MP News: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने FD घोटाला मामले में दतिया कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा के साथ जमानत दी है। जानें पूरा मामला और अपील की अगली तारीख।
MP News: दतिया कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को FD घोटाला मामले में 3 साल की सजा, कोर्ट ने दी जमानत
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश (MP News) के दतिया विधानसभा क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है। दतिया कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट (MP-MLA Court) ने एक बड़े वित्तीय घोटाले में दोषी करार देते हुए 3 साल की सजा सुनाई है। हालांकि, सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद कोर्ट ने उन्हें जमानत भी दे दी, जिससे फिलहाल उनकी सदस्यता पर कोई तत्काल संकट नहीं आया है।
यह मामला सहकारी बैंक से जुड़े एफडी (FD) घोटाले से जुड़ा है, जिसमें विधायक पर साजिश रचकर सरकारी धन में हेराफेरी करने का आरोप था। कोर्ट ने मामले के सह-आरोपी रघुवीर शरण प्रजापति को भी तीन साल की सजा सुनाई है।
कोर्ट ने क्यों सुनाई 3 साल की सजा?
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि दतिया कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती पर आपराधिक साजिश (IPC 120B) के साथ-साथ धोखाधड़ी (IPC 420), जालसाजी (IPC 467, 468) और आपराधिक विश्वसनीयता के लिए जाली दस्तावेज का उपयोग (IPC 471) के आरोप पूरी तरह साबित होते हैं।कोर्ट ने कहा कि विधायक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक के नियमों को ताक पर रख दिया। इस मामले में करीब 2 करोड़ रुपये की एफडी (Fixed Deposit) के साथ छेड़छाड़ की गई थी। गवाहों और दस्तावेजी सबूतों के आधार पर कोर्ट ने दोनों दोषियों को तीन-तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
ब्रेकिंग: राउज एवेन्यू कोर्ट का कहना है कि दोषियों ने सार्वजनिक विश्वास को तोड़ा। यह सिर्फ बैंक का नुकसान नहीं, बल्कि जमाकर्ताओं के साथ धोखा है।
दतिया कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को क्यों मिली जमानत? {#2}
सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद ही विधायक के वकीलों ने जमानत याचिका दायर कर दी। कोर्ट ने दतिया कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड और एक मुचलके पर जमानत दे दी।जमानत देने का मुख्य कारण यह था कि विधायक ने घोषणा की कि वह इस सजा को उच्च न्यायालय (High Court) में चुनौती देंगे। कोर्ट ने उन्हें अपील दायर करने के लिए 30 दिन का समय दिया है। नियमानुसार, यदि 30 दिनों के भीतर हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलती है, तो सजा के आधार पर विधायक की सदस्यता पर संकट बन सकता है, लेकिन फिलहाल जमानत मिलने के कारण वह बाहर हैं।
FD घोटाला मामला क्या है? पूरी कहानी
यह पूरा मामला एक सहकारी बैंक से जुड़ा है। दतिया कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती पर आरोप है कि जब वह बैंक के निदेशक थे, तब उन्होंने बैंक कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति के साथ मिलकर फर्जी एफडी रसीदें तैयार कीं।
- घोटाले की तारीख: यह मामला 2012-13 का है।
- तरीका: आरोपियों ने बैंक के कंप्यूटर सिस्टम में हेराफेरी करके एफडी परिपक्वता (Maturity) से पहले ही पैसे निकाल लिए और रिकॉर्ड को फर्जी तरीके से सही दिखाया।
- पीड़ित: बैंक ऑफ इंडिया और अन्य जमाकर्ता संस्थान।
शुरुआती जांच में यह बात सामने आई थी कि विधायक ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर मामले को दबाने की कोशिश की, लेकिन जब मामला दिल्ली कोर्ट पहुंचा, तो सख्ती से सुनवाई हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों ट्रांसफर कराया था केस?
यह मामला कानूनी दृष्टि से बेहद दिलचस्प है क्योंकि शुरुआत में यह केस ग्वालियर की एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहा था। लेकिन खुद दतिया कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।उनकी याचिका में कहा गया कि मध्य प्रदेश में उन पर मुकदमा चलाने वाले अभियोजन अधिकारी और निचली अदालत पर तत्कालीन BJP सरकार के नेताओं का दबाव है। उन्होंने विशेष रूप से पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और उनके परिवार पर राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया था। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी इसी दलील को स्वीकार करते हुए मामले को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ट्रांसफर कर दिया था। यानी, जिस कोर्ट ने उन्हें सजा सुनाई, वह कोर्ट उन्हीं के अनुरोध पर आई थी।
राजनीतिक दबाव के आरोप और BJP कनेक्शन
विधायक राजेंद्र भारती ने हमेशा यह कहा है कि वह BJP के नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ खुलकर बोलने के कारण फंसाए जा रहे हैं। उन्होंने पूर्व मंत्री पर कई गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद से ही उनके खिलाफ एक के बाद एक मुकदमे दर्ज होते गए।हालांकि, इस मामले में सीबीआई (CBI) की जांच में विधायक की संलिप्तता के पुख्ता सबूत मिले थे। सीबीआई अदालत ने स्पष्ट कहा कि भले ही राजनीतिक प्रतिशोध हो, लेकिन फर्जी एफडी के दस्तावेज झूठ नहीं बोलते। फिलहाल, कांग्रेस ने अपने विधायक के समर्थन में बयान जारी करते हुए कहा है कि वह जल्द ही हाईकोर्ट से बरी हो जाएंगे।
आगे क्या? हाईकोर्ट में अपील की तैयारी
अब अगली लड़ाई दिल्ली हाईकोर्ट में होगी। दतिया कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के पास 30 दिन का समय है। इस दौरान वह यह साबित करने की कोशिश करेंगे कि ट्रायल कोर्ट ने उनके बचाव के पक्ष को ठीक से नहीं सुना।
- यदि हाईकोर्ट ने सजा पर रोक लगाई: तो विधायक बिना किसी परेशानी के अपना काम जारी रख सकेंगे।
- यदि हाईकोर्ट ने सजा बरकरार रखी: तो सजा के 3 साल के प्रावधान के तहत (Supreme Court के फैसले के अनुसार, यदि सजा 2 साल से अधिक हो तो सदस्यता तुरंत रद्द हो जाती है) उनकी विधानसभा सदस्यता चली जाएगी।
फिलहाल, जमानत मिलने के कारण राजेंद्र भारती जेल से बाहर हैं, लेकिन उनके राजनीतिक भविष्य पर लटकती तलवार अभी भी बरकरार है।
