MP में तबादलों का दौर शुरू, जनप्रतिनिधियों की सिफारिशों पर तैयार हुई कर्मचारियों की सूची
ट्रांसफर बैन हटते ही बढ़ी हलचल
MP सरकार द्वारा कर्मचारियों और अधिकारियों के स्थानांतरण पर लगाया गया प्रतिबंध (बैन) हटाए जाने के बाद प्रदेशभर में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी सरकार ने सीमित अवधि के लिए तबादलों की अनुमति दी है, जिसके बाद विभिन्न विभागों में स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इस फैसले का लंबे समय से इंतजार कर रहे कर्मचारी अब अपनी पसंदीदा जगहों पर पदस्थापना की उम्मीद लगाए बैठे हैं, वहीं कुछ कर्मचारी ऐसे भी हैं जो संभावित प्रशासनिक तबादलों को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, जिले के प्रमुख जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने स्तर पर कर्मचारियों और अधिकारियों की सूची तैयार कर ली है। इन सूचियों को जिले के प्रभारी मंत्री के समक्ष अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जा चुका है। माना जा रहा है कि शिक्षा विभाग को छोड़कर अन्य अधिकांश विभागों की स्थानांतरण सूची जारी होने की प्रक्रिया आज से प्रारंभ हो सकती है। वहीं शिक्षा विभाग की सूची जून माह के अंतिम सप्ताह, विशेष रूप से 28 जून के आसपास जारी होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
पसंदीदा स्थानों पर पदस्थापना के लिए बढ़ी सक्रियता
जैसे ही सरकार ने स्थानांतरण नीति के तहत बैन हटाया, वैसे ही कर्मचारी और अधिकारी सक्रिय हो गए। कई कर्मचारी ऐसे हैं जो लंबे समय से अपने गृह जिले या पसंदीदा कार्यस्थल पर जाने की प्रतीक्षा कर रहे थे। उन्होंने स्थानीय विधायकों, सांसदों और अन्य प्रभावशाली नेताओं से संपर्क कर अपनी अनुशंसा सूची में नाम शामिल करवाने का प्रयास शुरू कर दिया।
दूसरी ओर ऐसे कर्मचारी भी हैं जो वर्तमान पदस्थापना स्थल पर बने रहना चाहते हैं। उन्हें आशंका है कि राजनीतिक या प्रशासनिक कारणों से उनका स्थानांतरण किसी अन्य क्षेत्र में किया जा सकता है। ऐसे कर्मचारी भी जनप्रतिनिधियों से संपर्क साधकर अपने तबादले को रोकने के प्रयासों में लगे हुए हैं।
प्रभारी मंत्री के पास पहुंचीं विभागवार सूचियां
जिले के विभिन्न जनप्रतिनिधियों द्वारा तैयार की गई कर्मचारियों की सूची अब जिले के प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप के पास पहुंच चुकी है। इन सूचियों के आधार पर विभागवार अनुमोदन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। माना जा रहा है कि जिन विभागों में स्थानांतरण प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल है, वहां आदेश जल्द जारी किए जा सकते हैं।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि अधिकांश विभागों में पहले प्रशासनिक आधार पर तबादले किए जाएंगे, जबकि कुछ मामलों में कर्मचारियों की स्वैच्छिक मांगों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। अंतिम निर्णय विभागीय नियमों और राजनीतिक अनुशंसाओं के आधार पर लिया जाएगा।
शिक्षा विभाग में अलग प्रक्रिया
शिक्षा विभाग में स्थानांतरण प्रक्रिया अन्य विभागों से कुछ अलग रहने वाली है। विभाग ने प्रशासनिक और स्वैच्छिक दोनों प्रकार के स्थानांतरणों को एक साथ जारी करने की योजना बनाई है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ की जा चुकी है।
शिक्षकों और अन्य शैक्षणिक कर्मचारियों से निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन मांगे गए हैं। आवेदन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद सभी मामलों की समीक्षा की जाएगी और लगभग 28 जून तक संयुक्त रूप से स्थानांतरण आदेश जारी किए जाने की संभावना है। इसलिए शिक्षा विभाग की सूची अन्य विभागों की तुलना में कुछ देर से जारी होगी।
किन कर्मचारियों के तबादले होंगे प्रभारी मंत्री की अनुशंसा से
राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार कई श्रेणियों के कर्मचारियों के तबादले स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा के आधार पर किए जाएंगे। इनमें मुख्य रूप से तृतीय श्रेणी कर्मचारी, प्राथमिक शिक्षक, शिक्षा विभाग के लिपिक, पटवारी, पुलिस विभाग के निचले स्तर के कर्मचारी, कृषि विभाग के ग्राम सेवक, लोक निर्माण विभाग के तृतीय श्रेणी कर्मचारी, जनपद पंचायतों के कर्मचारी, सहकारिता विभाग के कर्मचारी तथा ग्राम पंचायत सचिव शामिल हैं।
इन कर्मचारियों के संबंध में तैयार की गई सूचियों का अंतिम अनुमोदन जिले के प्रभारी मंत्री द्वारा किया जाएगा। अनुमोदन मिलने के बाद संबंधित विभाग स्थानांतरण आदेश जारी करेंगे। इसलिए इन कर्मचारियों के लिए जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बड़े अधिकारियों के तबादले भोपाल स्तर से होंगे
जहां तृतीय श्रेणी और निचले स्तर के कर्मचारियों के स्थानांतरण स्थानीय स्तर पर तय होंगे, वहीं वरिष्ठ अधिकारियों और उच्च पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के तबादले सीधे विभागीय मंत्री स्तर से किए जाएंगे।
शिक्षा विभाग में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षक, व्याख्याता तथा अन्य वरिष्ठ शैक्षणिक पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के स्थानांतरण का अधिकार शिक्षा मंत्री के पास रहेगा। इसी प्रकार नगरीय निकायों से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादले नगरीय प्रशासन मंत्री द्वारा स्वीकृत किए जाएंगे।
इसके अतिरिक्त विभिन्न विभागों के एसडीओ, इंजीनियर, द्वितीय श्रेणी कर्मचारी, विद्युत वितरण कंपनियों के अधिकारी तथा महाविद्यालयों में कार्यरत प्राध्यापकों के स्थानांतरण भी विभागीय मंत्री स्तर से ही संपन्न होंगे। इन मामलों में विधायकों और सांसदों द्वारा तैयार की गई अनुशंसा नोटशीट के माध्यम से भोपाल भेजी गई है, जिसके आधार पर अंतिम आदेश जारी होंगे।
छह प्रमुख नेताओं की सिफारिश रहेगी सबसे प्रभावी
जिले में इस बार स्थानांतरण प्रक्रिया में छह प्रमुख नेताओं की भूमिका सबसे अधिक प्रभावशाली मानी जा रही है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जिन कर्मचारियों का नाम इन नेताओं की अनुशंसा सूची में शामिल होगा, उनके स्थानांतरण की संभावना अधिक होगी।
इन नेताओं में सांसद रोडमल नागर, मंत्री नारायणसिंह पंवार, मंत्री गौतम टेटवाल, विधायक मोहन शर्मा, विधायक अमरसिंह यादव, विधायक हजारीलाल दांगी तथा भाजपा जिलाध्यक्ष ज्ञानसिंह गुर्जर प्रमुख रूप से शामिल हैं।
हालांकि संख्या छह बताई जा रही है, लेकिन स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के अनुसार इन प्रमुख नेताओं की अनुशंसा को सबसे अधिक महत्व दिया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर तैयार होने वाली अधिकांश सूचियों में इन्हीं जनप्रतिनिधियों की राय को प्राथमिकता मिलने की संभावना है।
असंतुष्ट नेताओं के निशाने पर कुछ कर्मचारी
स्थानांतरण प्रक्रिया केवल इच्छुक कर्मचारियों को पसंदीदा स्थान दिलाने तक सीमित नहीं है। कई मामलों में स्थानीय जनप्रतिनिधि उन कर्मचारियों को भी हटाना चाहते हैं जिनके कार्यों से वे संतुष्ट नहीं हैं।
सूत्रों के अनुसार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कुछ ऐसे कर्मचारी चिन्हित किए गए हैं जिनके कार्य व्यवहार या प्रशासनिक शैली को लेकर स्थानीय नेताओं में नाराजगी है। ऐसे कर्मचारियों को उनके वर्तमान कार्यस्थल से हटाने की योजना बनाई गई है।
कई मामलों में संबंधित कर्मचारी स्थानांतरण नहीं चाहते, फिर भी राजनीतिक अनुशंसा के आधार पर उनका तबादला किया जा सकता है। इससे कई कर्मचारियों में अनिश्चितता और चिंता का माहौल बना हुआ है।
स्थानांतरण नीति के तहत तय किए गए मापदंड
राज्य सरकार ने स्थानांतरण प्रक्रिया को नियंत्रित और संतुलित बनाए रखने के लिए स्पष्ट मापदंड निर्धारित किए हैं। इन नियमों के अनुसार प्रत्येक विभाग में कर्मचारियों की कुल संख्या के आधार पर स्थानांतरण की अधिकतम सीमा तय की गई है।
यदि किसी विभाग में कर्मचारियों की संख्या 200 तक है, तो वहां अधिकतम 20 प्रतिशत कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जा सकेगा।
जिन विभागों में कर्मचारियों की संख्या 201 से 1000 के बीच है, वहां कुल कर्मचारियों के 15 प्रतिशत तक तबादले किए जा सकते हैं।
1001 से 2000 कर्मचारियों वाले विभागों में यह सीमा 10 प्रतिशत निर्धारित की गई है।
वहीं जिन विभागों में कर्मचारियों की संख्या 2001 से अधिक है, वहां केवल 5 प्रतिशत कर्मचारियों के स्थानांतरण की अनुमति दी गई है।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से विभागीय कार्य प्रभावित नहीं होंगे और प्रशासनिक संतुलन भी बना रहेगा।
सबसे अधिक प्रभावित होंगे बड़े विभाग
प्रदेश के कुछ विभाग ऐसे हैं जिनमें कर्मचारियों की संख्या सबसे अधिक है और स्थानांतरण प्रक्रिया का प्रभाव भी इन्हीं विभागों पर सबसे ज्यादा दिखाई देगा।
इनमें सबसे प्रमुख शिक्षा विभाग है, जहां हजारों शिक्षक और कर्मचारी कार्यरत हैं। इसके अलावा पुलिस विभाग में भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों के तबादले होने की संभावना है।
राजस्व विभाग में कार्यरत पटवारी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के पंचायत सचिव तथा कृषि विभाग के ग्राम सेवक भी इस प्रक्रिया से बड़े स्तर पर प्रभावित होंगे। इन विभागों में लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों की सूची तैयार की गई है और प्रशासनिक आवश्यकताओं के आधार पर उनके तबादले किए जा सकते हैं।
कर्मचारियों और अधिकारियों की नजर आदेशों पर
वर्तमान समय में जिले और प्रदेशभर के हजारों कर्मचारी स्थानांतरण आदेशों का इंतजार कर रहे हैं। कई कर्मचारियों को उम्मीद है कि उन्हें अपने मनचाहे स्थान पर पदस्थापना मिल जाएगी, जबकि कुछ लोग संभावित बदलावों को लेकर चिंतित हैं।
जनप्रतिनिधियों की अनुशंसाएं, विभागीय आवश्यकताएं और शासन के दिशा-निर्देश इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आने वाले दिनों में विभागवार सूची जारी होते ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस कर्मचारी को नई जिम्मेदारी मिलेगी और किसे अपने वर्तमान कार्यस्थल पर ही कार्य जारी रखना होगा।
फिलहाल प्रशासनिक गलियारों में तबादलों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है और सभी की निगाहें शासन द्वारा जारी किए जाने वाले आगामी आदेशों पर टिकी हुई हैं।
