MP Waqf Board: मध्यप्रदेश बना देश का पहला राज्य जिसने नए वक्फ अधिनियम-2025 के तहत किया बोर्ड का पुनर्गठन, डॉ. सनवर पटेल बने अध्यक्ष
भोपाल। MP ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाते हुए देश में पहली बार नए वक्फ अधिनियम-2025 के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्णय के बाद राज्य सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस नई व्यवस्था के साथ मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने नए कानून के अनुसार वक्फ बोर्ड का गठन किया है। नए बोर्ड की कमान अब डॉ. सनवर पटेल को सौंपी गई है, जिन्हें अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
सरकार का कहना है कि इस पुनर्गठन का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन, पारदर्शिता बढ़ाना और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है। नए बोर्ड के गठन के साथ ही यह उम्मीद जताई जा रही है कि वक्फ से संबंधित कार्यों में सुधार आएगा और लंबे समय से लंबित मामलों का समाधान तेजी से हो सकेगा।
डॉ. सनवर पटेल बने नए वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष
नए वक्फ बोर्ड में अध्यक्ष के रूप में डॉ. सनवर पटेल की नियुक्ति की गई है। उनके नेतृत्व में बोर्ड के संचालन और नीतिगत निर्णयों को आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार का मानना है कि उनके अनुभव और प्रशासनिक समझ से बोर्ड की कार्यप्रणाली को नई दिशा मिलेगी।
बोर्ड में कुल 10 सदस्यों को शामिल किया गया है, जो विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक प्रतिनिधित्व से आते हैं। यह संरचना नए वक्फ अधिनियम-2025 के प्रावधानों के अनुसार की गई है।
पहली बार दो हिंदू सदस्य भी शामिल
इस बार वक्फ बोर्ड के गठन में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। पहली बार बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों को भी शामिल किया गया है। इनमें मनोज मालपानी और अनिमेश भार्गव के नाम शामिल हैं। यह कदम सामाजिक समावेश और विविधता की दिशा में एक नया प्रयोग माना जा रहा है।
सरकार का कहना है कि विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधित्व से निर्णय प्रक्रिया अधिक संतुलित और पारदर्शी होगी।
नए बोर्ड के अन्य सदस्य
नए वक्फ बोर्ड में कुल 10 सदस्य नामित किए गए हैं, जिनमें विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इनमें शामिल हैं—
- नजमा हेपतुल्ला
- विधायक आतिफ अकील
- फैजान खान
- फातेमा चौधरी
- शाइस्ता सुल्तान
- शबाना खान
- पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के आयुक्त
- मनोज मालपानी
- अनिमेश भार्गव
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नजमा हेपतुल्ला पहले से ही बोर्ड की सदस्य हैं और उनका कार्यकाल 18 अप्रैल 2028 तक जारी रहेगा। इसलिए उन्हें नए बोर्ड में भी उनके शेष कार्यकाल के अनुसार शामिल किया गया है।
नए कानून के तहत पहली बार बड़ा बदलाव
MP सरकार ने वक्फ अधिनियम-1995 (संशोधित 2025) के तहत यह पुनर्गठन किया है। अधिकारियों के अनुसार, यह देश में अपनी तरह का पहला प्रयोग है, जिसमें किसी राज्य ने नए संशोधित कानून के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है।
सरकार का कहना है कि यह कदम केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है। लंबे समय से वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवाद, अतिक्रमण और प्रबंधन संबंधी समस्याओं को देखते हुए यह सुधारात्मक कदम उठाया गया है।
प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता पर जोर
राज्य सरकार का मानना है कि नए बोर्ड के गठन से वक्फ संपत्तियों के उपयोग और देखरेख में सुधार होगा। साथ ही वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी और संपत्तियों से जुड़ी जानकारी अधिक व्यवस्थित रूप में उपलब्ध होगी।
इसके अलावा, बोर्ड के माध्यम से निर्णय प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया जाएगा, जिससे संबंधित मामलों का निपटारा समय पर हो सके।
सरकार का दावा: ऐतिहासिक कदम
मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय राज्य प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह पुनर्गठन भविष्य में वक्फ संपत्तियों के बेहतर उपयोग और समाजहित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
निष्कर्ष
MP द्वारा नए वक्फ अधिनियम-2025 के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन एक ऐतिहासिक प्रशासनिक बदलाव माना जा रहा है। डॉ. सनवर पटेल को अध्यक्ष बनाए जाने और पहली बार दो हिंदू सदस्यों को शामिल किए जाने के साथ यह बोर्ड नए स्वरूप में कार्य करेगा। आने वाले समय में इसके प्रभाव राज्य की वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासनिक सुधारों में देखने को मिल सकते हैं।
