राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर 1.40 लाख बच्चों को खिलाई जाएगी एलबेंडाजोल की गोली
नागदा-खाचरौद ब्लॉक में अभियान की शुरुआत, स्कूलों और 415 आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों को दी गई कृमिनाशक दवा
संवाददाता : प्रमोद कुमार जैन
Nagda । राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर नागदा-खाचरौद ब्लॉक में 1 से 19 वर्ष तक की आयु के बच्चों को कृमिनाशक दवा खिलाने के महाअभियान की शुरुआत मंगलवार को की गई। अभियान के तहत ब्लॉक के शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों तथा आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों को एलबेंडाजोल की गोलियां नि:शुल्क खिलाई गईं।
ब्लॉक स्तरीय मुख्य कार्यक्रम का शुभारंभ नई दिल्ली और प्रकाश नगर स्थित आंगनवाड़ी केंद्रों पर बीएमओ डॉ. संजीव कुमरावत और सीडीपीओ मुकेश वर्मा ने किया। इस दौरान बच्चों को एलबेंडाजोल की गोली खिलाकर अभियान की शुरुआत की गई।
48 उपस्वास्थ्य केंद्र और 415 आंगनवाड़ी केंद्र शामिल
अभियान के तहत शासकीय कन्या विद्यालय में बीसीएम की मौजूदगी में बच्चों को दवा दी गई। वहीं ब्लॉक के 48 उपस्वास्थ्य केंद्रों पर सीएचओ और 415 आंगनवाड़ी केंद्रों पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने बच्चों को कृमिनाशक गोली खिलाई।
स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से स्कूलों तथा आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को यह दवा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।
1 लाख 40 हजार बच्चों को दवा खिलाने का लक्ष्य
बीएमओ डॉ. संजीव कुमरावत ने बताया कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उन्हें कृमि संक्रमण से मुक्त रखना जरूरी है। पेट में कृमि होने से बच्चों में एनीमिया यानी खून की कमी और कुपोषण जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
सीडीपीओ मुकेश वर्मा ने बताया कि नागदा-खाचरौद ब्लॉक में 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के करीब 1 लाख 40 हजार बच्चों को एलबेंडाजोल की गोली खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीमें स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों तक दवा पहुंचा रही हैं।
9 अक्टूबर को होगा मॉप-अप राउंड
अधिकारियों ने बताया कि जो बच्चे किसी कारणवश मंगलवार को एलबेंडाजोल की गोली खाने से वंचित रह गए हैं, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। ऐसे सभी छूटे हुए बच्चों को 9 अक्टूबर को आयोजित होने वाले मॉप-अप राउंड के दौरान दवा खिलाई जाएगी।
अभियान का उद्देश्य बच्चों को कृमि संक्रमण से बचाना और उनके बेहतर शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
