सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक न्याय लोकतंत्र का आधार, देश की नींव
टैक्स, वोट और सरकारी योजनाओं के बीच नागरिक पहचान पर वर्षा मेहता ने उठाया सवाल; पात्रता, पारदर्शिता और सामाजिक जिम्मेदारी पर दिया जोर
Nagda। लोकतंत्र केवल मतदान करने या सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह अधिकारों के साथ कर्तव्यों, समानता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को भी महत्व देता है। इसी संदर्भ में श्री राष्ट्रीय परशुराम सेना युवा वाहिनी, मध्यप्रदेश की महिला मंडल अध्यक्ष एवं पूर्व प्राध्यापक समाजशास्त्र वर्षा मेहता ने सामाजिक न्याय और आर्थिक न्याय के बीच संतुलन की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
उन्होंने सवाल उठाया कि परिस्थितियों के अनुसार नागरिक की पहचान और प्राथमिकताएं किस तरह बदल जाती हैं। उनके अनुसार, टैक्स चुकाते समय व्यक्ति सबसे पहले भारतीय नागरिक होता है, चुनाव के समय कई बार जातीय, सामाजिक या धार्मिक पहचान प्रमुख हो जाती है और सरकारी योजनाओं, आरक्षण तथा अन्य सुविधाओं का लाभ लेते समय पात्रता एवं वर्ग के आधार पर अधिकार की बात सामने आती है। उन्होंने इसे नागरिक चेतना से जुड़ा व्यापक विषय बताया।
सामाजिक न्याय के साथ पारदर्शिता भी जरूरी
वर्षा मेहता ने कहा कि सामाजिक न्याय की नीतियों का उद्देश्य उन वर्गों को अवसर उपलब्ध कराना है, जो ऐतिहासिक रूप से शिक्षा और विकास के समान अवसरों से वंचित रहे हैं। उच्च शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में अवसरों का विस्तार इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की व्यवस्था के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्तियों और अन्य सुविधाओं का लाभ वास्तविक पात्र एवं जरूरतमंद लोगों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचे। उनका कहना है कि सामाजिक न्याय का उद्देश्य किसी एक वर्ग को दूसरे के विरुद्ध खड़ा करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना होना चाहिए जिसमें ऐतिहासिक वंचना दूर करने के साथ आर्थिक रूप से कमजोर और वास्तविक जरूरतमंद लोगों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिले।
सक्षम परिवारों से सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की अपील
मेहता ने कहा कि सामाजिक न्याय को लेकर केवल सरकार और व्यवस्था से सवाल करना पर्याप्त नहीं है। समाज के सक्षम परिवारों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। जिन परिवारों के पास शिक्षा, संसाधन और अवसर उपलब्ध हैं, वे आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की मदद कर सामाजिक समरसता को मजबूत कर सकते हैं।
उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की पढ़ाई, पुस्तकों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, मार्गदर्शन और रोजगारपरक प्रशिक्षण में सहयोग को समाजसेवा और राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि किसी जरूरतमंद बच्चे को आगे बढ़ने का अवसर देना भी समाज के प्रति महत्वपूर्ण योगदान है।
अधिकारों के साथ कर्तव्यों को भी महत्व
वर्षा मेहता ने कहा कि नागरिकों को सरकार से शिक्षा, रोजगार, योजनाओं और सुविधाओं की अपेक्षा रखने का अधिकार है, लेकिन राष्ट्र निर्माण में योगदान देना उनका कर्तव्य भी है। उन्होंने मतदान के दौरान जाति, धर्म और व्यक्तिगत हित से आगे बढ़कर नीति, योग्यता, जनहित और विकास जैसे विषयों पर विचार करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि किसी वर्ग को कटघरे में खड़ा करने के बजाय सभी वर्गों को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझने की जरूरत है। सरकार की जिम्मेदारी व्यवस्था को पारदर्शी और न्यायपूर्ण बनाने की है, पात्र नागरिकों की जिम्मेदारी योजनाओं का ईमानदारी से लाभ लेने की है और सक्षम समाज की जिम्मेदारी जरूरतमंद लोगों का सहयोग करने की है।
राष्ट्रहित को मिले समान महत्व
मेहता के अनुसार, नागरिकों की सामाजिक और व्यक्तिगत पहचान अलग-अलग हो सकती है, लेकिन राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी समान है। लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब अधिकारों के साथ कर्तव्य, सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक न्याय और व्यक्तिगत पहचान के साथ राष्ट्रहित को भी समान महत्व दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय का उद्देश्य अवसरों की समानता को मजबूत करना होना चाहिए, जबकि आर्थिक न्याय यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है कि संसाधनों और अवसरों से वास्तविक जरूरतमंद लोग भी वंचित न रहें। उनके अनुसार, सरकार, पात्र नागरिक और सक्षम समाज—तीनों की संयुक्त जिम्मेदारी से ही अधिक समावेशी और जिम्मेदार लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
— वर्षा मेहता
अध्यक्ष, महिला मंडल
श्री राष्ट्रीय परशुराम सेना युवा वाहिनी, मध्यप्रदेश, नागदा
पूर्व प्राध्यापक, समाजशास्त्र
