किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन का सख्त कदम
Mungeli। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों के लिए खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में खाद भंडारण और वितरण व्यवस्था में लापरवाही पाए जाने पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर कुन्दन कुमार के निर्देश पर सहकारिता विभाग ने जिले की 21 सेवा सहकारी समितियों के 66 अधिकारी-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन अधिकारियों और कर्मचारियों पर निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप खाद का भंडारण एवं वितरण नहीं करने का आरोप है।
प्रशासन का मानना है कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं होने से खेती-किसानी का कार्य प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि खाद वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जा रहा है।
66 अधिकारी-कर्मचारियों से मांगा गया स्पष्टीकरण
सहकारिता विभाग द्वारा जारी नोटिस में संबंधित सेवा सहकारी समितियों के प्राधिकृत अधिकारियों, प्रभारी प्रबंधकों एवं कम्प्यूटर ऑपरेटरों से जवाब मांगा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि समितियों को पूर्व में खाद भंडारण और वितरण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन कई समितियां निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य करने में असफल रही हैं।
नोटिस में कहा गया है कि किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना समितियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके बावजूद खाद वितरण में अपेक्षित प्रगति नहीं होना संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की उदासीनता को दर्शाता है। विभाग ने सभी संबंधित कर्मचारियों को दो दिनों के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
विभाग ने लापरवाही को माना गंभीर मामला
सहायक आयुक्त सहकारिता एवं सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं, मुंगेली द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि खाद वितरण व्यवस्था में लापरवाही केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि किसानों के हितों से जुड़ा गंभीर विषय है।
अधिकारियों का कहना है कि खरीफ सीजन में धान, मक्का, सोयाबीन एवं अन्य फसलों की बुआई के लिए किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की आवश्यकता होती है। यदि समय पर खाद उपलब्ध नहीं होगी तो खेती प्रभावित होगी और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
यही वजह है कि विभाग ने इसे अनुशासनहीनता और कार्य के प्रति लापरवाही की श्रेणी में रखते हुए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर निलंबन की कार्रवाई
नोटिस में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि यदि संबंधित अधिकारी-कर्मचारी संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं करते हैं या खाद वितरण व्यवस्था में सुधार नहीं दिखाई देता है, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 के प्रावधानों के तहत प्राधिकृत अधिकारियों को उनके पद से हटाया जा सकता है। वहीं प्रभारी प्रबंधकों एवं कम्प्यूटर ऑपरेटरों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई भी की जा सकती है।
प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसानों के हितों के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जाएगा।
किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता
जिले में खरीफ सीजन को देखते हुए प्रशासन लगातार खाद की उपलब्धता और वितरण पर नजर बनाए हुए है। कलेक्टर कुन्दन कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को किसी भी परिस्थिति में खाद की कमी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने कहा है कि जिले के सभी सहकारी समितियों, उर्वरक विक्रेताओं और कृषि विभाग के अधिकारियों को समन्वय बनाकर कार्य करना होगा ताकि किसानों को निर्धारित समय पर उर्वरक मिल सके।
कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
90 से अधिक खाद विक्रय प्रतिष्ठानों का किया गया निरीक्षण
खाद वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए कृषि विभाग द्वारा लगातार निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। विभागीय जानकारी के अनुसार जिले में अब तक 90 से अधिक उर्वरक विक्रय प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया जा चुका है।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने खाद के भंडारण, वितरण, बिक्री रजिस्टर, मूल्य सूची, पॉश मशीन के उपयोग तथा किसानों को खाद वितरण की प्रक्रिया की जांच की।
कई स्थानों पर रिकॉर्ड में गड़बड़ी, वितरण में अनियमितता तथा अन्य नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए, जिसके बाद संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई।
29 खाद विक्रय केंद्रों को कारण बताओ नोटिस
निरीक्षण अभियान के दौरान अनियमितता पाए जाने पर जिले के 29 उर्वरक विक्रय केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इन केंद्रों से पूछा गया है कि उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई क्यों न की जाए।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं बल्कि व्यवस्था को सुधारना और किसानों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।
छह विक्रय केंद्रों पर लगाया गया प्रतिबंध
गंभीर अनियमितता पाए जाने पर प्रशासन ने छह उर्वरक विक्रय केंद्रों पर तत्काल प्रभाव से विक्रय प्रतिबंध लगा दिया है।
इन केंद्रों पर खाद वितरण संबंधी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। कुछ मामलों में रिकॉर्ड संधारण में गड़बड़ी मिली, जबकि कुछ स्थानों पर निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन पाया गया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक संबंधित केंद्र सभी नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं करेंगे, तब तक उनके खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।
कालाबाजारी और जमाखोरी पर प्रशासन की नजर
खाद की मांग बढ़ने के साथ ही कालाबाजारी और जमाखोरी की आशंका भी बढ़ जाती है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया है।
कलेक्टर के निर्देश पर विभिन्न टीमों का गठन किया गया है, जो लगातार बाजारों, सहकारी समितियों और निजी उर्वरक विक्रेताओं का निरीक्षण कर रही हैं।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था खाद की कालाबाजारी, अधिक मूल्य वसूली या कृत्रिम कमी पैदा करने का प्रयास करती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
खाद वितरण की पूरी व्यवस्था पर रखी जा रही नजर
उपसंचालक कृषि वीणा ठाकुर ने बताया कि निरीक्षण के दौरान खाद के स्टॉक, वितरण व्यवस्था और मूल्य निर्धारण की स्थिति का बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सभी विक्रय केंद्रों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसानों को शासन द्वारा निर्धारित दरों पर ही खाद उपलब्ध कराई जाए। किसी भी प्रकार की अतिरिक्त वसूली या अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी।
साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसानों को खाद वितरण में किसी प्रकार का भेदभाव न हो और सभी पात्र किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जाए।
किसानों को अफवाहों से बचने की सलाह
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खाद की कमी संबंधी अफवाहों पर विश्वास न करें। अधिकारियों का कहना है कि जिले में खाद का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा रही है।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे केवल अधिकृत विक्रय केंद्रों से ही उर्वरक खरीदें और किसी भी प्रकार की शिकायत होने पर तत्काल कृषि विभाग या जिला प्रशासन को सूचित करें।
वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग पर दिया जा रहा जोर
कृषि विभाग केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए भी प्रयास कर रहा है। किसानों को नील हरित शैवाल, हरी खाद और नैनो उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति में सुधार होता है और दीर्घकाल में कृषि उत्पादन भी बेहतर होता है।
कृषि अधिकारियों ने किसानों को समझाया कि संतुलित उर्वरक उपयोग से उत्पादन लागत कम हो सकती है और भूमि की गुणवत्ता भी बनी रहती है।
किसानों के हित सर्वोपरि
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों की रक्षा करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। खाद वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासन का उद्देश्य केवल दोषियों पर कार्रवाई करना नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे जिले के प्रत्येक किसान को समय पर और उचित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध हो सके।
आगे भी जारी रहेगा निरीक्षण अभियान
अधिकारियों ने बताया कि खाद वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए आगामी दिनों में भी औचक निरीक्षण जारी रहेंगे। सहकारी समितियों, निजी विक्रेताओं और संबंधित विभागीय अधिकारियों की नियमित निगरानी की जाएगी।
जिला प्रशासन को उम्मीद है कि इस कार्रवाई के बाद खाद वितरण व्यवस्था में सुधार आएगा और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकेगा।
खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन, सहकारिता विभाग और कृषि विभाग पूरी गंभीरता के साथ कार्य कर रहे हैं। यही कारण है कि मुंगेली जिले में खाद वितरण व्यवस्था को लेकर जवाबदेही तय करने की दिशा में यह कार्रवाई एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
