—Advertisement—

मुनि श्री विजय सागर जी की अंतिम डौल यात्रा: सुदामा नगर से मलयगिरी तीर्थ तक

Author Picture
Published On: 27 October 2025
WhatsApp Image 2025 10 27 at 6.57.42 AM

—Advertisement—

मुनि श्री विजय सागर जी की डौल यात्रा: सुदामा नगर से मलयगिरी तीर्थ तक अंतिम यात्रा संपन्न

इंदौर, 27 अक्टूबर 2025: जैन समाज के प्रतिष्ठित संत मुनि श्री विजय सागर जी की अंतिम डौल यात्रा रविवार को बड़ी भव्यता के साथ सम्पन्न हुई। मुनि श्री विजय सागर जी की समाधि आचार्य श्री विशद सागर एवं आचार्य श्री विभव सागर जी के मंगलमय सानिध्य में हुई। इस अवसर पर धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि अंतिम यात्रा सुदामा नगर जैन मंदिर से प्रारंभ होकर मलयगिरी तीर्थ तक अंतिम क्रिया विधिविधान के साथ संपन्न की गई।

सुदामा नगर में आचार्य श्री विशद सागर जी के शिष्य मुनि श्री विजय सागर जी का समाधि कल, 26 अक्टूबर की शाम 7 बजे हुई थी। इस पुण्य अवसर पर जैन समाज के समाजश्रेष्ठी, धर्माचार्य, और अनुयायी भारी संख्या में उपस्थित रहे। डौल यात्रा में प्रमुख रूप से पुलक्मंच के पदाधिकारी प्रदीप बड़जात्या, महेंद्र निगोतिया, राजेश जैन खाखरोड वाले, अर्पित जैन वाणी, राजेश जैन दद्दू, डॉ. राहुल जैन, अभय जी पाटोदी, अजित जैन, पवन मोदी, अर्पित बड़जात्या सहित कई समाजजन शामिल हुए।

अंतिम संस्कार की विधि पंडित नितिन झांझरी के मार्गदर्शन में मलयगिरी तीर्थ पर सम्पन्न कराई गई। इस अवसर पर मुनि श्री के ग्रहस्त जीवन के सैकड़ों रिश्तेदार और अनुयायी उपस्थित थे। उनके जीवन और साधु परंपरा के प्रति योगदान को याद करते हुए उपस्थित जनों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

WhatsApp Image 2025 10 27 at 6.57.41 AM 1

डौल यात्रा की शुरुआत सुदामा नगर से हुई, जहाँ आचार्य श्री विशद सागर जी एवं आचार्य श्री विभव सागर जी के सानिध्य में सभी आवश्यक क्रियाएं संपन्न की गईं। इसके पश्चात मुनि श्री विजय सागर जी का डोला दो साधुसंतों के साथ महू नाके से कालानी नगर एयरपोर्ट होते हुए मलयगिरी तीर्थ तक पहुँचाया गया। इस यात्रा में बैंड बाजे के साथ समाज के सदस्यों ने भव्य स्वागत और श्रद्धांजलि अर्पित की।

राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनि श्री विजय सागर जी का जीवन धर्म, साधुता और समाज सेवा का आदर्श रहा। उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन में जैन धर्म के मूल सिद्धांतों का पालन करते हुए समाज में सद्भाव और अध्यात्मिक चेतना का संचार किया। उनका योगदान जैन समाज के लिए अमूल्य है और उनकी शिक्षाएँ आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक रहेंगी।

मलयगिरी तीर्थ पर अंतिम संस्कार के दौरान उपस्थित समाजजन भावविभोर थे। लोगों ने मुनि श्री की पुण्य स्मृति में प्रार्थना की और उनके आदर्श जीवन का अनुसरण करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर उपस्थित सभी साधु-संतों और समाजजनोंने मिलकर मुनि श्री विजय सागर जी के जीवन और योगदान को श्रद्धांजलि दी।

मुनि श्री विजय सागर जी की अंतिम डौल यात्रा ने जैन समाज में एक विशेष भावनात्मक छाप छोड़ी। यह यात्रा न केवल उनके अनुयायियों के लिए बल्कि पूरे धर्म समाज के लिए एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद रहेगी। उनके जीवन के आदर्श और धर्मपरायणता को देखते हुए, इस यात्रा का आयोजन अत्यंत श्रद्धापूर्ण और भव्य रूप से किया गया।

WhatsApp Image 2025 10 27 at 6.57.41 AM

इस भव्य डौल यात्रा के आयोजन ने जैन धर्म और समाज के प्रति लोगों की आस्था को और अधिक सुदृढ़ किया। जैन समाज के विभिन्न प्रमुख स्थल, जैसे सुदामा नगर जैन मंदिर और मलयगिरी तीर्थ, इस यात्रा के प्रमुख स्थल रहे। समाजजनोंने इस अवसर पर मुनि श्री की शिक्षाओं और उनके जीवन दर्शन को याद करते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वाह करने का संकल्प लिया।

अंततः मुनि श्री विजय सागर जी की डौल यात्रा ने जैन समाज में एक नया अध्याय लिखा। उनकी समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए समाजजनोंने उनके योगदान और शिक्षाओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का संकल्प लिया।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp