नाथूलाल जाट हत्याकांड में बड़ा फैसला, जनपद पंचायत पिपलौदा उपाध्यक्ष सुरेश जाट सहित 8 को आजीवन कारावास
संवाददाता: प्रियंका गुजराती
रतलाम/जावरा। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के पिपलौदा थाना क्षेत्र के कंचनखेड़ी गांव में हुए नाथूलाल उर्फ नाथूराम जाट हत्याकांड में जावरा न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। पुरानी रंजिश को लेकर वृद्ध नाथूलाल जाट पर हुए जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने जनपद पंचायत पिपलौदा के उपाध्यक्ष सुरेश जाट सहित आठ आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने सभी आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/149 के तहत हत्या का दोषी माना। इसके अलावा धारा 148 के तहत भी प्रत्येक आरोपी को तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। यह फैसला 12 अगस्त 2026 को जावरा के प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश जे.बी.एस. राजपूत की अदालत में सुनाया गया।
पुरानी रंजिश में वृद्ध पर किया गया था हमला
मामला पिपलौदा थाना क्षेत्र के कंचनखेड़ी गांव का है। यहां पुरानी रंजिश को लेकर नाथूलाल उर्फ नाथूराम जाट के साथ विवाद हुआ था। विवाद बढ़ने के बाद आरोपियों ने वृद्ध पर कथित रूप से जानलेवा हमला कर दिया।
हमले में नाथूलाल गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनकी हालत गंभीर होने के कारण उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। शुरुआत में पुलिस ने घटना को जानलेवा हमले के रूप में दर्ज किया था। बाद में घायल नाथूलाल की मौत होने के बाद प्रकरण में हत्या की धाराएं जोड़ी गईं।
मौत के बाद हत्या की धाराएं जोड़ी गईं
घटना के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की। प्रारंभिक तौर पर घायल वृद्ध के बयान और घटना की परिस्थितियों के आधार पर जानलेवा हमले का मामला दर्ज किया गया था।
इलाज के दौरान नाथूलाल की मृत्यु होने के बाद पुलिस ने मामले को हत्या में तब्दील किया और आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं में कार्रवाई की। पुलिस ने प्रकरण में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार किया और मामले की विवेचना आगे बढ़ाई।
पुलिस ने जुटाए महत्वपूर्ण साक्ष्य
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आवश्यक दस्तावेज तैयार किए। जांच में घटनास्थल का नक्शा, पंचनामा, चिकित्सकीय साक्ष्य और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को शामिल किया गया।
पुलिस ने मामले से जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए और घटना की परिस्थितियों को जांच का हिस्सा बनाया। विवेचना पूरी होने के बाद प्रकरण को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ी। दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया।
सुरेश जाट सहित इन आठ आरोपियों को सजा

जावरा न्यायालय ने मामले में सुरेश जाट, राहुल, कपिल, विकास उर्फ भूरा, सुभाष, बलराम, अवतारसिंह और विक्रम को दोषी माना है।
अदालत ने इन सभी आठ आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/149 के तहत दोषी करार दिया। हत्या के मामले में सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
इसके साथ ही धारा 148 के तहत भी प्रत्येक आरोपी को तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी गई। अदालत ने प्रत्येक आरोपी पर 5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
जावरा के प्रथम अपर सत्र न्यायालय ने सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई जावरा के प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश जे.बी.एस. राजपूत की अदालत में हुई। सुनवाई पूरी होने के बाद 12 अगस्त 2026 को न्यायालय ने फैसला सुनाया।
फैसले के बाद नाथूलाल जाट हत्याकांड में लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। अदालत के निर्णय के बाद दोषी ठहराए गए सभी आठ आरोपियों को निर्धारित सजा भुगतनी होगी।
गांव में पुरानी रंजिश को लेकर हुआ था विवाद
पूरे मामले की पृष्ठभूमि में पुरानी रंजिश को प्रमुख कारण बताया गया है। ग्रामीण क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे विवाद ने गंभीर रूप ले लिया और मामला मारपीट से बढ़कर जानलेवा हमले तक पहुंच गया।
इस घटना में एक वृद्ध व्यक्ति की जान चली गई। पुलिस जांच के बाद मामला अदालत तक पहुंचा, जहां अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी ठहराया गया।
पुलिस की जांच और अभियोजन की भूमिका अहम
इस तरह के गंभीर आपराधिक मामलों में घटनास्थल से साक्ष्य जुटाना, चिकित्सकीय रिपोर्ट, पंचनामा और गवाहों के बयान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नाथूलाल हत्याकांड में भी पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों को न्यायालय की कार्यवाही में प्रस्तुत किया गया।
मामले की जांच पूरी करने के बाद आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में प्रकरण चलाया गया। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सभी आठ आरोपियों को दोषी माना और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
फैसले के बाद क्षेत्र में चर्चा
जावरा न्यायालय के इस फैसले के बाद पिपलौदा और आसपास के क्षेत्र में मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। खास तौर पर जनपद पंचायत पिपलौदा के उपाध्यक्ष सुरेश जाट का नाम आरोपियों में शामिल होने और उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिलने के कारण इस फैसले पर लोगों की नजर रही।
अदालत का यह फैसला यह भी रेखांकित करता है कि पुरानी रंजिश और आपसी विवाद को हिंसक रूप देने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। न्यायालय ने हत्या और संबंधित धाराओं में दोष सिद्ध होने के बाद आठों आरोपियों को कठोर सजा सुनाई है।
