MP Weather Today: मध्य प्रदेश में मानसून फिर हुआ एक्टिव, 8 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट, अब भी 17% कम हुई वर्षा
MP में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने मंगलवार को प्रदेश के आठ जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। सतना, कटनी, उमरिया, मंडला, डिंडौरी, सिवनी, रायसेन और बैतूल में अगले 24 घंटे के दौरान तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। हालांकि मानसून की सक्रियता के बावजूद राज्य में अब तक सामान्य से 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे अधिकांश जिले अब भी वर्षा के निर्धारित कोटे से पीछे चल रहे हैं।
8 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने गहरे कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से मध्य प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां तेज हो रही हैं। इसके चलते सतना, कटनी, उमरिया, मंडला, डिंडौरी, सिवनी, रायसेन और बैतूल जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान चार इंच या उससे अधिक बारिश होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में प्रशासन को सतर्क रहने और लोगों को आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग का कहना है कि लगातार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ सकता है। निचले इलाकों में जलभराव और कुछ स्थानों पर बाढ़ जैसी स्थिति भी बन सकती है। ऐसे में लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम विभाग की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की गई है।
भोपाल समेत कई शहरों में बारिश के आसार
राजधानी भोपाल में मंगलवार सुबह से ही रुक-रुककर बूंदाबांदी का दौर जारी है। दिनभर बादल छाए रहने और कई इलाकों में तेज बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, शहडोल, बालाघाट, छिंदवाड़ा, सागर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, खरगोन, खंडवा, धार, झाबुआ, बड़वानी, देवास, मंदसौर और रतलाम सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार कुछ स्थानों पर गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। किसानों को खेतों में जल निकासी की व्यवस्था बनाए रखने और फसलों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है।
MP में अब भी 17 प्रतिशत कम बारिश
मानसून सक्रिय होने के बावजूद मध्य प्रदेश में इस सीजन में अब तक सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 336.7 मिलीमीटर (करीब 13.2 इंच) वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जबकि इस समय तक 407 मिलीमीटर (करीब 16 इंच) बारिश हो जानी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में लगभग 17 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है।
यदि क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से करीब 20 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में 15 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में यदि अच्छी बारिश होती है तो यह कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।
अधिकांश जिले अब भी बारिश के कोटे से पीछे
MP के अधिकांश जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। केवल कुछ जिलों में ही औसत से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। इनमें भोपाल, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, मंदसौर, राजगढ़ और सीहोर शामिल हैं।
देवास इस सूची में सबसे आगे है, जहां सामान्य से लगभग 29 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। वहीं कई जिलों में अब भी बारिश का बड़ा घाटा बना हुआ है, जिससे कृषि गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो खरीफ फसलों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। हालांकि वर्तमान मौसम प्रणाली से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
28 से 30 जुलाई के बीच और तेज होगा मानसून
मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना गहरा कम दबाव का क्षेत्र पश्चिम बंगाल और उत्तर ओडिशा तट के पास पहुंच चुका है। यह मौसम तंत्र झारखंड और छत्तीसगढ़ होते हुए मध्य भारत की ओर बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से 28 से 30 जुलाई के बीच मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अवधि में कई जिलों में लगातार बारिश होने से प्रदेश के वर्षा आंकड़ों में सुधार आने की संभावना है। साथ ही जलाशयों और बांधों में भी पानी की आवक बढ़ सकती है, जिससे सिंचाई और पेयजल व्यवस्था को लाभ मिलेगा।
जुलाई में भी उम्मीद से कम बरसे बादल
इस वर्ष जून महीने में मानसून की धीमी शुरुआत हुई थी, जिसके कारण बारिश सामान्य से काफी कम रही। जुलाई के पहले पखवाड़े में अच्छी वर्षा होने से स्थिति में सुधार की उम्मीद जगी थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से तेज बारिश का सिलसिला कमजोर पड़ गया। इसका असर यह हुआ कि प्रदेश एक बार फिर बारिश के घाटे की स्थिति में पहुंच गया।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में जुलाई महीने में पूरे मानसून की लगभग 40 प्रतिशत बारिश हो जाती है। लेकिन इस बार वर्षा का वितरण असमान रहने के कारण कई जिलों में अपेक्षित बारिश नहीं हो सकी।
प्रशासन और लोगों के लिए सावधानी जरूरी
भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए जिला प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन दलों को तैयार रहने को कहा गया है। लोगों को सलाह दी गई है कि तेज बारिश के दौरान नदी-नालों के पास जाने से बचें, जलभराव वाले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही न करें और बिजली गिरने की आशंका के दौरान खुले स्थानों में खड़े न रहें।
अगले कुछ दिन अहम
MP मौसम विभाग का मानना है कि आगामी तीन दिन मध्य प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। यदि पूर्वानुमान के अनुसार व्यापक और अच्छी बारिश होती है, तो प्रदेश में वर्षा की कमी काफी हद तक कम हो सकती है। इससे किसानों को राहत मिलेगी, जलाशयों का जलस्तर बढ़ेगा और खरीफ फसलों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनेंगी। वहीं जिन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, वहां लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की आवश्यकता होगी।
