—Advertisement—

Narmadapuram में सहकारी बैंक का मैनेजर रिश्वत लेते पकड़ा 10 प्रतिशत कमीशन पर दिया जाता था पैसा

Author Picture
Published On: 9 January 2026
Narmadapuram में सहकारी बैंक
— Narmadapuram लोकायुक्त का सख्त संदेश: भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं! सहकारी बैंक मैनेजर गिरफ्तार!

—Advertisement—

Narmadapuram में सहकारी बैंक का मैनेजर रिश्वत लेते पकड़ा 10 प्रतिशत कमीशन पर दिया जाता था पैसा

भोपाल लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई:
भोपाल लोकायुक्त की टीम ने Narmadapuram जिले के सोहागपुर स्थित सहकारी बैंक में छापेमारी की, जिसमें बैंक मैनेजर दिनेश चंद्र दुबे को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी उस वक्त हुई, जब बैंक मैनेजर ने आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के सहायक प्रबंधक से समर्थन मूल्य पर की गई धान की खरीदारी के हम्मालों के भुगतान सहित कर्मचारियों के वेतन निकालने के बदले 10 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी। लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने बैंकों में चल रहे रिश्वतखोरी के एक और घिनौने खेल को उजागर किया।

क्या है पूरा मामला?

Narmadapuram जिले के सोहागपुर स्थित Narmadapuram जिला सहकारी बैंक में यह मामला सामने आया। बैंक मैनेजर दिनेश चंद्र दुबे पर आरोप है कि उन्होंने कैलाश कुशवाहा, जो कि आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के सहायक प्रबंधक हैं, से धान खरीदने के हम्मालों के भुगतान और कर्मचारियों के वेतन निकालने के बदले रिश्वत की मांग की थी। बैंक मैनेजर ने करीब 10 प्रतिशत कमीशन की दर पर रिश्वत मांगी, जो कि कई बार पहले भी प्रकट हो चुकी थी।

इस मामले की शुरुआत कैलाश कुशवाहा द्वारा की गई शिकायत से हुई थी, जिसमें उन्होंने लोकायुक्त से शिकायत की थी कि बैंक मैनेजर उनसे रिश्वत की मांग कर रहे हैं। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया था कि बैंक मैनेजर ने प्रति एक लाख रुपये के बिल के भुगतान पर 10 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी। इसके अलावा, हम्मालों के भुगतान और कर्मचारियों के वेतन के भुगतान को लेकर भी वही कमीशन की मांग की जा रही थी। जब शिकायत की जांच की गई, तो यह साबित हो गया कि बैंक मैनेजर ने 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी, जिसे स्वीकार करते हुए लोकायुक्त ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ा।

लोकायुक्त की कार्रवाई

जैसे ही शिकायत का सत्यापन किया गया, लोकायुक्त की टीम ने सोहागपुर स्थित सहकारी बैंक में छापेमारी की योजना बनाई। इसके बाद, एक ट्रैप टीम बनाई गई, जिसने गुरुवार को लगभग 3 बजे के आसपास कार्रवाई की और बैंक मैनेजर दिनेश चंद्र दुबे को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। बैंक मैनेजर ने कैलाश कुशवाहा से 2 लाख रुपये के चेक के बदले 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी, और लोकायुक्त ने यह राशि बरामद की।

गिरफ्तारी के बाद, आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संसोधन 2018) की धारा 7 के तहत कार्रवाई की गई। लोकायुक्त की यह कार्रवाई भ्रष्टाचार को समाप्त करने के प्रयासों को और मजबूत करती है, और यह संदेश देती है कि किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

Narmadapuram में सहकारी बैंक
    Narmadapuram : सहकारी बैंक मैनेजर रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया!

कमीशन का खेल

इस मामले के साथ-साथ, Narmadapuram जिले के जिला सहकारी बैंकों में चल रहे एक बड़े कमीशन के खेल का भी खुलासा हुआ है। इन बैंकों में समर्थन मूल्य पर खरीदी के भुगतान के लिए सहकारी समितियों द्वारा बैंक से पैसा लिया जाता है, लेकिन यह भुगतान सीधे नहीं किया जाता। इसके बजाय, यह रकम नाफेड और नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा सहकारी बैंकों के खातों में जमा की जाती है। और यहीं से कमीशन का खेल शुरू होता है।

इस व्यवस्था के तहत, जो सहकारी समितियां काम करती हैं, उन्हें कर्मचारियों के वेतन और हम्मालों के भुगतान के बदले कमीशन की मांग की जाती है। इस प्रकार, सहकारी समितियों के प्रबंधक और बैंक मैनेजर के बीच एक रिश्वतखोरी का नेटवर्क बन जाता है, जो अक्सर भ्रष्टाचार की ओर ले जाता है।

सहकारी समितियों में कमीशन का खेल

कई बार शिकायतें आई हैं कि सहकारी समितियों में भुगतान के समय कमीशन का खेल चलता है, और बैंक अधिकारी इन नियमों का उल्लंघन कर अपनी जेबें भरने में लगे रहते हैं। इसमें से सोहागपुर के मामले में यह साफ हुआ कि सहकारी समितियों के प्रबंधक कैलाश कुशवाहा ने शिकायत करते हुए लोकायुक्त को सूचित किया था, और इसके बाद कार्रवाई की गई। इस मामले के सामने आने से यह स्पष्ट होता है कि किस तरह से सरकारी बैंकों में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार की जड़ें फैली हुई हैं।

गौरतलब तथ्य
  • सोहागपुर स्थित सहकारी बैंक के मैनेजर दिनेश चंद्र दुबे को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया।

  • 10 प्रतिशत कमीशन की दर पर रिश्वत की मांग की जा रही थी, जो कि पहले भी कई बार की जाती रही है।

  • लोकायुक्त ने कैलाश कुशवाहा द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर बैंक मैनेजर को गिरफ्तार किया।

  • इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत कार्रवाई की गई।

  • इस पूरे मामले में कमीशन की मांग और बैंक मैनेजर की रिश्वतखोरी की कहानी उजागर हुई।

भ्रष्टाचार से निपटने के लिए लोकायुक्त की सख्ती

यह मामला यह साबित करता है कि लोकायुक्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सशक्त और प्रभावी कदम उठा रहा है। लोकायुक्त की यह कार्रवाई न केवल Narmadapuram जिले में बल्कि पूरे प्रदेश में एक संदेश देती है कि कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी भ्रष्टाचार के मामले में नहीं बच सकता। इसके अलावा, यह लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूक करता है, जिससे वे आगे आकर अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें और प्रशासन को भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद कर सकें।

निष्कर्ष

Narmadapuram में हुई इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि सहकारी बैंकों में रिश्वतखोरी और कमीशन की मांग के चलते कई भ्रष्टाचारी गतिविधियाँ चल रही हैं। लोकायुक्त की कार्रवाई ने एक ओर भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया है। यह मामले की सफलता से लोकायुक्त की सख्त कार्यवाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी निगरानी का संकेत मिलता है।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp