Ramesshwar Sharma on Congress Protest: भोपाल विधानसभा में ‘बंदर मास्क’ विवाद पर गरम हुई राजनीति | Madhya Pradesh Political News | MP Vidhan Sabha Winter Session
भोपाल: मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र तीसरे दिन कांग्रेस के आक्रामक प्रदर्शन और भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया का अखाड़ा बन गया।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने अनोखे अंदाज़ में विरोध प्रदर्शन कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। कांग्रेस के विधायक बंदर की शक्ल का मास्क पहनकर, हाथों में सांकेतिक उस्तरा और गले में “भाजपा सरकार” लिखी तख्तियाँ लटकाकर विधानसभा परिसर में पहुंचे। इसके बाद परिसर में नारे लगे—“बंदर सरकार का उस्तरा नहीं चलने देंगे!”
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार राज्य में स्वास्थ्य, किसान, भूमि, ओबीसी आरक्षण और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर लगातार उस्तरा चला रही है, यानी लोगों को नुकसान पहुँचा रही है। यही वजह है कि कांग्रेस ने भाजपा को “बंदर सरकार” करार दिया और कहा कि अब इस सरकार को “कंट्रोल” करने की जरूरत है।
कांग्रेस का अनोखा प्रदर्शन: ‘बंदर का मास्क और हाथ में उस्तरा’
उमंग सिंघार ने प्रदर्शन के दौरान कहा—
- “ये बंदर स्वास्थ्य पर उस्तरा चला रहा है।”
- “ये बंदर किसानों पर उस्तरा चला रहा है।”
- “ये बंदर जमीनों पर उस्तरा चला रहा है।”
- “ये बंदर ओबीसी आरक्षण को चोट पहुँचा रहा है।”
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सरकार हर वर्ग के अधिकारों को नष्ट कर रही है।
सिंघार ने तो यहां तक कहा कि—
“ये भाजपा सरकार का बंदर है, जिसे अब रोकना पड़ेगा।”
उन्होंने विधानसभा परिसर में मदारी और बंदर जैसा प्रतीकात्मक सीन भी क्रिएट किया, जिसने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया।
भाजपा का पलटवार: ‘लोकतंत्र का उपहास करना कांग्रेस की आदत’
कांग्रेस के प्रदर्शन के तुरंत बाद भाजपा ने भी कड़ा हमला बोला।
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए इसे लोकतंत्र का मजाक बताया। उन्होंने कहा—
- “कांग्रेस न्यायपालिका का अपमान करती है…”
- “कांग्रेस निर्वाचन आयोग का अपमान करती है…”
- “कांग्रेस निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को बंदर बताकर उनका अपमान कर रही है…”
शर्मा ने कहा कि कांग्रेस के पास मुद्दों की कमी है, इसलिए वे इस तरह के नाटकीय प्रदर्शन करके सुर्खियाँ बटोरना चाहते हैं।
नेहरू, अर्जुन सिंह, वोरा, दिग्विजय – ‘क्या वे भी बंदर थे?’ रामेश्वर शर्मा का जोरदार सवाल
कांग्रेस द्वारा भाजपा को “बंदर सरकार” कहने पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा भड़क गए।
उन्होने तीखे शब्दों में कहा—
“जब पंडित जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री थे, तो वे कौन से बंदर थे? क्या अर्जुन सिंह, मोतीलाल वोरा और दिग्विजय सिंह भी बंदर थे?”
यह बयान राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ रहा है, क्योंकि भाजपा अब कांग्रेस को उन्हीं उदाहरणों से घेरना चाहती है जिनका उसने हमेशा सम्मान किया है।
शर्मा बोले—
“कांग्रेस को जनता की आवाज उठाना ही नहीं आता। वे सिर्फ मीडिया में छपने के लिए नए-नए ड्रामे करते हैं।”
‘कांग्रेस की जलन की बदबू सब जगह आ रही है’ – रामेश्वर शर्मा का कटाक्ष
भाजपा विधायक ने कांग्रेस पर एक और तीखा व्यंग्य किया। उन्होंने कहा—
“कांग्रेस कभी ताड़का बनती है, कभी बंदर। लगता है उनके मन में ऐसा ही रूप धारण करने की इच्छा है। अगर इच्छा इतनी ज्यादा है, तो भगवान उनकी सुन ले।”
उन्होंने आगे कहा कि—
“मध्यप्रदेश और भारत वंदे भारत की रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं, और कांग्रेस इस विकास को देखकर जल रही है। उनकी जलन की बदबू अब हर तरफ फैल रही है।”
यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और समर्थक इसे कांग्रेस बनाम भाजपा के एक नए राजनीतिक टकराव के रूप में देख रहे हैं।
कांग्रेस बनाम भाजपा: बढ़ रहा है सियासी तापमान
विधानसभा में कांग्रेस के इस प्रकार के प्रदर्शन को भाजपा नौटंकी बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता की आवाज कह रही है।
दोनों दलों के बीच लगातार बढ़ता यह टकराव आगामी सत्रों में और तीखा होने के संकेत दे रहा है।
मुख्य मुद्दे जो इस विवाद में उभरे:
- कांग्रेस का आरोप: भाजपा सरकार हर वर्ग पर “उस्तरा चला रही है”
- भाजपा का जवाब: कांग्रेस लोकतंत्र और संस्थाओं का अपमान कर रही है
- रामेश्वर शर्मा की तीखी टिप्पणी: नेहरू से दिग्विजय तक पर सवाल
- कांग्रेस का दावा: हमारा प्रदर्शन प्रतीकात्मक, जनता की पीड़ा दिखाने का तरीका
- भाजपा का आरोप: मीडिया में छपने के लिए ड्रामा
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस और भाजपा के बीच यह टकराव केवल एक प्रदर्शन का परिणाम नहीं, बल्कि राज्य की बदलती राजनीतिक रणनीतियों का संकेत भी है।
जहाँ कांग्रेस सरकार को “बंदर सरकार” बताकर तीखे हमले कर रही है, वहीं भाजपा कांग्रेस की इस हरकत को—
“लोकतंत्र का अपमान, राजनीतिक जलन और नौटंकी” बता रही है।
कुल मिलाकर MP की राजनीति में यह विवाद अगले कुछ दिनों तक चर्चा में बना रहेगा।

