Pragati Project ने जगाई नई उम्मीद, नागदा में बालिका शिक्षा को मिला नया आधार
एजुकेट गर्ल्स फाउंडेशन, ग्रेसिम जनसेवा ट्रस्ट और एड-एट-एक्शन संस्था के संयुक्त प्रयास से नागदा क्षेत्र के 26 गाँवों में संचालित “ Pragati Project” ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में नई उम्मीद लेकर आई है। जून 2025 से शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य उन बालिकाओं और महिलाओं को फिर से शिक्षा से जोड़ना है, जिनकी पढ़ाई किन्हीं कारणों से बीच में छूट गई थी।
इस परियोजना के तहत 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 600 शिक्षार्थियों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है। सभी प्रतिभागियों को गाँव स्तर पर विशेष शिक्षण कैंपों के माध्यम से 10वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी कराई जा रही है। योजना के अनुसार, ये सभी शिक्षार्थी जून 2026 में मध्यप्रदेश राज्य मुक्त विद्यालय शिक्षा बोर्ड की परीक्षा में शामिल होंगी।
उच्च स्तरीय टीम ने किया नागदा परियोजना का दौरा
हाल ही में इस परियोजना का निरीक्षण करने के लिए गायत्री नायर लोबो (सीईओ, एजुकेट गर्ल्स), डायरेक्टर ऑपरेशन विक्रम सोलंकी (राजस्थान), स्टेट ऑपरेशन हेड रंजीत नाथ (भोपाल) और मैनेजर पार्टनरशिप विपिन बहादुर ने नागदा का दौरा किया।
भ्रमण के दौरान टीम ने परमारखेड़ी और टकरावदा के शिक्षण केंद्रों का अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान शिक्षण व्यवस्था, छात्रों की उपस्थिति और पढ़ाई की गुणवत्ता का विस्तार से मूल्यांकन किया गया। अधिकारियों ने शिक्षण केंद्रों में चल रही गतिविधियों को सकारात्मक और प्रभावशाली बताया।
शिक्षा से फिर जुड़ीं ग्रामीण बालिकाएँ
परियोजना के तहत चयनित शिक्षार्थियों ने बताया कि उनकी पढ़ाई कई कारणों से बीच में रुक गई थी। कम उम्र में विवाह, विद्यालय की दूरी, पारिवारिक जिम्मेदारियाँ और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति सीमित जागरूकता इसके प्रमुख कारण रहे।
लेकिन इस परियोजना ने उन्हें फिर से शिक्षा की ओर लौटने का अवसर दिया है। शिक्षार्थियों ने बताया कि अब वे नियमित रूप से कक्षाओं में भाग ले रही हैं और अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
महिला प्रेरिकाओं की अहम भूमिका
इस परियोजना के सफल संचालन के लिए 26 महिला प्रेरिकाओं का चयन किया गया है। ये प्रेरिकाएँ अपने-अपने गाँवों में प्रतिदिन तीन घंटे की कक्षाएँ संचालित कर रही हैं।
प्रेरिका जागु गुर्जर और सपना गुर्जरवाडिया ने बताया कि कई बार ग्रामीण परिवारों के बाहर चले जाने या अन्य कारणों से शिक्षार्थियों को जोड़कर रखना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन परियोजना टीम के सहयोग से यह कार्य लगातार सफलतापूर्वक किया जा रहा है।
पुस्तकालयों ने बदली पढ़ाई की दिशा
ग्रेसिम जनसेवा ट्रस्ट द्वारा स्थापित पुस्तकालयों ने इस परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन पुस्तकालयों ने शिक्षार्थियों में पढ़ने, समझने और विचार व्यक्त करने की क्षमता विकसित करने में मदद की है।
इसके माध्यम से छात्रों को विषयों को बेहतर तरीके से समझने और आत्मविश्वास के साथ परीक्षा की तैयारी करने में सहायता मिली है।
5000 से अधिक बच्चों तक पहुंचा शिक्षा अभियान
एड-एट-एक्शन परियोजना प्रबंधक आलोक कैलाश मिश्रा ने बताया कि ग्रेसिम के सहयोग से संचालित शिक्षा परियोजनाओं के तहत अब तक 5000 से अधिक बच्चों के साथ काम किया जा चुका है।
इन प्रयासों के परिणामस्वरूप बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में सुधार, स्कूल उपस्थिति में वृद्धि और समुदाय में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों के लिए विशेष अवसर
परियोजना के तहत एक विशेष प्रोत्साहन योजना भी बनाई गई है। जिन शिक्षार्थियों को 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त होंगे, उन्हें 5 दिसंबर को आयोजित एजुकेट गर्ल्स फाउंडेशन डे के अवसर पर मुंबई भ्रमण का अवसर मिलेगा।
यह पहल विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का कार्य कर रही है और उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों की सराहना
निरीक्षण के बाद गायत्री नायर लोबो सहित पूरी टीम ने परियोजना के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षार्थियों का उत्साह, उनकी नियमित उपस्थिति और सीखने की प्रतिबद्धता बेहद प्रेरणादायक है।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि यह परियोजना ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल के रूप में उभर रही है।
निष्कर्ष
“प्रगति परियोजना” न केवल ग्रामीण बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव की एक बड़ी पहल भी है। एजुकेट गर्ल्स फाउंडेशन, ग्रेसिम जनसेवा ट्रस्ट और एड-एट-एक्शन संस्था के संयुक्त प्रयासों से यह स्पष्ट हो रहा है कि सही दिशा में किए गए प्रयास ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
यह परियोजना आने वाले समय में हजारों बेटियों के लिए शिक्षा और आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त करने की क्षमता रखती है।
