मुनिराज प्रत्यक्ष रत्न विजय जी महाराज साहब आदि ठाणा का नगर में भव्य मंगल प्रवेश
गुरुदेव के जयकारों से गुंजायमान हुआ महिदपुर क्षेत्र, धर्म–भक्ति की धारा में डूबा समाज
मंगलवार सुबह महिदपुर रोड–नागदा क्षेत्र धर्म और भक्ति की अद्भुत ऊर्जा से भर उठा, जब वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्रीमद् विजय नित्यसेन सुरीश्वर जी म.सा एवं आचार्य देवेश श्रीमद् विजय जयरत्न सुरीश्वर जी म.सा के आज्ञानुवर्ती, पूज्य मुनिराज श्री प्रत्यक्ष रत्न विजय जी म.सा एवं मुनि श्री पवित्ररत्न विजय जी म.सा आदि ठाणा का नगर में अत्यंत भव्य मंगल प्रवेश हुआ।
गुरुदेव के स्वागत में निकला भव्य जुलूस धर्म–भक्ति, अनुशासन और जयकारों से इस तरह गुंजायमान था कि पूरा नगर मानो आध्यात्मिक बयार से सराबोर हो उठा।
नागदा चौराहा से शुरू हुआ भव्य मंगल प्रवेश जुलूस
सुबह 9 बजे अजीत बोथरा निवास से आरंभ हुआ मंगल प्रवेश जुलूस अपनी भव्यता के कारण आकर्षण का केंद्र बना रहा।
ढोल–नगाड़ों की मंगल ध्वनि, पुष्पवर्षा और समाजजनों के आनंदित चेहरों ने वातावरण को उत्साहपूर्ण बना दिया।
जगह–जगह समाजजन गुरुदेव की गहुली कर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे थे।
महिलाओं की मंगल कलश यात्रा ने बढ़ाई शोभा
समाज की महिलाएं अपने पारंपरिक, आकर्षक वेशभूषा में मस्तक पर मंगल कलश धारण कर जुलूस में शामिल हुईं।
उनकी मंगल कलश यात्रा ने जुलूस की पवित्रता, गरिमा और आध्यात्मिक ऊर्जा को और अधिक बढ़ा दिया।
रास्ते-भर “गुरुदेव की जय”, “जय हो प्रत्यक्ष रत्न विजय जी” जैसे जयघोषों से नगर का हर मार्ग गूंज उठा।
श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में धर्म सभा में परिवर्तित हुआ जुलूस
मुख्य मार्गों का भव्य परिभ्रमण करते हुए जुलूस जैसे ही श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर पहुंचा, वह पावन प्रवचन सभा में परिवर्तित हो गया।
सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में आयोजित यह धर्मसभा जैन समाज के लिए अविस्मरणीय क्षण रही।
मुनिराज श्री प्रत्यक्ष रत्न विजय जी म.सा का प्रेरक प्रवचन
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य मुनिराज श्री प्रत्यक्ष रत्न विजय जी म.सा ने कहा—
“अनंतानंत योनियों में भटकने के बाद अत्यंत दुर्लभता से हमें मानव जीवन प्राप्त हुआ है।
इस मानव जन्म को धर्म–ध्यान, सदाचार और परमात्मा भक्ति से सार्थक करना ही हमारा कर्तव्य है।”
उन्होंने जीवन की असारता, कर्म सिद्धांत, संयम मार्ग एवं तप–ध्यान की महिमा पर प्रकाश डाला।
गुरुदेव ने समझाया कि मनुष्य जीवन केवल भोग के लिए नहीं, बल्कि मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होने का एक दुर्लभ अवसर है।
सभा में उपस्थित हर व्यक्ति गुरुदेव के ओजस्वी वचनों से भावविभोर हो गया।
चातुर्मास पूर्ण कर पहुंचे महिदपुर नगर में उल्लास और उत्साह
मुनिराज श्री नागदा नगर में यशस्वी चातुर्मास संपन्न कर अब महिदपुर रोड नगर में पधारे हैं।
गुरुदेव के आगमन से नगर में धार्मिक वातावरण और भी सशक्त हुआ है।
समाजजनों में इस बात को लेकर अपार उत्साह है कि आने वाले दिनों में पूरे नगर में धर्म, ध्यान और ज्ञान की गंगा निरंतर बहेगी।
प्रवचन समय – प्रतिदिन सुबह 9:30 से 10:30
प्रतिदिन प्रातःकाल आयोजित होने वाले प्रवचन सभी धर्मप्रेमियों के लिए आध्यात्मिक अमृत के समान होंगे।
परिषद परिवार, पंच–समिति, नवयुवक परिषद, महिला मंडल, बहू–परिषद, तरुण मंडल एवं बालिका परिषद—सभी वर्ग के समाजजनों ने गुरुदेव के आगमन का हर्षोल्लास से स्वागत किया।
अन्य संतों का भी मंगल आगमन
गुरुदेव के मंगल प्रवेश के साथ ही, विहार क्रम में पधारे
आचार्य जगत चंद्र सुरिश्वर जी म.सा के शिष्य रत्न ठाणा–2 एवं साध्वीजी म.सा ठाणा–12 का भी नगर में मंगल पदार्पण हुआ।
इन सभी संतों के आगमन से नगर का आध्यात्मिक वातावरण कई गुना अधिक प्रखर हो गया है।
जैन श्री संघ का आह्वान
जैन श्री संघ के अध्यक्ष अजय चोरड़िया ने समाज को संबोधित करते हुए कहा—
“गुरुदेव नगर में ज्ञान की गंगा के परम रस के लिए पधारे हैं।
समाज के प्रत्येक सदस्य को अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर जिनवाणी श्रवण अवश्य करना चाहिए।”
उन्होंने बताया कि यह अवसर अत्यंत दुर्लभ है और सभी को इसका लाभ लेना चाहिए।
कार्यक्रम की प्रमुख व्यवस्थाएं
अनेक परिवारों ने धर्मसभा की सेवा और व्यवस्था का लाभ लिया।
इसमें विशेष रूप से पीयूष कुमार, प्रकाशचंद चत्तर परिवार के द्वारा धार्मिक भक्ति और सेवा का सौभाग्य प्राप्त किया गया।
जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने संपूर्ण जानकारी साझा की।
संक्षेप में — नगर में धर्म, विनय और आनंद का अद्वितीय संगम
मुनिराज श्री प्रत्यक्ष रत्न विजय जी म.सा, पवित्र रत्न विजय जी म.सा एवं अन्य संतों के पावन आगमन ने महिदपुर रोड–नागदा क्षेत्र में आत्मिक ऊर्जा का संचार कर दिया है।
मंगल प्रवेश, प्रवचन, धर्मसभा और समाज का उत्साह—सभी मिलकर इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना रहे हैं।


