संगीतमय श्रीमद्भगवद्गीता कथा के तृतीय दिवस सती कथा सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
बाबूलाल शास्त्री जी ने भक्ति, त्याग और समर्पण का दिया संदेश, दक्ष प्रजापति के प्रसंग से अहंकार से बचने की सीख
प्रभातपट्टन। ब्लॉक के ग्राम बिसनूर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भगवद्गीता कथा के तृतीय दिवस कथा व्यास बाबूलाल शास्त्री जी ने माता सती की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। भगवान शिव और माता सती के प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को भक्ति, त्याग, समर्पण और संस्कारों का संदेश दिया।
कथा के दौरान शास्त्री जी ने कहा कि माता सती का जीवन निष्ठा और समर्पण का प्रतीक है। उनके जीवन प्रसंगों से व्यक्ति को भक्ति के साथ त्याग और समर्पण की भावना की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि धार्मिक कथाएं मनुष्य को जीवन में सही मार्ग पर चलने और संस्कारों को मजबूत करने की सीख देती हैं।

अहंकार को बताया पतन का कारण
दक्ष प्रजापति के प्रसंग का वर्णन करते हुए बाबूलाल शास्त्री जी ने कहा कि अहंकार मनुष्य के पतन का सबसे बड़ा कारण बन सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से विनम्रता, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि कथा सुनने का उद्देश्य केवल धार्मिक प्रसंगों को जानना नहीं, बल्कि उनसे मिलने वाली सीख को अपने जीवन में उतारना है। व्यक्ति यदि कथा के संदेश को अपने आचरण में शामिल करे तो उसका जीवन अधिक संस्कारित और सकारात्मक बन सकता है।
भजनों और जयकारों से गूंजा कथा पंडाल
माता सती की कथा के भावपूर्ण प्रसंगों के दौरान कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। भजनों और भगवान के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया।
कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष लगाए। श्रद्धालुओं ने कथा में शामिल होकर धर्मलाभ लिया।
