डाटा की शुद्धता और त्रुटि सुधार पर जोर, नरसिंहपुर लगातार दूसरे वर्ष प्रदेश में पांचवें स्थान पर — दैनिक स्वराज वाणी
डाइट में जिला स्तरीय प्रशिक्षण-सह-अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित; अगले सत्र में प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल करने का लक्ष्य
राजाराम कौरव
नरसिंहपुर । जिले की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में सुधार और एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली प्लस (UDISE+) के डाटा को सही, पूर्ण और अद्यतन रखने के उद्देश्य से डाइट नरसिंहपुर में जिला स्तरीय प्रशिक्षण-सह-अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें डाटा सत्यापन, त्रुटि सुधार और जिलों के प्रदर्शन श्रेणीकरण सूचकांक के विभिन्न संकेतकों में सुधार के तरीकों पर चर्चा की गई।
कार्यशाला का आयोजन कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह के निर्देशन और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री गजेन्द्र नागेश के मार्गदर्शन में जिला परियोजना समन्वयक श्री प्रदीप द्विवेदी द्वारा किया गया। इसमें जिले के सभी विकासखंडों के विकासखंड संसाधन केंद्र समन्वयक, विकासखंड अकादमिक समन्वयक, जनशिक्षक और प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) समन्वयक शामिल हुए।
विद्यालय, शिक्षक और विद्यार्थियों के डाटा पर प्रशिक्षण
कार्यशाला में विद्यालय, शिक्षक और विद्यार्थियों से संबंधित जानकारियों की सही और पूरी प्रविष्टि के महत्व पर विस्तार से बताया गया। प्रतिभागियों को डाटा भरते समय सावधानी रखने, उपलब्ध विवरणों का सत्यापन करने और गलतियों को समय रहते सुधारने की प्रक्रिया समझाई गई। अधिकारियों ने कहा कि अधूरी या गलत जानकारी से शिक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन और जिले के प्रदर्शन का आकलन प्रभावित हो सकता है।
सहायक परियोजना समन्वयक श्री समीर त्यागी और श्री मनीष चौकसे कार्यशाला में मौजूद रहे। जिला प्रोग्रामर श्री शरद यादव ने प्रोजेक्टर के माध्यम से पोर्टल की उपयोगिता समझाई। उन्होंने बताया कि पोर्टल पर दर्ज जानकारी का उपयोग शिक्षा योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और विद्यालयों से जुड़े विभिन्न विवरणों को व्यवस्थित रखने में किया जाता है।
प्रदर्शन श्रेणीकरण सूचकांक के संकेतकों की जानकारी
प्रबंधन सूचना प्रणाली समन्वयक श्री राजेंद्र चौरसिया और श्री दीपक श्रीवास्तव ने प्रदर्शन श्रेणीकरण सूचकांक के अलग-अलग संकेतकों पर जानकारी दी। उन्होंने डाटा प्रविष्टि के दौरान होने वाली सामान्य त्रुटियों और उनसे पड़ने वाले प्रभावों पर भी चर्चा की। प्रतिभागियों को बताया गया कि संकेतकों की सही जानकारी और समय पर सत्यापन से जिले के प्रदर्शन का आकलन अधिक विश्वसनीय बनता है।
श्री वेद प्रकाश राजपूत और श्रीमती सुरिंदर पारोची ने विद्यालय, शिक्षक और विद्यार्थी से संबंधित विवरणों की प्रविष्टि, सत्यापन और आवश्यक सावधानियों के बारे में जानकारी दी। श्रीमती सोनम कोष्टी और श्री दुर्गेश विश्वकर्मा ने तकनीकी पक्षों पर मार्गदर्शन दिया। इस दौरान प्रतिभागियों को पोर्टल पर जानकारी दर्ज करने और उपलब्ध विवरणों की समीक्षा करने के तरीके समझाए गए।
लगातार दूसरे वर्ष प्रदेश में पांचवां स्थान
कार्यशाला में बताया गया कि सत्र 2025-26 में नरसिंहपुर जिले का प्रदर्शन श्रेणीकरण सूचकांक स्कोर लगभग 307/600 रहा। इस प्रदर्शन के आधार पर जिला लगातार दूसरे वर्ष प्रदेश में पांचवें स्थान पर रहा। अधिकारियों ने इसे जिले की उपलब्धि बताते हुए कहा कि आगामी सत्र में रैंकिंग को और बेहतर करने के लिए डाटा की शुद्धता, पूर्णता और प्रमाणिकता पर विशेष ध्यान देना होगा।
साथ ही, प्रदर्शन श्रेणीकरण सूचकांक से जुड़े विभिन्न संकेतकों की नियमित समीक्षा करने और उनमें सुधार के लिए समन्वित प्रयासों की जरूरत बताई गई। विद्यालय स्तर पर जानकारी की जांच और त्रुटियों का समय पर निराकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
अगले सत्र में प्रथम स्थान का लक्ष्य
जिला शिक्षा केंद्र की ओर से सभी संबंधित अधिकारियों और मैदानी अमले से विद्यालय स्तर पर डाटा की नियमित समीक्षा करने, प्रविष्टियों का सत्यापन करने और पाई गई त्रुटियों को समय पर सुधारने का आग्रह किया गया। कार्यशाला में कहा गया कि यह प्रक्रिया केवल पोर्टल पर जानकारी दर्ज करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हर स्तर पर उसकी प्रमाणिकता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
कार्यशाला के अंत में सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों से नरसिंहपुर जिले को प्रदर्शन श्रेणीकरण सूचकांक की रैंकिंग में प्रदेश में प्रथम स्थान तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। अधिकारियों ने डाटा की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखने और सुधार कार्य को मिलकर आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
