MP: Ujjain में अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर महिला ने फेंका लाल मिर्च पाउडर,
यह घटना उज्जैन जिले के खाचरौद तहसील के घिनोदा गांव की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, गांव में मांगीलाल पाटीदार का मकान है, जिस पर सड़क के हिस्से पर अवैध अतिक्रमण करने का आरोप लगाया गया था। शिकायत के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की योजना बनाई थी।
प्रशासन को मिली शिकायत में कहा गया था कि मकान के निर्माण के दौरान सड़क और नाली के हिस्से पर कब्जा कर लिया गया है, जिससे आम लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है।
19 मई को हुई थी कार्रवाई की कोशिश
प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस मामले में 12 जनवरी को अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया गया था। लगभग चार महीने बाद 18 मई को इस आदेश को अमल में लाने के लिए टीम का गठन किया गया।
19 मई को नायब तहसीलदार के नेतृत्व में प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। टीम में राजस्व निरीक्षक भगवान सिंह यादव, दो पटवारी, सचिव और पुलिस बल शामिल थे।
समझाइश के बाद भड़का विरोध
जब टीम मौके पर पहुंची तो उन्होंने मकान मालिक मांगीलाल पाटीदार और उनकी पत्नी सजन बाई को समझाइश देते हुए अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही। शुरुआत में दोनों लोग घर के अंदर चले गए, लेकिन कुछ ही देर बाद स्थिति अचानक बदल गई।
जैसे ही टीम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की, तभी घर की छत पर मौजूद सजन बाई ने विरोध शुरू कर दिया।
छत से फेंका गया लाल मिर्च पाउडर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सजन बाई ने छत पर खड़े होकर लाल मिर्च पाउडर से भरी थाली उठाई और प्रशासनिक टीम की ओर फेंकना शुरू कर दिया। अचानक हुई इस घटना से वहां मौजूद अधिकारी और कर्मचारी घबरा गए।
मिर्च पाउडर आंखों और सांसों में जाने के डर से टीम के सदस्य तुरंत पीछे हट गए और कुछ अधिकारी वहां से भागते नजर आए।
इस पूरी घटना का वीडियो किसी स्थानीय व्यक्ति ने रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
प्रशासनिक टीम को वापस लौटना पड़ा
इस अप्रत्याशित विरोध के कारण प्रशासनिक टीम अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी नहीं कर सकी और मौके से वापस लौट गई। अधिकारियों का कहना है कि हालात को देखते हुए फिलहाल कार्रवाई रोक दी गई है।
इस घटना के बाद इलाके में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो गई।
आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी
सचिव चंद्रभान सिंह ने जानकारी दी है कि इस घटना के बाद मांगीलाल पाटीदार और उनकी पत्नी सजन बाई के खिलाफ कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। आगे की कानूनी कार्रवाई खाचरौद थाना पुलिस द्वारा की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि सरकारी कार्य में बाधा डालना गंभीर अपराध है और इस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अतिक्रमण को लेकर पुराना विवाद
यह मामला नया नहीं है। शिकायत के अनुसार, मकान के निर्माण के दौरान सड़क के हिस्से पर अवैध कब्जा कर लिया गया था, जिससे सार्वजनिक रास्ता और नाली बाधित हो रही थी।
स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद प्रशासन ने जांच की और अतिक्रमण को हटाने के आदेश पारित किए थे।
चार महीने बाद शुरू हुई कार्रवाई
12 जनवरी को अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी होने के बाद लंबे समय तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी। इसके बाद 18 मई को प्रशासन ने दोबारा सक्रियता दिखाते हुए एक विशेष टीम का गठन किया और मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की। प्रशासनिक टीम में राजस्व विभाग और पुलिस बल के अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने नियमानुसार कार्रवाई की शुरुआत की।
हालांकि, जैसे ही टीम ने अतिक्रमण हटाने का काम शुरू किया, मौके पर विरोध की स्थिति उत्पन्न हो गई। स्थानीय लोगों के विरोध और तनावपूर्ण माहौल के कारण प्रशासन को अपनी कार्रवाई बीच में ही रोकनी पड़ी। स्थिति को देखते हुए टीम ने सुरक्षा कारणों से पीछे हटने का फैसला लिया और बिना अतिक्रमण हटाए वापस लौटना पड़ा। इसके बाद मामले को लेकर आगे की रणनीति तैयार करने और कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।
वायरल वीडियो ने बढ़ाया मामला
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और चर्चा में आ गया है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि महिला छत से मिर्च पाउडर फेंक रही है और नीचे मौजूद अधिकारी खुद को बचाते हुए पीछे हट रहे हैं।
इस वीडियो के बाद लोगों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं—कुछ लोग इसे विरोध का तरीका बता रहे हैं तो कुछ इसे कानून व्यवस्था में बाधा मान रहे हैं।
प्रशासन के सामने चुनौती
उज्जैन के घिनोदा गांव की यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि अतिक्रमण हटाने जैसी प्रशासनिक कार्रवाइयों में कभी-कभी अप्रत्याशित विरोध भी देखने को मिलता है। लाल मिर्च पाउडर फेंकने जैसी घटना ने न केवल कार्रवाई को रोक दिया, बल्कि पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है और क्या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई दोबारा पूरी हो पाती है या नहीं।
