नागेश्वर तीर्थ से नीमच की ओर द्वय मुनि भगवंतों का मंगल विहार जारी
नागदा चातुर्मास सम्पन्न, 300 से अधिक गुरुभक्तों के साथ आलोट से नागेश्वर परमरस तीर्थ स्पर्शना
नागदा (ब्रजेश बोहरा)।
जैन धर्मसंस्कृति में चातुर्मास का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। इसी पावन परंपरा के अंतर्गत युगप्रभावक पुण्यसम्राट् गुरुदेव श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा के शिष्य—द्विशतावधानी मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. एवं मुनिराज श्री पवित्ररत्न विजयजी म.सा. आदि ठाणा का ऐतिहासिक चातुर्मास नागदा के शांतिनाथ जिनालय में पंचान्हिका महोत्सव के साथ संपन्न हुआ। चार माह तक चले आध्यात्मिक साधना, प्रवचन, तप, स्वाध्याय तथा नैतिक जागरण के इस क्रम ने नगर में अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया।
आलोट से नागेश्वर परमरस तीर्थ स्पर्शना हेतु भव्य पैदल संघ
चातुर्मास की पूर्णाहुति के बाद द्वय मुनि भगवंत नागदा से रूपेटा और महिदपुर रोड होते हुए आलोट पहुँचे। आलोट से आगे नागेश्वर परमरस तीर्थ स्पर्शना के शुभ अवसर पर अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद, नागदा के तत्वावधान में लाभार्थी परिवारों द्वारा एक भव्य पैदल संघ का आयोजन किया गया।
इस पदयात्रा में 300 से अधिक गुरुभक्तों ने पावन उत्साह के साथ सहभागिता की। श्रद्धालुओं द्वारा पूरे मार्ग में जयकार, भक्ति गीत, वंदन और तीर्थ भक्ति के अद्भुत दृश्य देखने को मिले। पैदल संघ ने मुनि भगवंतों के चरणों में समर्पित भक्ति, विनय और त्याग की परंपरा को जीवंत किया।
संघ के मार्ग में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह जल, नाश्ता, सेवाओं की व्यवस्थाएँ कर मुनि भगवंतों का भावपूर्वक स्वागत किया। तीर्थ स्पर्शना के दौरान भक्तजनों ने यह माना कि ऐसे पुण्य अवसर जीवन में दुर्लभ होते हैं, जब साधु–संघ के साथ तीर्थ स्पर्शना का सौभाग्य प्राप्त हो।
गुरूसप्तमी पर्व हेतु नीमच की ओर मंगल विहार
नागेश्वर परमरस तीर्थ की स्पर्शना के पश्चात द्वय मुनि भगवंतों का मंगल विहार अब नीमच दिशा की ओर अग्रसर है। यह विहार विशेष रूप से गुरूसप्तमी पर्व के अंतर्गत आयोजित त्रिदिवसीय महोत्सव में निश्रा प्रदान करने हेतु संपन्न हो रहा है। गुरूसप्तमी पर्व—गुरुवर श्रीमद् विजय राजेन्द्र सूरीश्वरजी महाराजा की जन्म एवं स्वर्गारोहण तिथि—जैन समाज में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति से मनाया जाने वाला उत्सव है।
मुनि भगवंतों का यह विहार न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में नैतिकता, संयम, करुणा एवं आध्यात्मिक जागरण का संदेश भी लगातार प्रसारित कर रहा है।
निर्धारित विहार मार्ग एवं रात्रि विश्राम
परिषद के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा ने जानकारी दी कि द्वय मुनि भगवंतों का विहार आलोट से आगे नीमच की दिशा में सौभाग्यशाली ग्रामों को अनुगृहीत करता हुआ आगे बढ़ रहा है। विहार का निर्धारित कार्यक्रम इस प्रकार है—
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9 दिसंबर – पिपलिया सिसोदिया
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10 दिसंबर – बरखेड़ा एवं मानपुर में रात्रि विश्राम
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11 दिसंबर – जहाज मंदिर होते हुए सितामऊ में मंगल प्रवेश
इन तीन दिनों के दिगंबर–दर्शन व श्रमण परंपरा के दिव्य दर्शन से समूचा क्षेत्र अध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो रहा है। मार्ग के सभी ग्रामजन मुनि भगवंतों के स्वागत, वंदन और आशीर्वाद प्राप्ति के लिए अत्यंत उत्साहित हैं।
विहार से क्षेत्रभर में फैल रही आध्यात्मिक ऊर्जा
द्वय मुनि भगवंतों के इस मंगल विहार का प्रभाव संपूर्ण क्षेत्र में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। जहाँ-जहाँ से विहार गुजर रहा है, वहाँ समाज जन और श्रद्धालु बड़े भाव से उपस्थित होकर धर्म–लाभ ले रहे हैं।
विहार के दौरान मुनि भगवंतों द्वारा—
- अहिंसा
- संयम
- आत्मशुद्धि
- सज्जनता
- नशामुक्ति
- नैतिक मूल्य
जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रेरणादायी संदेश दिए जा रहे हैं। इससे युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठजनों में धर्म के प्रति गहरा उत्साह उत्पन्न हो रहा है।
नागदा चातुर्मास की विशेष उपलब्धियाँ
नागदा में बीते चार महीनों में—
- प्रतिदिन प्रवचन
- नियम-तप
- सामूहिक पूजा-अर्चना
- प्रेरणादायी शिक्षाओं
- पंचान्हिका महोत्सव
- शांतिनाथ भगवान की विशेष विधान
ने समाज में आध्यात्मिक चेतना का संचार किया।
स्थानीय जैन समाज ने चातुर्मास की सफल व्यवस्था कर एक मिसाल प्रस्तुत की। क्षेत्रीय समाज जन का मानना है कि इतने प्रभावपूर्ण चातुर्मास के पश्चात मुनि भगवंतों का विहार पथ समाज को नई दिशा और नवीन ऊर्जा प्रदान कर रहा है।
क्षेत्र के लिए सौभाग्य का अवसर
नीमच की ओर बढ़ता यह विहार आने वाले दिनों में कई गाँवों व नगरों को आध्यात्मिक सौभाग्य प्रदान करेगा। गुरूसप्तमी पर्व के साथ यह विहार और अधिक मंगलमय बनेगा तथा समाज को गुरुभक्ति, त्याग, सत्य और संयम की प्रेरणा देगा।
यह यात्रा जैन श्रमण परंपरा की गौरवशाली छवि को नए युग में पुनर्स्थापित कर रही है।
संवाददाता: जीवनलाल जैन, नागदा


