इंदौर एमवाय हॉस्पिटल ‘चूहा कांड’: हाईकोर्ट की सख्ती, जिम्मेदारों पर कार्रवाई, कंपनी पर जुर्माना और शुरू हुआ “ऑपरेशन रेट किल”
इंदौर का एमवाय हॉस्पिटल एक बार फिर विवादों में है। हाल ही में यहां नवजात शिशुओं को चूहों के काटने से मौत के मामले ने पूरे देश ही नहीं, विदेशों तक सनसनी फैला दी। अस्पताल की लापरवाही ने इंदौर जैसी स्वच्छता में नंबर वन शहर की छवि को गहरी चोट पहुंचाई है। अब इस पूरे मामले पर प्रशासन, न्यायालय और राजनीति—तीनों स्तर पर हलचल तेज़ हो गई है।
🔎 उच्च न्यायालय की सख्ती
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस घटना को गंभीर लापरवाही मानते हुए राज्य सरकार से 15 सितंबर तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने साफ कहा है कि यह केवल एक अस्पताल की गलती नहीं बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की नाकामी है। कोर्ट ने पूछा है कि वार्डों तक चूहों की एंट्री आखिर किन परिस्थितियों में हुई और किसकी ज़िम्मेदारी तय की जाएगी।
🚨 जिम्मेदारों पर त्वरित कार्रवाई
घटना सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया।
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पैडियाट्रिक सर्जरी विभाग के HOD को निलंबित कर दिया गया।
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अधीक्षक को 15 दिन का अनिवार्य अवकाश भेजा गया है ताकि निष्पक्ष जांच में कोई हस्तक्षेप न हो।
यह कार्रवाई यह संकेत देती है कि सरकार अब सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों को बख्शने के मूड में नहीं है।
🏢 प्राइवेट कंपनी पर जुर्माना और नोटिस
अस्पताल की सफाई, सुरक्षा और पेस्ट कंट्रोल का ठेका संभाल रही Agile कंपनी को भी कठघरे में खड़ा किया गया है।
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कंपनी पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया गया है।
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साथ ही, उसका कांट्रैक्ट समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
यह कदम साफ करता है कि केवल सरकारी कर्मचारियों पर ही नहीं बल्कि प्राइवेट ठेकेदारों पर भी सख्ती की जा रही है।
🐭 शुरू हुआ “ऑपरेशन रेट किल”
अस्पताल प्रशासन ने चूहों की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए “ऑपरेशन रेट किल” शुरू किया है।
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पेस्ट कंट्रोल की टीम को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है।
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अस्पताल परिसर की CCTV कैमरों से निगरानी की जा रही है।
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वार्डों के निरीक्षण के लिए डॉक्टरों और स्टाफ की विशेष टीम भी तैनात की गई है।
यह कदम देर से ही सही, लेकिन इस बात का सबूत है कि अब अस्पताल प्रशासन स्थिति की गंभीरता को समझ रहा है।
🏛️ उप मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक
मामले की गंभीरता को देखते हुए उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला खुद इंदौर पहुंचे। उन्होंने अस्पताल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि—
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स्वच्छता और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
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किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में अस्पताल की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नियमित निगरानी की जाएगी।
⚖️ राजनीतिक दबाव और सवाल
इस घटना ने राजनीतिक हलचल भी तेज कर दी है।
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कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए मांग की है कि जिम्मेदारों पर गैर-इरादी हत्या (Culpable Homicide) का मुकदमा चलाया जाए।
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विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन ने पहले घटना को छिपाने की कोशिश की और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर अब भी पारदर्शिता नहीं है।
यह विवाद अब केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का विषय भी बन चुका है।
🏚️ अस्पताल की संरचनात्मक खामियाँ
घटना के बाद जब जांच शुरू हुई तो कई भौतिक खामियाँ उजागर हुईं—
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वार्डों के आसपास की पाइपलाइन और दीवारों में बड़े छेद बने हुए थे, जिनसे चूहों को आसानी से प्रवेश मिला।
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बरसात के दिनों में पानी भरने से बने रास्ते चूहों के लिए सुरंग का काम कर रहे थे।
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मरीजों और परिजनों द्वारा लाए जाने वाले खाने-पीने के पैकेट भी चूहों को आकर्षित कर रहे थे।
इन खामियों ने साबित कर दिया कि केवल लापरवाही ही नहीं, बल्कि अस्पताल की मूलभूत संरचना में खामियां भी बड़ी वजह हैं।
✍️ निष्कर्ष
एमवाय हॉस्पिटल का यह “चूहा कांड” सिर्फ इंदौर ही नहीं बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक चेतावनी की घंटी है।
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जब स्वच्छता में नंबर-वन शहर का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल ही इस तरह की लापरवाही का शिकार हो, तो सवाल उठना लाज़मी है।
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अब ज़रूरी है कि इस मामले से सबक लिया जाए और अस्पताल की व्यवस्था, सफाई, सुरक्षा और जवाबदेही पर ठोस कदम उठाए जाएं।

