MP बोर्ड परीक्षा शुल्क में वृद्धि 2026-27: छात्रों पर बढ़ा आर्थिक दबाव
MP माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बोर्ड परीक्षा और नामांकन शुल्क में वृद्धि का निर्णय लिया है। इस नए आदेश के तहत 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होने के लिए अधिक राशि जमा करनी होगी। यह कदम छात्रों के लिए आर्थिक दबाव बढ़ाने वाला है, लेकिन मंडल के अनुसार यह परीक्षा संचालन और तकनीक आधारित मूल्यांकन के बढ़ते खर्च को पूरा करने के लिए आवश्यक था।
परीक्षा शुल्क में बढ़ोतरी
मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा शुल्क में वृद्धि की है।
- 10वीं और 12वीं के नियमित छात्रों के लिए परीक्षा शुल्क 1,200 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये किया गया।
- स्वाध्यायी/Private छात्रों के लिए शुल्क अब 1,600 रुपये होगा।
- नामांकन शुल्क में भी 150 रुपये की वृद्धि की गई है और यह अब 500 रुपये हो गया।
माशिमं का कहना है कि तकनीक आधारित परीक्षाओं के कारण खर्च बढ़ा है और इस वृद्धि से छात्रों पर अत्यधिक बोझ नहीं पड़ेगा।
डुप्लीकेट अंकसूची और अन्य शुल्क
छात्रों के लिए डुप्लीकेट अंकसूची और निजी स्कूलों के संबद्धता शुल्क में भी वृद्धि हुई है।
- 10 वर्ष तक पुरानी डुप्लीकेट अंकसूची: 500 → 1,000 रुपये
- 10 वर्ष से अधिक पुरानी डुप्लीकेट अंकसूची: 600 → 1,200 रुपये
- निजी स्कूलों की 10वीं और 12वीं नई संबद्धता: 20,000 → 22,000 और 27,000 → 30,000 रुपये
- निजी स्कूलों की 10वीं और 12वीं नवीनीकरण शुल्क: 6,000 → 8,000 और 8,000 → 10,000 रुपये
इस वृद्धि का उद्देश्य बोर्ड की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना और गुणवत्ता वाले मूल्यांकन को बनाए रखना है।
मंडल की वित्तीय स्थिति
मध्यप्रदेश में हर वर्ष लगभग 16 लाख विद्यार्थी 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल होते हैं।
- इस शुल्क वृद्धि से मंडल को अनुमानित 54 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी।
- परीक्षा संचालन पर प्रतिवर्ष लगभग 60-70 करोड़ रुपये खर्च होते हैं।
- इसमें मानदेय वृद्धि, महंगाई भत्ता और सातवें वेतनमान के अतिरिक्त प्रभाव शामिल हैं।
मांडल को शासन से किसी प्रकार का बजट नहीं मिलता, जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ जाता है।
संबल योजना का व्यय
संबल योजना के तहत लगभग 4 लाख विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा में शामिल होते हैं।
- प्रति विद्यार्थी 1,200 रुपये खर्च होते हैं, जिससे कुल 48 करोड़ रुपये का व्यय होता है।
- यह राशि शासन द्वारा मंडल को नहीं दी जाती, इसलिए अतिरिक्त शुल्क से मंडल की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी।
पहले भी हुई थी वृद्धि
माशिमं ने पहले 2018 और 2023 में भी परीक्षा शुल्क बढ़ाया था।
- 2018 में शुल्क में वृद्धि हुई थी।
- 2023 में परीक्षा शुल्क 900 रुपये से बढ़ाकर 1,200 रुपये किया गया था।
- अब यह शुल्क बढ़कर 1,500 रुपये हो गया है।
इससे छात्रों पर पहले से बढ़ा हुआ आर्थिक दबाव और भी बढ़ गया है।
मंडल का बयान
बुद्धेश कुमार वैद्य, सचिव, माशिमं ने कहा:
“हाइटेक परीक्षा संचालन में खर्च अधिक होता है। इस कारण परीक्षा शुल्क बढ़ाया गया है। फिर भी प्रयास किया गया है कि परीक्षार्थियों पर अत्यधिक आर्थिक बोझ न पड़े।”
नया शुल्क सारणी
| शुल्क का प्रकार | पुराना शुल्क | नया शुल्क |
|---|---|---|
| परीक्षा शुल्क (नियमित) | ₹1,200 | ₹1,500 |
| परीक्षा शुल्क (स्वाध्यायी/Private) | ₹1,200 | ₹1,600 |
| नामांकन शुल्क | ₹350 | ₹500 |
| 10 वर्ष तक पुरानी डुप्लीकेट अंकसूची | ₹500 | ₹1,000 |
| 10 वर्ष से अधिक पुरानी डुप्लीकेट अंकसूची | ₹600 | ₹1,200 |
| निजी स्कूल 10वीं नवीन संबद्धता | ₹20,000 | ₹22,000 |
| निजी स्कूल 12वीं नवीन संबद्धता | ₹27,000 | ₹30,000 |
| निजी स्कूल 10वीं नवीनीकरण | ₹6,000 | ₹8,000 |
| निजी स्कूल 12वीं नवीनीकरण | ₹8,000 | ₹10,000 |
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने तकनीक आधारित मूल्यांकन और बढ़ते खर्च को देखते हुए परीक्षा शुल्क बढ़ाया है।
- यह छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव लाएगा।
- मंडल के लिए यह वित्तीय स्थिति मजबूत करने और उच्च गुणवत्ता वाली परीक्षा संचालन सुनिश्चित करने का कदम है।
- छात्रों और अभिभावकों को अब अपने बजट में इस बढ़ी हुई राशि को शामिल करना होगा।
इस निर्णय से बोर्ड की परीक्षा प्रक्रिया के सुधार और विद्यार्थियों के लिए सुविधाजनक मूल्यांकन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी, जबकि वित्तीय दबाव भी कुछ हद तक कम किया जाएगा।
