मुनिश्री सुधा सागरजी प्रवचन Indore में गुरु और शिष्य के संबंध का महत्व बताते हुए कहा कि जिसके जीवन में गुरु नहीं, उसका जीवन शुरू नहीं। धर्मसभा में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
रिपोर्ट: राजेश जैन दद्दू, indore
गुरु के बिना जीवन शुरू नहीं, गुरु की संपत्ति पर शिष्य का अधिकार: मुनिश्री सुधा सागरजी
Indore। मुनिश्री सुधा सागरजी प्रवचन इंदौर में गुरु और शिष्य के पवित्र संबंध पर प्रकाश डालते हुए मुनिश्री ने कहा कि जिसके जीवन में गुरु नहीं, उसका जीवन शुरू नहीं। गुरु वह होता है जो सब जानता है। शिष्य गुरु के पास इसलिए आता है कि उसके पास जो नहीं है, उसे जान सके और प्राप्त कर सके।
मुनिश्री ने कहा कि कोई स्वप्न में भी अपने गुरु एवं मां को कभी अज्ञानी न माने, क्योंकि गुरु और मां सब जानते हैं। उन्होंने कहा कि जो पंच परमेष्ठी को मानते हैं, लेकिन उनकी बात नहीं मानते, ऐसे लोगों का कभी कल्याण नहीं होता।
मुनिश्री सुधा सागरजी ने बताया साधु और गुरु में अंतर
मुनिश्री सुधा सागरजी प्रवचन Indore के दौरान साधु और गुरु में अंतर बताते हुए मुनिश्री ने कहा कि साधु को नमोस्तु करो तो आशीर्वाद मिलेगा। साधु को साधु की दृष्टि से एवं गुरु को गुरु की दृष्टि से देखो। गुरु को नमोस्तु करोगे तो तुम्हें आशीर्वाद के साथ गुरु की वसीयत भी मिलेगी।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार पिता एक होता है, चाचा अनेक हो सकते हैं, लेकिन वसीयत पिता लिखते हैं, चाचा नहीं। उसी प्रकार साधु भी अनेक होते हैं, लेकिन गुरु एक होता है। पिता की संपत्ति पर पुत्र का अधिकार होता है, लेकिन गुरु की संपत्ति पर शिष्य का अधिकार होता है।
शिष्य ही साधु को बनाता है गुरु
मुनिश्री ने कहा कि पिता स्वयं पिता नहीं बनता, बेटा पिता बनाता है। साधु की दीक्षा होती है, गुरु की नहीं। साधु किसी को गुरु नहीं बनाते, बल्कि शिष्य साधु को गुरु बनाते हैं। मुनिश्री के इन प्रेरक प्रवचनांशों को धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक सुना।
महिला मंडल ने किया भक्तिमय मंगलाचरण
प्रवचन के पूर्व सेत वाल महिला मंडल ने नृत्य एवं भक्तिमय मंगलाचरण किया। डॉक्टर जैनेंद्र जैन, मुक्ता, राजेश जैन दद्दू एवं लोहारी वाला सेठ परिवार ने मुनिश्री के समक्ष रजत भक्ति कलश स्थापित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।धर्मसभा में रानी डोषी, मुक्ता जैन, सोनाली बागड़िया, हर्ष जैन, विपुल बाझल, भूपेंद्र जैन, आकाश कोयला परिवार, अखिलेश, अरविंद सोधिया, श्रुत जैन आदि समाज श्रेष्ठी उपस्थित थे। धर्मसभा का संचालन अनुराग जैन ने किया।
