MP Weather Today: मध्य प्रदेश में फिर बदला मौसम, 5 जिलों में अति भारी बारिश का अलर्ट, 1 अगस्त तक जमकर बरसेंगे बादल
MP में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। पिछले कुछ दिनों की अपेक्षाकृत कम बारिश के बाद अब मौसम ने नया रुख ले लिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बुधवार के लिए प्रदेश के पांच जिलों में अति भारी बारिश और 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सक्रिय मानसूनी तंत्र और चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में 1 अगस्त तक तेज बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और नदी-नालों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी है।
मौसम विभाग के अनुसार बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम और रायसेन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान चार इंच या उससे अधिक बारिश होने की संभावना है। इन जिलों में कई स्थानों पर जलभराव, सड़क संपर्क प्रभावित होने और निचले इलाकों में पानी भरने जैसी स्थिति बन सकती है। स्थानीय प्रशासन को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
इनके अलावा देवास, सीहोर, हरदा, बैतूल, पांढुर्णा, सागर, नरसिंहपुर, दमोह, जबलपुर और छतरपुर जिलों में भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग ने इन इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज वर्षा और कुछ स्थानों पर बिजली गिरने की संभावना भी जताई है। किसानों और खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
क्यों सक्रिय हुआ मानसून?
MP मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में बारिश का नया दौर कई सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण शुरू हुआ है। वर्तमान में मानसूनी द्रोणिका मध्य भारत से होकर गुजर रही है। इसके साथ ही प्रदेश के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण भी सक्रिय है। दूसरी ओर ओडिशा, दक्षिण झारखंड और उत्तर छत्तीसगढ़ की दिशा से आगे बढ़ रहा निम्न दबाव का क्षेत्र मध्य प्रदेश के पूर्वी और मध्य हिस्सों में नमी लेकर पहुंच रहा है। यही कारण है कि प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार बादल छाए हुए हैं और वर्षा की गतिविधियां बढ़ गई हैं।
मौसम विभाग का अनुमान है कि यह सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर तो होगा, लेकिन तब तक प्रदेश के अधिकांश जिलों में अच्छी बारिश करा सकता है। इससे मानसून की अब तक की कमी काफी हद तक पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
इन शहरों में भी होगी बारिश
राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के अनेक शहरों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। भोपाल, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, उज्जैन, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, रतलाम, नीमच, आगर-मालवा, शाजापुर, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, कटनी, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, टीकमगढ़ और निवाड़ी सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर तेज वर्षा भी हो सकती है।
मंगलवार को भी कई जिलों में बरसे बादल
मंगलवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। भोपाल में दिनभर बादल छाए रहे और रुक-रुककर हल्की फुहारें पड़ती रहीं। वहीं मुरैना, सिवनी, बालाघाट और आसपास के क्षेत्रों में तेज बारिश रिकॉर्ड की गई। कई स्थानों पर शाम और रात के समय भी बारिश का सिलसिला जारी रहा, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई और लोगों को उमस से राहत मिली।
अब भी सामान्य से कम बारिश
हालांकि मानसून सक्रिय हो गया है, लेकिन प्रदेश में अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में अब तक औसतन 13.6 इंच (345.9 मिमी) वर्षा हुई है, जबकि इस समय तक लगभग 16.5 इंच (418.4 मिमी) बारिश हो जानी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अभी भी लगभग 17 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है।
पूर्वी मध्य प्रदेश में करीब 18 प्रतिशत और पश्चिमी मध्य प्रदेश में लगभग 17 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। यदि अगले कुछ दिनों तक अच्छी वर्षा होती रही तो इस कमी में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।
अधिकांश जिले अब भी बारिश के कोटे से पीछे
MP के अधिकांश जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज हुई है। अब तक केवल भोपाल, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, मंदसौर, राजगढ़ और सीहोर ऐसे जिले हैं जहां सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। इनमें देवास सबसे आगे है, जहां सामान्य से करीब 29 प्रतिशत अधिक वर्षा हो चुकी है। बाकी अधिकांश जिलों में मानसून की कमी अब भी बनी हुई है।
1 अगस्त तक जारी रहेगा बारिश का दौर
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सक्रिय मानसूनी तंत्र का असर कम से कम 1 अगस्त तक बना रहेगा। इस दौरान कई जिलों में लगातार बारिश, तेज बौछारें और कहीं-कहीं अति भारी वर्षा देखने को मिल सकती है। नदी-नाले उफान पर आ सकते हैं और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। ऐसे में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने, मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी चार से पांच दिनों तक इसी तरह बारिश होती रही तो प्रदेश में मानसून की अब तक की कमी काफी हद तक दूर हो सकती है। इससे खरीफ फसलों को भी बड़ा लाभ मिलेगा और जलाशयों का जलस्तर बढ़ने से सिंचाई एवं पेयजल की स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है। फिलहाल पूरे प्रदेश की नजरें अगले कुछ दिनों की बारिश पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यही दौर इस बार के मानसून की दिशा और प्रभाव तय करेगा।
