमित स्मरण कल्याणकारी : साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी
नवकार महामंत्र आराधना के दूसरे दिन श्री राजेंद्र सूरि ज्ञान मंदिर में धर्मसभा, आठ कर्मों के क्षय और सिद्ध पद की महत्ता पर दिया संदेश
महिदपुर रोड। नवकार महामंत्र आराधना के द्वितीय दिवस शुक्रवार को श्री राजेंद्र सूरि ज्ञान मंदिर में धर्मसभा का आयोजन किया गया। चातुर्मास के लिए विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा ने उपस्थित समाजजनों को जिनवाणी का रसपान कराते हुए नवकार महामंत्र की महिमा, सिद्ध पद की प्राप्ति, कर्मों के क्षय और जीवन में गुरु के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा कि जैन धर्म में नवकार महामंत्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इसमें अनंत शक्ति विद्यमान मानी गई है। श्रद्धा, आस्था और शुद्ध भाव के साथ इसका नियमित स्मरण व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता और आत्मिक शांति प्रदान करता है। उन्होंने धार्मिक मान्यता के अनुसार नवकार महामंत्र के नियमित जाप को शारीरिक एवं मानसिक कष्टों से मुक्ति के लिए भी कल्याणकारी बताया।
सिद्ध पद की प्राप्ति के लिए करें ‘नमो सिद्धाणं’ का जाप

साध्वीश्री ने धर्मसभा में ‘नमो सिद्धाणं’ पद की महत्ता बताते हुए कहा कि साधक को सिद्ध पद की प्राप्ति के लक्ष्य के साथ इसका जाप करना चाहिए। सिद्ध परमात्मा जैन दर्शन में कर्मबंधन से पूर्ण रूप से मुक्त आत्मा के सर्वोच्च स्वरूप का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उन्होंने कहा कि सिद्ध परमात्मा का प्रत्येक जीव पर अनंत उपकार माना गया है। जब कोई आत्मा समस्त कर्मों का क्षय कर सिद्ध अवस्था प्राप्त करती है, तब संसार में जीवों की आध्यात्मिक यात्रा का क्रम भी आगे बढ़ता है। इसलिए साधक को सिद्ध परमात्मा के गुणों का स्मरण करते हुए अपने जीवन में आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
आठ कर्मों का क्षय कर आत्मा प्राप्त करती है सिद्ध पद

धर्मसभा में साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने जैन दर्शन में बताए गए आठ प्रमुख कर्मों के बारे में भी समाजजनों को समझाया। उन्होंने कहा कि ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय, वेदनीय, मोहनीय, आयु, नाम, गोत्र और अंतराय कर्मों का पूर्ण क्षय होने पर आत्मा सिद्ध अवस्था को प्राप्त करती है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में धर्म, संयम, साधना और आत्मचिंतन को स्थान देना चाहिए। सांसारिक जीवन में मनुष्य कई प्रकार के मोह और कर्मबंधनों से घिर जाता है। इनसे मुक्त होने के लिए धर्म के बताए मार्ग पर चलते हुए आत्मा के वास्तविक स्वरूप को समझना आवश्यक है।
साध्वीश्री ने समाजजनों को प्रेरित किया कि वे केवल धार्मिक क्रियाओं तक सीमित न रहें, बल्कि धर्म के सिद्धांतों को अपने व्यवहार और दैनिक जीवन में भी उतारने का प्रयास करें।
गुरु की कृपा को समझें प्रभु की कृपा
साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने जीवन में गुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को सच्चे गुरु की कृपा प्राप्त हो जाए तो उसे प्रभु की कृपा के समान मानना चाहिए।
उन्होंने कहा कि परमात्मा तक पहुंचने के लिए सही मार्ग का ज्ञान आवश्यक है और सच्चे गुरु साधक को यही दिशा प्रदान करते हैं। गुरु अपने ज्ञान और अनुभव के माध्यम से साधक को सही और गलत का भेद समझाते हैं तथा आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु द्वारा बताए गए सद्मार्ग को केवल सुनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे जीवन में अपनाने का प्रयास करना चाहिए। गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और उनके उपदेशों का पालन आध्यात्मिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
श्रद्धा और भाव के साथ करें महामंत्र का स्मरण
धर्मसभा के दौरान नवकार महामंत्र की आराधना के महत्व को समझाते हुए कहा गया कि मंत्र का वास्तविक प्रभाव तभी अनुभव किया जा सकता है, जब उसका स्मरण श्रद्धा और एकाग्रता के साथ किया जाए।
नवकार महामंत्र किसी व्यक्ति विशेष की आराधना के बजाय अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु परमेष्ठियों के गुणों को नमन करने का महामंत्र है। इसलिए जैन समाज में इसे अत्यंत पवित्र और मंगलकारी माना जाता है।
धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने साध्वीश्री के प्रवचनों को ध्यानपूर्वक सुना और नवकार महामंत्र आराधना में भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
भंडारी परिवार ने लिया साधार्मिक भक्ति का लाभ
जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने बताया कि नवकार महामंत्र आराधना के द्वितीय दिवस की साधार्मिक भक्ति, प्रभावना एवं संपूर्ण दिवस का लाभ पारसमल भंडारी परिवार, बप्पैया वाला द्वारा लिया गया।
कार्यक्रम में जैन समाज के बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, युवा और वरिष्ठ समाजजन उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठान और धर्मसभा में सहभागिता करते हुए साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा से आशीर्वाद प्राप्त किया।
श्री राजेंद्र सूरि ज्ञान मंदिर में चल रही नवकार महामंत्र आराधना को लेकर समाजजनों में उत्साह और धार्मिक वातावरण बना हुआ है। आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को नवकार महामंत्र की महिमा के साथ आत्मशुद्धि, कर्मों से मुक्ति, गुरु भक्ति और सिद्ध परमात्मा के गुणों को जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया जा रहा है।
