नागदा तीसरी-चौथी रेल पटरी सर्वे मार्ग का किसानों, ईंट भट्ठा संचालकों, श्रमिकों और व्यापारियों ने विरोध किया। नागदा जनहित समिति ने जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपकर वैकल्पिक मार्ग तलाशने की मांग की।
नागदा तीसरी-चौथी रेल पटरी सर्वे मार्ग का विरोध, जनप्रतिनिधियों को सौंपा ज्ञापन
नागदा से जीवनलाल जैन की रिपोर्ट
किसानों, ईंट भट्ठा संचालकों, श्रमिकों और व्यापारियों के हितों की रक्षा की मांग; वैकल्पिक मार्ग तलाशने की अपील
नागदा। नागदा तीसरी-चौथी रेल पटरी सर्वे मार्ग को लेकर क्षेत्र के किसानों, ईंट भट्ठा संचालकों, श्रमिकों एवं व्यापारियों में बढ़ती चिंता के बीच नागदा जनहित समिति ने 22 अगस्त 2026 को नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि संतोष ओपी गेहलोद, सांसद प्रतिनिधि प्रकाश जैन एवं भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष विजय पटेल को ज्ञापन सौंपा।
नागदा तीसरी-चौथी रेल पटरी सर्वे मार्ग पर क्यों है विरोध?
ज्ञापन में बताया गया कि रेलवे की सर्वे टीम द्वारा नवीन कृषि उपज मंडी नागदा की ओर से पहले गेट से रतन्याखेड़ी रोड, बेरछा रोड, जूना नागदा एवं गिंदवानिया होते हुए स्टेट हाईवे-17 स्थित गुरुकृपा ढाबे के समीप तक नवीन सर्वे निशान लगाए गए हैं। नए सर्वे मार्ग के सामने आने के बाद प्रभावित क्षेत्र के लोगों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
समिति ने कहा कि प्रस्तावित मार्ग से बड़ी संख्या में छोटे एवं सीमांत किसान प्रभावित हो सकते हैं। कई किसानों के पास महज 2 से 4 बीघा कृषि भूमि है, जो उनके परिवार की आजीविका का मुख्य आधार है। ऐसे में जमीन का हिस्सा रेल परियोजना में जाने पर किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होने के साथ परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो सकता है।
50 से अधिक ईंट भट्ठों पर असर की आशंका
ज्ञापन में क्षेत्र के 50 से अधिक ईंट भट्ठों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई। समिति के अनुसार नागदा एवं आसपास के करीब 60 गांवों के लगभग 15 हजार श्रमिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से ईंट भट्ठा व्यवसाय से जुड़े हैं।
समिति ने कहा कि नागदा तीसरी-चौथी रेल पटरी सर्वे मार्ग के कारण ईंट उद्योग प्रभावित हुआ तो हजारों श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो सकता है।
नवीन कृषि उपज मंडी की पहुंच प्रभावित होने की चिंता
ज्ञापन में नवीन कृषि उपज मंडी की पहुंच प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई। समिति ने कहा कि मंडी के समीप से रेल पटरी गुजरने पर किसानों को अपनी कृषि उपज मंडी तक लाने-ले जाने में परेशानी हो सकती है, जिसका असर कृषि व्यापार पर भी पड़ेगा।
वहीं सर्वे मार्ग के आसपास मध्यमवर्गीय व्यापारियों द्वारा वर्षों की जमा पूंजी से खरीदी गई जमीन एवं प्लॉट का मामला भी उठाया गया। समिति ने कहा कि प्रस्तावित रेल मार्ग से इन संपत्तियों पर असर पड़ने पर व्यापारियों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
रेल परियोजना का विरोध नहीं, वैकल्पिक मार्ग की मांग
नागदा जनहित समिति ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रवासी रेल परियोजना के विरोधी नहीं हैं। समिति का कहना है कि रेल विकास के साथ किसानों की जमीन, श्रमिकों का रोजगार और स्थानीय व्यापार के हितों की भी रक्षा होना जरूरी है।
ज्ञापन के माध्यम से नागदा तीसरी-चौथी रेल पटरी सर्वे मार्ग की पुनः समीक्षा कर ऐसा वैकल्पिक मार्ग निर्धारित करने की मांग की गई, जिससे क्षेत्र के लोगों को कम से कम नुकसान हो।
ज्ञापन का वाचन मोतीलाल प्रजापत ने किया।
ये लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर मनोज राठी, मोतीलाल प्रजापत, चेतन पाटीदार, भवानी सिंह देवड़ा, श्याम प्रजापत, लखन गुर्जर, अनुज कांठेड़, राजेंद्र रघुवंशी, मनीष चापलोद, शुभकरण सिंह चौधरी, मनीष कांठेड़, अक्षत जैन, विजय संघवी, नितिन जैन, दिनेश सेठिया, दीपक पाटीदार, कमलनयन जैन, हितेंद्र शुक्ला, जनक पुरोहित, करण जाट, मयंक चापलोद, राजेंद्र जैन, निर्मल कुमावत, राहुल शर्मा, हुकुम सिंह गोयल, संजय जायसवाल, राजेश जायसवाल, अशोक चौधरी, सुरेश चौधरी, मन्नालाल चौधरी और लक्ष्मण चौधरी आदि मौजूद थे।
यह जानकारी मीडिया प्रभारी चेतन पाटीदार ने दी।

