नागदा रेलवे सर्वे को लेकर भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट (IHRCT) ने प्रस्तावित रेलवे सर्वे पर रोक, जनसुनवाई और वैकल्पिक मार्ग की मांग की है। जानिए पूरी खबर और 7 प्रमुख मांगें।
नागदा रेलवे सर्वे को लेकर बढ़ी चिंता
नागदा रेलवे सर्वे को लेकर भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट (IHRCT) ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। ट्रस्ट का कहना है कि नगर के मध्य से प्रस्तावित नई रेलवे लाइन अथवा रेल फोरलेन का सर्वे यदि बिना जनसहमति के आगे बढ़ाया गया तो इससे शहर के व्यापार, कृषि, रोजगार, यातायात और भविष्य के शहरी विकास पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।ट्रस्ट ने इस विषय को जनहित से जुड़ा बताते हुए रेल मंत्रालय, रेलवे बोर्ड, पश्चिम मध्य रेलवे तथा मध्यप्रदेश शासन को ज्ञापन भेजकर प्रस्तावित सर्वे पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
IHRCT ने उठाए महत्वपूर्ण सवाल
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट का कहना है कि स्थानीय नागरिकों से मिली जानकारी के अनुसार प्रस्तावित रेलवे लाइन नगर के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों और कृषि उपज मंडी के समीप से गुजर सकती है।यदि ऐसा होता है तो—
- व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होंगी।
- किसानों को परेशानी होगी।
- आवागमन बाधित होगा।
- भविष्य का शहरी विस्तार प्रभावित हो सकता है।
- रोजगार पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
इसी कारण नागदा रेलवे सर्वे पर पुनर्विचार की मांग की जा रही है।
ट्रस्ट की 7 प्रमुख मांगें
- प्रस्तावित रेलवे सर्वे तत्काल रोका जाए।
- व्यापक जनसुनवाई कराई जाए।
- नगर के बाहर से वैकल्पिक मार्ग का परीक्षण किया जाए।
- व्यापारिक संगठनों की राय ली जाए।
- किसानों एवं नागरिकों से सुझाव लिए जाएं।
- पर्यावरणीय एवं सामाजिक प्रभाव का अध्ययन कराया जाए।
- अंतिम निर्णय जनहित को ध्यान में रखकर लिया जाए।
व्यापार और कृषि पर असर
यदि रेलवे लाइन शहर के बीच से गुजरती है तो—
- कृषि उपज मंडी प्रभावित हो सकती है।
- छोटे व्यापारियों का कारोबार घट सकता है।
- बाजारों में पहुंचना कठिन हो सकता है।
- भारी मालगाड़ियों से यातायात व्यवस्था प्रभावित होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परियोजनाओं में वैकल्पिक मार्ग का अध्ययन आवश्यक होता है।
रोजगार और युवाओं पर प्रभाव
IHRCT का कहना है कि नागदा औद्योगिक नगर है।यदि नई रेलवे लाइन के कारण औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं तो—
- स्थानीय रोजगार कम हो सकता है।
- छोटे उद्योग प्रभावित होंगे।
- परिवहन लागत बढ़ सकती है।
- भविष्य के निवेश पर असर पड़ सकता है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह यादव ने क्या कहा?
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह यादव ने कहा कि नागदा मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं रेलवे जंक्शन है।उन्होंने कहा—
“हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास ऐसा होना चाहिए जिससे जनता, व्यापारियों, किसानों और युवाओं के हित सुरक्षित रहें।”
उन्होंने यह भी कहा कि यदि परियोजना मुख्य रूप से मालगाड़ियों के संचालन के लिए है तो नगर के बाहर से वैकल्पिक मार्ग अधिक उपयुक्त हो सकता है।
अन्य पदाधिकारियों ने भी जताई चिंता
राष्ट्रीय सचिव शिवम तिवारी, संस्थापक मालती सुनील सिंह यादव, राष्ट्रीय संयोजक प्रेम कुमार वैद्य, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कृष्णा यादव, राष्ट्रीय विधिक सलाहकार इंदरजीत सिंह चौहान, राष्ट्रीय महासचिव साधना सेठी, प्रदेश अध्यक्ष महेश कुमार वर्मा, प्रदेश सचिव अनीता दुबे, राज्य मीडिया प्रभारी जीवनलाल जैन ‘चाय वाले’, जिला अध्यक्ष प्रमोद जैन, युवराज सिंह राठौर, रामवेश सिंह राजावत तथा मनीष गुप्ता ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि विकास कार्य जनता की सहमति और क्षेत्र के दीर्घकालीन हितों को ध्यान में रखकर ही किए जाने चाहिए।
जनप्रतिनिधियों से अपील
ट्रस्ट ने सभी—
- जनप्रतिनिधियों
- व्यापारिक संगठनों
- किसान संगठनों
- सामाजिक संस्थाओं
- आम नागरिकों
से अपील की है कि वे लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से नागदा के हितों की रक्षा हेतु अपनी आवाज उठाएं।
ट्रस्ट ने क्या स्पष्ट किया?
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी विकास परियोजना का विरोध नहीं कर रहा है।ट्रस्ट केवल यह चाहता है कि—
- विकास हो।
- जनता सुरक्षित रहे।
- व्यापार प्रभावित न हो।
- किसानों का नुकसान न हो।
- रोजगार सुरक्षित रहें।
- वैकल्पिक मार्गों का अध्ययन किया जाए।
- जनसुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाए।
निष्कर्ष
नागदा रेलवे सर्वे को लेकर उठी यह मांग अब केवल एक प्रशासनिक विषय नहीं बल्कि जनभावनाओं से जुड़ा मुद्दा बनती जा रही है। यदि प्रस्तावित रेलवे लाइन से व्यापार, कृषि, रोजगार और शहर के विकास पर प्रभाव पड़ने की आशंका है, तो व्यापक जनसुनवाई और वैकल्पिक मार्गों का परीक्षण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए। विकास परियोजनाओं का उद्देश्य नागरिकों की सुविधा और क्षेत्रीय प्रगति होना चाहिए, इसलिए अंतिम निर्णय से पहले सभी पक्षों की राय लेना आवश्यक माना जा रहा है।

